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Chandigarh-Haryana News: जर्जर स्कूल भवनों पर अब जिला स्तर पर ही होगा फैसला
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर अब फैसला जिला स्तर पर ही होगा। शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं। जिला स्तर पर गठित समिति ही स्कूल के किसी भवन या कमरे को असुरक्षित घोषित करने, उसे गिराने, मरम्मत कराने, सामग्री की नीलामी कराने और नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय ले सकेगी। नए प्रावधानों के तहत अब मुख्यालय से अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की तरफ से जारी आदेश के अनुसार मुख्यालय से मंजूरी लेने की लंबी प्रक्रिया के कारण कई स्कूलों में जर्जर भवन वर्षों तक खड़े रहते थे। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता था। अब जिला समिति के स्तर पर निर्णय होने से ऐसे मामलों का जल्द निस्तारण होगा और नए भवनों के निर्माण का रास्ता भी तेजी से खुलेगा।
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर होगा मरम्मत या ध्वस्तीकरण का फैसला
आदेश के अनुसार जिला समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर तय करेगी कि भवन की मरम्मत संभव है या उसे पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर ध्वस्त किया जाना चाहिए। जिला स्तर पर गठित समिति स्कूल भवनों का निरीक्षण करेगी और उनकी तकनीकी स्थिति का आकलन करेगी। यदि कोई भवन या कमरा उपयोग के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो समिति उसे जर्जर घोषित करेगी। इसके बाद भवन को गिराने, मलबे की नीलामी कराने व नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश और कार्रवाई जिला स्तर पर ही की जाएगी।
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अभी तक मंजूरी लेने के लिए लग जाते थे कई महीने
अब तक किसी भी जर्जर स्कूल भवन को गिराने या नए निर्माण की अनुमति के लिए जिला स्तर से प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा निदेशालय और मुख्यालय भेजा जाता था। वहां से निदेशक व प्रधान सचिव के स्तरों पर स्वीकृतियां मिलने में कई महीने लग जाते थे। इस दौरान कई स्कूलों में असुरक्षित भवन उपयोग से बाहर तो कर दिए जाते थे लेकिन उन्हें गिराने और नए निर्माण का काम लंबे समय तक अटका रहता था।
आठ हजार स्कूलों में मरम्मत व निर्माण की जरूरत
मई 2026 में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में आंकड़ा सामने आया था कि प्रदेशभर के 14,267 सरकारी स्कूलों में से करीब 8 हजार स्कूलों में मरम्मत व निर्माण कार्य की आवश्यकता थी। इनमें तकरीबन 2300 लड़कियों, 2 हजार लड़कों और 350 दिव्यांगों के शाैचालयों की मरम्मत शामिल है। 2,220 स्कूलों में बाउंड्री वॉल और 584 स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप निर्माण की आवश्यकता थी।
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चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर अब फैसला जिला स्तर पर ही होगा। शिक्षा विभाग ने मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं। जिला स्तर पर गठित समिति ही स्कूल के किसी भवन या कमरे को असुरक्षित घोषित करने, उसे गिराने, मरम्मत कराने, सामग्री की नीलामी कराने और नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय ले सकेगी। नए प्रावधानों के तहत अब मुख्यालय से अनुमति लेने की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की तरफ से जारी आदेश के अनुसार मुख्यालय से मंजूरी लेने की लंबी प्रक्रिया के कारण कई स्कूलों में जर्जर भवन वर्षों तक खड़े रहते थे। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता था। अब जिला समिति के स्तर पर निर्णय होने से ऐसे मामलों का जल्द निस्तारण होगा और नए भवनों के निर्माण का रास्ता भी तेजी से खुलेगा।
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निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर होगा मरम्मत या ध्वस्तीकरण का फैसला
आदेश के अनुसार जिला समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर तय करेगी कि भवन की मरम्मत संभव है या उसे पूरी तरह असुरक्षित घोषित कर ध्वस्त किया जाना चाहिए। जिला स्तर पर गठित समिति स्कूल भवनों का निरीक्षण करेगी और उनकी तकनीकी स्थिति का आकलन करेगी। यदि कोई भवन या कमरा उपयोग के लिए असुरक्षित पाया जाता है तो समिति उसे जर्जर घोषित करेगी। इसके बाद भवन को गिराने, मलबे की नीलामी कराने व नए निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने की सिफारिश और कार्रवाई जिला स्तर पर ही की जाएगी।
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अभी तक मंजूरी लेने के लिए लग जाते थे कई महीने
अब तक किसी भी जर्जर स्कूल भवन को गिराने या नए निर्माण की अनुमति के लिए जिला स्तर से प्रस्ताव तैयार कर शिक्षा निदेशालय और मुख्यालय भेजा जाता था। वहां से निदेशक व प्रधान सचिव के स्तरों पर स्वीकृतियां मिलने में कई महीने लग जाते थे। इस दौरान कई स्कूलों में असुरक्षित भवन उपयोग से बाहर तो कर दिए जाते थे लेकिन उन्हें गिराने और नए निर्माण का काम लंबे समय तक अटका रहता था।
आठ हजार स्कूलों में मरम्मत व निर्माण की जरूरत
मई 2026 में शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में आंकड़ा सामने आया था कि प्रदेशभर के 14,267 सरकारी स्कूलों में से करीब 8 हजार स्कूलों में मरम्मत व निर्माण कार्य की आवश्यकता थी। इनमें तकरीबन 2300 लड़कियों, 2 हजार लड़कों और 350 दिव्यांगों के शाैचालयों की मरम्मत शामिल है। 2,220 स्कूलों में बाउंड्री वॉल और 584 स्कूलों में दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप निर्माण की आवश्यकता थी।