{"_id":"69d7f751c0024b72a301be48","slug":"world-homeopathic-day-no-needle-pricks-sweet-pills-becoming-the-remedy-for-every-illness-increasing-public-interest-bhiwani-news-c-125-1-shsr1009-149410-2026-04-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्व होम्योपेथिक दिवस : सूई ना चीरा, मीठी गोली बन रही हर मर्ज की दवा, लोगों का बढ़ा रुझान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व होम्योपेथिक दिवस : सूई ना चीरा, मीठी गोली बन रही हर मर्ज की दवा, लोगों का बढ़ा रुझान
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 10 Apr 2026 12:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
भिवानी। बदलती जीवनशैली और बढ़ती दवा निर्भरता के बीच अब लोगों का रुझान होम्योपैथिक की मीठी गोलियों की ओर बढ़ रहा है। युवा वर्ग में बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल, थायराइड जैसी बीमारियों के साथ-साथ महिलाओं में ल्यूकोरिया, अनियमित माहवारी और पीसीओडी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं।
लोग एलोपैथिक दवाओं की कड़वाहट से थक चुके हैं। इस बदलाव के चलते शहर के जिला नागरिक अस्पताल परिसर में स्थित होम्योपैथिक ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 125 मरीज पहुंच रहे हैं। ओपीडी में त्वचा रोग, शरीर दर्द, खांसी-जुकाम, बाल झड़ना, ल्यूकोरिया और पीसीओडी जैसे मामलों के मरीज ज्यादा आते हैं।
डॉ. संदीप और डॉ. दीपक के अनुसार मीठी गोलियों को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। हालांकि ये गोलियां स्वयं दवा नहीं हैं। शुगर ऑफ मिल्क से बनी ये गोलियां दवा को शरीर तक पहुंचाने का माध्यम हैं। होम्योपैथिक दवाएं डाइल्यूट रूप में इन गोलियों में भिगोकर दी जाती हैं जिससे मरीजों का इलाज बिना किसी सूई या चीरे के संभव हो पाता है। इन दिनों मरीजों का रुझान प्राकृतिक और बिना दर्द वाले उपचार की तरफ बढ़ रहा है। हर साल 10 अप्रैल को होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित, न्यूनतम दुष्प्रभावों वाली चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए विश्व होम्योपैथिक दिवस मनाया जाता है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. दीपक से बातचीत के कुछ अंश
सवाल : क्या होम्योपैथिक में इलाज लंबा चलता है?
डॉ. दीपक : ऐसा कुछ नहीं है। यह मरीज की स्थिति और बीमारी पर निर्भर करता है। होम्योपेथिक दवा बीमारी को बिल्कुल ठीक करती है। इस कारण थोड़ा समय लगता है।
सवाल : मीठी गोली ही क्यों प्रयोग की जाती हैं?
डॉ. दीपक : होम्योपैथिक दवा डाइल्यूट रूप में होती है। इस कारण इन्हें लेने में मरीज को आसानी हो इसके लिए शुगर ऑफ मिल्क की गोली प्रयोग की जाती हैं। इन गोलियों के ऊपर दवा डाली जाती है और मरीज को दी जाती है।
सवाल : क्या ये दवा बीमारी को दुगना कर ठीक करती हैं?
डॉ. दीपक : यह एक तरह की भ्रांति है। यह दवा बीमारी को जड़ से खत्म करती है। शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी को यह दवा बिल्कुल बाहर निकालती है और ठीक करती है। त्वचा संबंधी रोगों में कई बार यह दवा जब बीमारी को बाहर निकालती है तो मरीज को लगता है कि उसकी बीमारी बढ़ गई है। लेकिन ऐसा नहीं है।
सवाल : मरीजों का रुझान कैसा मिल रहा है?
डॉ. दीपक : मरीजों का अच्छा रुझान मिल रहा है। ओपीडी में लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। मरीजों को सभी प्रकार की दवा निशुल्क दी जा रही हैं। इस दवा पद्धति में हर प्रकार की बीमारी का इलाज संभव है लेकिन मरीज को विश्वास व संयम बरतने की जरूरत है। चिकित्सक के बताए परहेज के अनुसार चल कर बीमारी को बिल्कुल जड़ से खत्म किया जा सकता है।
मैं वर्ष 2024 से एलर्जी के इलाज के लिए होम्योपैथिक दवा का प्रयोग कर रहा हूं। इसका असर मुझे देखने को मिला है। यह दवा बीमारी को ठीक करने के लिए थोड़ा समय तो लेती है लेकिन जड़ से खत्म कर रही है। इस कारण बाकी लोगों को भी इस होम्योपेथिक दवाओं से बीमारी को खत्म करना चाहिए। - संजय, मरीज, भिवानी।
पिछले एक साल से होम्योपेथिक दवा का इस्तेमाल कर रहा हूं। अगर घर पर किसी प्रकार की सामान्य बीमारी बुखार, खांसी व जुकाम भी होता है तो भी इन दवाओं का प्रयोग करता हूं। मैं रेलवे से सिविल इंजीनियर सेवानिवृत हूं। अब होम्योपेथिक दवाओं पर ऑनलाइन स्टडी करता रहता हूं और लोगों को भी यह दवा प्रयोग करने के लिए सुझाव देता हूं। - कृष्ण शर्मा, मरीज, भिवानी।
Trending Videos
लोग एलोपैथिक दवाओं की कड़वाहट से थक चुके हैं। इस बदलाव के चलते शहर के जिला नागरिक अस्पताल परिसर में स्थित होम्योपैथिक ओपीडी में प्रतिदिन 70 से 125 मरीज पहुंच रहे हैं। ओपीडी में त्वचा रोग, शरीर दर्द, खांसी-जुकाम, बाल झड़ना, ल्यूकोरिया और पीसीओडी जैसे मामलों के मरीज ज्यादा आते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. संदीप और डॉ. दीपक के अनुसार मीठी गोलियों को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। हालांकि ये गोलियां स्वयं दवा नहीं हैं। शुगर ऑफ मिल्क से बनी ये गोलियां दवा को शरीर तक पहुंचाने का माध्यम हैं। होम्योपैथिक दवाएं डाइल्यूट रूप में इन गोलियों में भिगोकर दी जाती हैं जिससे मरीजों का इलाज बिना किसी सूई या चीरे के संभव हो पाता है। इन दिनों मरीजों का रुझान प्राकृतिक और बिना दर्द वाले उपचार की तरफ बढ़ रहा है। हर साल 10 अप्रैल को होम्योपैथी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सुरक्षित, न्यूनतम दुष्प्रभावों वाली चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए विश्व होम्योपैथिक दिवस मनाया जाता है।
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. दीपक से बातचीत के कुछ अंश
सवाल : क्या होम्योपैथिक में इलाज लंबा चलता है?
डॉ. दीपक : ऐसा कुछ नहीं है। यह मरीज की स्थिति और बीमारी पर निर्भर करता है। होम्योपेथिक दवा बीमारी को बिल्कुल ठीक करती है। इस कारण थोड़ा समय लगता है।
सवाल : मीठी गोली ही क्यों प्रयोग की जाती हैं?
डॉ. दीपक : होम्योपैथिक दवा डाइल्यूट रूप में होती है। इस कारण इन्हें लेने में मरीज को आसानी हो इसके लिए शुगर ऑफ मिल्क की गोली प्रयोग की जाती हैं। इन गोलियों के ऊपर दवा डाली जाती है और मरीज को दी जाती है।
सवाल : क्या ये दवा बीमारी को दुगना कर ठीक करती हैं?
डॉ. दीपक : यह एक तरह की भ्रांति है। यह दवा बीमारी को जड़ से खत्म करती है। शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी को यह दवा बिल्कुल बाहर निकालती है और ठीक करती है। त्वचा संबंधी रोगों में कई बार यह दवा जब बीमारी को बाहर निकालती है तो मरीज को लगता है कि उसकी बीमारी बढ़ गई है। लेकिन ऐसा नहीं है।
सवाल : मरीजों का रुझान कैसा मिल रहा है?
डॉ. दीपक : मरीजों का अच्छा रुझान मिल रहा है। ओपीडी में लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। मरीजों को सभी प्रकार की दवा निशुल्क दी जा रही हैं। इस दवा पद्धति में हर प्रकार की बीमारी का इलाज संभव है लेकिन मरीज को विश्वास व संयम बरतने की जरूरत है। चिकित्सक के बताए परहेज के अनुसार चल कर बीमारी को बिल्कुल जड़ से खत्म किया जा सकता है।
मैं वर्ष 2024 से एलर्जी के इलाज के लिए होम्योपैथिक दवा का प्रयोग कर रहा हूं। इसका असर मुझे देखने को मिला है। यह दवा बीमारी को ठीक करने के लिए थोड़ा समय तो लेती है लेकिन जड़ से खत्म कर रही है। इस कारण बाकी लोगों को भी इस होम्योपेथिक दवाओं से बीमारी को खत्म करना चाहिए। - संजय, मरीज, भिवानी।
पिछले एक साल से होम्योपेथिक दवा का इस्तेमाल कर रहा हूं। अगर घर पर किसी प्रकार की सामान्य बीमारी बुखार, खांसी व जुकाम भी होता है तो भी इन दवाओं का प्रयोग करता हूं। मैं रेलवे से सिविल इंजीनियर सेवानिवृत हूं। अब होम्योपेथिक दवाओं पर ऑनलाइन स्टडी करता रहता हूं और लोगों को भी यह दवा प्रयोग करने के लिए सुझाव देता हूं। - कृष्ण शर्मा, मरीज, भिवानी।