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सेवा, सत्संग और गुरु आज्ञा के पालन से जीवन बनता है सफल : कंवर साहेब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Jun 2026 12:29 AM IST
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Service, spiritual gatherings, and obedience to the Guru's commands make life successful: Kanwar Saheb.
दिनोद के राधास्वामी आश्रम में आयोजित सत्संग में मौजूद लोग। 
भिवानी। राधास्वामी मुख्यालय दिनोद में आयोजित सत्संग में परम संत हुजूर कंवर साहेब महाराज ने कहा कि सेवा, सत्संग, नाम-सुमिरन और गुरु आज्ञा के पालन से ही मानव जीवन को सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सत्संग मनुष्य को जीवन जीने की सही दिशा देता है और सदाचार का मार्ग दिखाता है।
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उन्होंने कहा कि सत्संग वह दिव्य पाठशाला है जहां प्रत्येक क्षण जीवन जीने की नई शिक्षा मिलती है। मनुष्य जीवन में घटने वाली घटनाओं के परिणाम तो देखता है लेकिन उनके कारणों पर विचार नहीं करता। वह वर्तमान पल को जीता है पर अगले ही पल से अनजान रहता है। एक क्षण पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है फिर भी मनुष्य कई जन्मों की योजनाएं और संग्रह करने में लगा रहता है। यह भी निश्चित नहीं कि हाथ से तोड़ा हुआ निवाला मुंह तक पहुंचेगा या नहीं।
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कंवर साहेब महाराज ने कहा कि संगति का प्रभाव मनुष्य के जीवन को बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है। रामायण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। जिस रामराज्य की आज भी चर्चा होती है उसकी नींव सत्य, प्रेम और श्रेष्ठ संगति पर थी।
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भगवान श्रीराम के वनवास के बाद 14 वर्षों तक अयोध्या में दीप नहीं जले लेकिन एक व्यक्ति के दूषित विचारों ने पूरे राज्य का वातावरण बदल दिया। वहीं लंका जैसे राक्षसी वातावरण में भी विभीषण प्रभु-भक्ति और सत्य पर अडिग रहे। इससे स्पष्ट है कि पवित्र विचारों वाला व्यक्ति बुरे वातावरण में भी अपने संस्कार नहीं छोड़ता जबकि अपवित्र विचारों वाला व्यक्ति सत्संग में बैठकर भी नहीं बदलता।
उन्होंने कहा कि मन में एक समय में या तो भक्ति, प्रेम, सेवा और सत्संग बस सकते हैं या फिर बुराइयां। इसलिए हृदय को पवित्र बनाना आवश्यक है। नाम की कमाई तभी फल देती है जब रहनी-सहनी और आचरण शुद्ध हों। जिस प्रकार चंदन के वृक्ष के पास खड़े अन्य वृक्ष भी उसकी सुगंध ग्रहण कर लेते हैं उसी प्रकार संत-महात्माओं की संगति से सामान्य व्यक्ति के जीवन में भी सद्गुणों का विकास होने लगता है।

प्रवचन के समापन में कंवर साहेब महाराज ने कहा कि मनुष्य सत्य का व्यापार करने आया था लेकिन विषय-वासनाओं में उलझकर अपने अमूल्य श्वास व्यर्थ गंवा रहा है। परमात्मा द्वारा मिली इस अनमोल पूंजी को नाम-सुमिरन, सेवा, सत्संग और गुरु आज्ञा के पालन में लगाकर ही मानव जीवन को सफल बनाया जा सकता है।
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