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Chandigarh-Haryana News: हाई कोर्ट में देना होगा लावरिस कुत्तों से निपटने की तैयारियों का ब्योरा
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश पर 28 बिंदुओं पर 7 अगस्त तक देनी होगी पूरी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा में सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों से निपटने के लिए की गई तैयारियों का विस्तृत ब्योरा शहरी स्थानीय निकाय विभाग को 7 अगस्त तक पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में देना होगा। 28 बिंदुओं पर निकायों को पूरे इंतजाम बताने होंगे। प्रदेश के 87 निकायों में 1 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 तक यानी पिछले 6 माह में कुत्तों से निपटने के लिए किए गए इंतजामों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए निकायों से यह ब्योरा मांगा जाएगा। इसके बाद दोबारा से विस्तृत कार्ययोजना तय करके अभियान शुरू होगा।
जिलों में संचालित आश्रय स्थलों या वैकल्पिक प्रस्तावित केंद्रों, कुत्तों की नसबंदी के लिए उपलब्ध प्रशिक्षित कर्मियों व पशु चिकित्सकों की संख्या का ब्योरा देना होगा। पिछले 6 माह में आश्रय स्थलों में लाए गए कितने कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन हुआ, कुत्तों को पकड़ने के कार्य के लिए तैनात नोडल अधिकारियों, निरीक्षण और निगरानी के लिए बनाए गए तंत्र के बारे में भी बताना होगा। सभी विभागों की ओर से आपसी तालमेल के लिए तैयार योजना भी साझा करनी होगी। संपूर्ण कार्य योजना को लागू करने के लिए जारी किए गए बजट, संबंधित कार्य में आ रही बाधाओं व उनके समाधान के बारे में भी बताना होगा। कितने वार्डों में कुत्तों के लिए सुरक्षित भोजन स्थल बने, कुत्तों को गोद देने के लिए कोई व्यवस्था तय हुई या नहीं, कुत्तों के काटने से संंबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए कोई हेल्प लाइन नंबर जारी हुआ या नहीं यह जानकारी भी देनी होगी।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार सड़कों पर करीब 2.75 लाख लावारिस कुत्तों हो सकते हैं। हरियाणा डेयरी एवं पशु पालन विभाग की वर्ष 2019 की पशु गणना के अनुसार करीब 61 हजार पालतू कुत्ते हैं। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक मुकुल कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार निकायों से व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत ब्योरा मांगा जाएगा और इसे हाई कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा में सड़कों पर घूमने वाले कुत्तों से निपटने के लिए की गई तैयारियों का विस्तृत ब्योरा शहरी स्थानीय निकाय विभाग को 7 अगस्त तक पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में देना होगा। 28 बिंदुओं पर निकायों को पूरे इंतजाम बताने होंगे। प्रदेश के 87 निकायों में 1 दिसंबर 2025 से 31 मई 2026 तक यानी पिछले 6 माह में कुत्तों से निपटने के लिए किए गए इंतजामों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए निकायों से यह ब्योरा मांगा जाएगा। इसके बाद दोबारा से विस्तृत कार्ययोजना तय करके अभियान शुरू होगा।
जिलों में संचालित आश्रय स्थलों या वैकल्पिक प्रस्तावित केंद्रों, कुत्तों की नसबंदी के लिए उपलब्ध प्रशिक्षित कर्मियों व पशु चिकित्सकों की संख्या का ब्योरा देना होगा। पिछले 6 माह में आश्रय स्थलों में लाए गए कितने कुत्तों की नसबंदी और वैक्सीनेशन हुआ, कुत्तों को पकड़ने के कार्य के लिए तैनात नोडल अधिकारियों, निरीक्षण और निगरानी के लिए बनाए गए तंत्र के बारे में भी बताना होगा। सभी विभागों की ओर से आपसी तालमेल के लिए तैयार योजना भी साझा करनी होगी। संपूर्ण कार्य योजना को लागू करने के लिए जारी किए गए बजट, संबंधित कार्य में आ रही बाधाओं व उनके समाधान के बारे में भी बताना होगा। कितने वार्डों में कुत्तों के लिए सुरक्षित भोजन स्थल बने, कुत्तों को गोद देने के लिए कोई व्यवस्था तय हुई या नहीं, कुत्तों के काटने से संंबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए कोई हेल्प लाइन नंबर जारी हुआ या नहीं यह जानकारी भी देनी होगी।
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शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अनुसार सड़कों पर करीब 2.75 लाख लावारिस कुत्तों हो सकते हैं। हरियाणा डेयरी एवं पशु पालन विभाग की वर्ष 2019 की पशु गणना के अनुसार करीब 61 हजार पालतू कुत्ते हैं। स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक मुकुल कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार निकायों से व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत ब्योरा मांगा जाएगा और इसे हाई कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा।