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Bhiwani News: सीबीएलयू के बाहर ग्रामीणों का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर जताया रोष
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भिवानी। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के सामने प्रेमनगर धरना स्थल पर लंबे समय से आंदोलनरत ग्रामीणों ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण के समय किए गए वादों को पूरा करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
धरनास्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए युवा आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के भूमि पूजन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रेमनगर गांव की 131 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण कराया था। उस समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि जमीन देने वाले परिवारों और गांव के लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता और आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही गांव में रुकी हुई चकबंदी पूरी कराई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जमीन के बदले नौकरी और गांव के सर्वांगीण विकास का वादा किया था लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। नौकरियों में आरक्षण और प्राथमिकता देने के आश्वासन को भी दरकिनार कर दिया गया।ग्रामीणों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के बाद से ही वे नौकरियों में आरक्षण और प्राथमिकता की मांग को लेकर सीबीएलयू के सामने पिछले छह वर्षों से लगातार अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है।
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ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण के समय की गई घोषणाओं को जल्द अमल में नहीं लाया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। इस दौरान दीपक बूरा, सोमबीर सेठ, राजकुमार कोच, जिले सिंह, सुखबीर ढांडा, जुगप्रवेश, जगदीश, राजेंद्र, नरेंद्र फौगाट, राजेश बूरा, संदीप, राजपाल, बलबीर ड्राइवर, विनोद, सतबीर पहलवान और उदयभान सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
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धरनास्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए युवा आशीष कुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2016 में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के भूमि पूजन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रेमनगर गांव की 131 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण कराया था। उस समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि जमीन देने वाले परिवारों और गांव के लोगों को नौकरियों में प्राथमिकता और आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही गांव में रुकी हुई चकबंदी पूरी कराई जाएगी।
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उन्होंने कहा कि सरकार ने जमीन के बदले नौकरी और गांव के सर्वांगीण विकास का वादा किया था लेकिन कई वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया। नौकरियों में आरक्षण और प्राथमिकता देने के आश्वासन को भी दरकिनार कर दिया गया।ग्रामीणों का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के बाद से ही वे नौकरियों में आरक्षण और प्राथमिकता की मांग को लेकर सीबीएलयू के सामने पिछले छह वर्षों से लगातार अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। इसके बावजूद सरकार और प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है।
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ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि भूमि अधिग्रहण के समय की गई घोषणाओं को जल्द अमल में नहीं लाया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। इस दौरान दीपक बूरा, सोमबीर सेठ, राजकुमार कोच, जिले सिंह, सुखबीर ढांडा, जुगप्रवेश, जगदीश, राजेंद्र, नरेंद्र फौगाट, राजेश बूरा, संदीप, राजपाल, बलबीर ड्राइवर, विनोद, सतबीर पहलवान और उदयभान सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।