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बारानी क्षेत्रों में उर्वरकों की आधी मात्रा का करें प्रयोग : डॉ. जगदेव सिंह
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भिवानी। चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह ने कहा कि बारानी क्षेत्रों में किसानों को उर्वरकों की आधी मात्रा का ही प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में फसल उत्पादन वर्षा पर निर्भर रहता है और पानी की कमी के कारण फसलें उर्वरकों की पूरी मात्रा का उपयोग नहीं कर पातीं।
उन्होंने किसानों से जल संरक्षण के उपाय अपनाने का भी आह्वान किया। वह खंड लोहारू के गांव कुड़ल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित कृषि शिविर को संबोधित कर रहे थे। डॉ. जगदेव सिंह ने किसानों से खेतों की गहरी जुताई करने, जैविक खादों का अधिकाधिक प्रयोग करने, मल्च का उपयोग बढ़ाने तथा पानी को सोखने और थामकर रखने वाले उत्पादों जैसे अंकुरायम के प्रयोग को अपनाने की अपील की।
इससे पूर्व कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कीट वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने ग्वार फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ग्वार के उखेड़ा रोग की रोकथाम के लिए बिजाई से पहले बीज को कंजीसाइड कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत से उपचारित कर बोने की सलाह दी।
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कृषि विकास अधिकारी डॉ. संदीप यादव ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया तथा इच्छुक किसानों से प्राकृतिक खेती संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए नाम आमंत्रित किए। शिविर में किसानों द्वारा मूंग, बाजरा, नरमा सहित अन्य फसलों से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए तथा ग्वार के बीज उपचार के लिए दवा के निशुल्क सैंपल वितरित किए गए। इस अवसर पर 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया।
उन्होंने किसानों से जल संरक्षण के उपाय अपनाने का भी आह्वान किया। वह खंड लोहारू के गांव कुड़ल में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हिन्दुस्तान गम एंड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित कृषि शिविर को संबोधित कर रहे थे। डॉ. जगदेव सिंह ने किसानों से खेतों की गहरी जुताई करने, जैविक खादों का अधिकाधिक प्रयोग करने, मल्च का उपयोग बढ़ाने तथा पानी को सोखने और थामकर रखने वाले उत्पादों जैसे अंकुरायम के प्रयोग को अपनाने की अपील की।
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इससे पूर्व कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कीट वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने ग्वार फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और बीमारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने ग्वार के उखेड़ा रोग की रोकथाम के लिए बिजाई से पहले बीज को कंजीसाइड कार्बन्डाजिम 50 प्रतिशत से उपचारित कर बोने की सलाह दी।
कृषि विकास अधिकारी डॉ. संदीप यादव ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित किया तथा इच्छुक किसानों से प्राकृतिक खेती संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए नाम आमंत्रित किए। शिविर में किसानों द्वारा मूंग, बाजरा, नरमा सहित अन्य फसलों से संबंधित पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए तथा ग्वार के बीज उपचार के लिए दवा के निशुल्क सैंपल वितरित किए गए। इस अवसर पर 70 से अधिक किसानों ने भाग लिया।