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Chandigarh-Haryana News: पीएमश्री स्कूलों के 500 शिक्षक शैक्षिक भ्रमण पर उत्तराखंड जाएंगे
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शिक्षक भ्रमण में मिले प्रत्यक्ष अनुभव से शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के पीएमश्री विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह चार दिवसीय भ्रमण जनवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होगा। इसमें हरियाणा के 250 पीएमश्री विद्यालयों से दो-दो शिक्षक यानी कुल 500 शिक्षक तीन चरणों में उत्तराखंड जाएंगे। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से इसके लिए सभी जिलों के समग्र शिक्षा जिला परियोजना समन्वयकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
प्रत्येक पीएमश्री विद्यालय से एक पुरुष और एक महिला शिक्षक को प्राथमिकता के आधार पर नामित किया जाएगा। भ्रमण के दौरान शिक्षकों को उत्तराखंड के पुरातात्विक, ऐतिहासिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्व के स्थलों का अवलोकन कराया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा शिक्षण से बाहर का प्रत्यक्ष अनुभव देना है ताकि वे पढ़ाई को अधिक व्यवहारिक बना सकें।
इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और विज्ञान विषयों के शिक्षकों को प्राथमिकता
परिषद के निर्देशों के अनुसार केवल पीएमश्री विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक ही इस कार्यक्रम के लिए पात्र होंगे। इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और विज्ञान विषयों से जुड़े शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन के लिए शिक्षक का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहतर होना चाहिए। स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक होना चाहिए और सेवा रिकॉर्ड साफ होना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूरे भ्रमणकाल में भागीदारी के लिए शिक्षक की सहमति जरूरी होगी।
नामांकन के दौरान जिला, खंड, विद्यालय का नाम, शिक्षक का नाम, लिंग, पद, विषय और मोबाइल नंबर की जानकारी भेजना अनिवार्य रहेगा। परिषद ने सभी जिलों को सत्यापित सूची भेजने के निर्देश दिए हैं। इस शैक्षिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के प्रत्यक्ष अध्ययन से शिक्षक विषयों को गहराई से समझ सकेंगे। भ्रमण के दौरान मिले अनुभवों को वे कक्षा में उदाहरण, गतिविधियों और परियोजनाओं के रूप में शामिल कर सकेंगे जिससे शिक्षण अधिक रोचक और प्रभावी बनेगा।
उत्तराखंड और हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था में कई समानताएं हैं लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शिक्षण पद्धतियों में अंतर है। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी शिक्षण, प्रकृति आधारित पढ़ाई, स्थानीय इतिहास और संस्कृति का समावेश तथा छोटे विद्यालयों का बेहतर संचालन देखने को मिलता है। वहां पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाता है। इस भ्रमण से हरियाणा के शिक्षक अनुभव आधारित शिक्षण, स्थानीय संदर्भों से जुड़ी पढ़ाई और प्रकृति से सीखने की पद्धतियों को अपनाने की प्रेरणा पाएंगे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम शिक्षकों को सशक्त बनाकर विद्यार्थियों को अधिक जीवंत, व्यवहारिक और जीवन से जुड़ी शिक्षा देने में सहायक साबित होगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश के पीएमश्री विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह चार दिवसीय भ्रमण जनवरी के दूसरे सप्ताह से शुरू होगा। इसमें हरियाणा के 250 पीएमश्री विद्यालयों से दो-दो शिक्षक यानी कुल 500 शिक्षक तीन चरणों में उत्तराखंड जाएंगे। हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से इसके लिए सभी जिलों के समग्र शिक्षा जिला परियोजना समन्वयकों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
प्रत्येक पीएमश्री विद्यालय से एक पुरुष और एक महिला शिक्षक को प्राथमिकता के आधार पर नामित किया जाएगा। भ्रमण के दौरान शिक्षकों को उत्तराखंड के पुरातात्विक, ऐतिहासिक, भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्व के स्थलों का अवलोकन कराया जाएगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को कक्षा शिक्षण से बाहर का प्रत्यक्ष अनुभव देना है ताकि वे पढ़ाई को अधिक व्यवहारिक बना सकें।
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इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और विज्ञान विषयों के शिक्षकों को प्राथमिकता
परिषद के निर्देशों के अनुसार केवल पीएमश्री विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक ही इस कार्यक्रम के लिए पात्र होंगे। इतिहास, भूगोल, पर्यावरण और विज्ञान विषयों से जुड़े शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी। चयन के लिए शिक्षक का शैक्षणिक रिकॉर्ड बेहतर होना चाहिए। स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक होना चाहिए और सेवा रिकॉर्ड साफ होना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूरे भ्रमणकाल में भागीदारी के लिए शिक्षक की सहमति जरूरी होगी।
नामांकन के दौरान जिला, खंड, विद्यालय का नाम, शिक्षक का नाम, लिंग, पद, विषय और मोबाइल नंबर की जानकारी भेजना अनिवार्य रहेगा। परिषद ने सभी जिलों को सत्यापित सूची भेजने के निर्देश दिए हैं। इस शैक्षिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य अनुभव आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों के प्रत्यक्ष अध्ययन से शिक्षक विषयों को गहराई से समझ सकेंगे। भ्रमण के दौरान मिले अनुभवों को वे कक्षा में उदाहरण, गतिविधियों और परियोजनाओं के रूप में शामिल कर सकेंगे जिससे शिक्षण अधिक रोचक और प्रभावी बनेगा।
उत्तराखंड और हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था में कई समानताएं हैं लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शिक्षण पद्धतियों में अंतर है। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में सीमित संसाधनों के बावजूद प्रभावी शिक्षण, प्रकृति आधारित पढ़ाई, स्थानीय इतिहास और संस्कृति का समावेश तथा छोटे विद्यालयों का बेहतर संचालन देखने को मिलता है। वहां पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जाता है। इस भ्रमण से हरियाणा के शिक्षक अनुभव आधारित शिक्षण, स्थानीय संदर्भों से जुड़ी पढ़ाई और प्रकृति से सीखने की पद्धतियों को अपनाने की प्रेरणा पाएंगे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम शिक्षकों को सशक्त बनाकर विद्यार्थियों को अधिक जीवंत, व्यवहारिक और जीवन से जुड़ी शिक्षा देने में सहायक साबित होगा।