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Chandigarh-Haryana News: एआई, ऑटो डिस्पैच व रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से जुड़ेगी डायल 112 सेवा
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- पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने 2026 का विजन साझा किया
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की आपातकालीन सेवा डायल 112 को वर्ष 2026 में पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित, ऑटो डिस्पैच और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से संचालित किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने 2026 का विज़न साझा करते हुए कहा कि तकनीकी सुधारों के साथ डायल 112 को दुनिया के सबसे तेज और प्रभावी आपातकालीन सेवा मॉडलों में शामिल करने का लक्ष्य है।
डीजीपी ने बताया कि 12 जुलाई 2021 को शुरू हुई डायल 112 सेवा पर चार वर्षों में आपात सेवाओं के क्षेत्र में दिसंबर 2025 तक 2.75 करोड़ से अधिक कॉल दर्ज की गईं। अब लोग किसी भी संकट की घड़ी में सबसे पहले 112 पर ही कॉल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2021 में जहां औसत प्रतिक्रिया समय 16 मिनट 14 सेकंड था वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर 9 मिनट 33 सेकंड रह गया है। यह सफलता पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और फायर ब्रिगेड के बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग का परिणाम है। 92.60 फीसदी कॉलर्स ने संतुष्टि जताई है।
डीजीपी सिंघल ने कहा कि भविष्य में ऑटो डिस्पैच सिस्टम लागू होने से आपातकालीन कॉल मिलते ही नजदीकी ईआरवी (इमरजेंसी रिस्पाॅन्स व्हीकल) स्वतः रवाना हो सकेगा। एआई आधारित उन्नत रूटिंग सिस्टम के जरिए ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में भी तेजी से सहायता पहुंचेगी। साथ ही जीपीएस ऑडिट के माध्यम से ईआरवी की गति, दूरी और प्रतिक्रिया समय की निगरानी की जाएगी जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के लिए निजी अस्पतालों की एंबुलेंस को 112 से जोड़ना भी उपलब्धि है। फिलहाल एक निजी अस्पताल ग्रुप की पांच एंबुलेंस इस पायलट परियोजना में सेवाएं दे रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश की आपातकालीन सेवा डायल 112 को वर्ष 2026 में पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित, ऑटो डिस्पैच और रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से संचालित किया जाएगा। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने 2026 का विज़न साझा करते हुए कहा कि तकनीकी सुधारों के साथ डायल 112 को दुनिया के सबसे तेज और प्रभावी आपातकालीन सेवा मॉडलों में शामिल करने का लक्ष्य है।
डीजीपी ने बताया कि 12 जुलाई 2021 को शुरू हुई डायल 112 सेवा पर चार वर्षों में आपात सेवाओं के क्षेत्र में दिसंबर 2025 तक 2.75 करोड़ से अधिक कॉल दर्ज की गईं। अब लोग किसी भी संकट की घड़ी में सबसे पहले 112 पर ही कॉल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2021 में जहां औसत प्रतिक्रिया समय 16 मिनट 14 सेकंड था वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर 9 मिनट 33 सेकंड रह गया है। यह सफलता पुलिस, स्वास्थ्य सेवाओं और फायर ब्रिगेड के बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक और रियल टाइम मॉनिटरिंग का परिणाम है। 92.60 फीसदी कॉलर्स ने संतुष्टि जताई है।
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डीजीपी सिंघल ने कहा कि भविष्य में ऑटो डिस्पैच सिस्टम लागू होने से आपातकालीन कॉल मिलते ही नजदीकी ईआरवी (इमरजेंसी रिस्पाॅन्स व्हीकल) स्वतः रवाना हो सकेगा। एआई आधारित उन्नत रूटिंग सिस्टम के जरिए ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में भी तेजी से सहायता पहुंचेगी। साथ ही जीपीएस ऑडिट के माध्यम से ईआरवी की गति, दूरी और प्रतिक्रिया समय की निगरानी की जाएगी जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराने के लिए निजी अस्पतालों की एंबुलेंस को 112 से जोड़ना भी उपलब्धि है। फिलहाल एक निजी अस्पताल ग्रुप की पांच एंबुलेंस इस पायलट परियोजना में सेवाएं दे रही हैं।
