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खेलों में हरियाणा के साथ भेदभाव कर रही भाजपा: भूपेंद्र हुड्डा
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- केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर खिलाड़ियों की अनदेखी का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेलों के मामले में हरियाणा के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों को कठघरे में खड़ा किया है। हुड्डा ने कहा कि पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा पर केंद्र सरकार जानबूझकर बेहद कम खर्च कर रही है, जबकि प्रदेश की भाजपा सरकार अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बजाय मूकदर्शक बनी हुई है।
हुड्डा ने उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रति पदक खर्च के हिसाब से हरियाणा में मात्र 4.5 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 43.50 लाख, मध्य प्रदेश और दिल्ली में 1.13 करोड़, बिहार में 1.69 करोड़, उत्तर प्रदेश में 7.85 करोड़ और गुजरात में 11.21 करोड़ रुपये है। खेलो इंडिया के करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के बजट में से हरियाणा को केवल 80 करोड़ रुपये दिए गए।
पूर्व सीएम ने कहा कि अगर कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ आयोजन हरियाणा में कराए जाते हैं तो इससे युवा खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलेगा और प्रदेश में खेल अवसंरचना को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 481 खेल स्टेडियम बने और साई के दो केंद्र स्थापित किए गए, लेकिन भाजपा सरकार ने इनके रखरखाव तक के लिए बजट नहीं दिया।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पदक लाओ, पद पाओ और एसपैट जैसी खिलाड़ी हितैषी नीतियों को खत्म कर दिया। कांग्रेस ने 750 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी थीं, जबकि भाजपा सरकार ने न तो नियुक्तियां दीं और न ही प्रमोशन और कैश अवार्ड जारी रखे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने खेलों के मामले में हरियाणा के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारों को कठघरे में खड़ा किया है। हुड्डा ने कहा कि पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले हरियाणा पर केंद्र सरकार जानबूझकर बेहद कम खर्च कर रही है, जबकि प्रदेश की भाजपा सरकार अपने हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ने की बजाय मूकदर्शक बनी हुई है।
हुड्डा ने उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रति पदक खर्च के हिसाब से हरियाणा में मात्र 4.5 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 43.50 लाख, मध्य प्रदेश और दिल्ली में 1.13 करोड़, बिहार में 1.69 करोड़, उत्तर प्रदेश में 7.85 करोड़ और गुजरात में 11.21 करोड़ रुपये है। खेलो इंडिया के करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये के बजट में से हरियाणा को केवल 80 करोड़ रुपये दिए गए।
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पूर्व सीएम ने कहा कि अगर कॉमनवेल्थ गेम्स के कुछ आयोजन हरियाणा में कराए जाते हैं तो इससे युवा खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलेगा और प्रदेश में खेल अवसंरचना को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 481 खेल स्टेडियम बने और साई के दो केंद्र स्थापित किए गए, लेकिन भाजपा सरकार ने इनके रखरखाव तक के लिए बजट नहीं दिया।
हुड्डा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पदक लाओ, पद पाओ और एसपैट जैसी खिलाड़ी हितैषी नीतियों को खत्म कर दिया। कांग्रेस ने 750 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियां दी थीं, जबकि भाजपा सरकार ने न तो नियुक्तियां दीं और न ही प्रमोशन और कैश अवार्ड जारी रखे।