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हरियाणा सूचना आयोग का बड़ा फैसला: डीआईटीएस अब आरटीआई के दायरे में, नहीं छिपा सकेंगे सूचना

Tue, 04 Aug 2026 03:53 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Tue, 04 Aug 2026 03:53 PM IST
सार

राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने यह आदेश रेवाड़ी निवासी अरुण राव की शिकायत पर दिया। शिकायतकर्ता द्वारा 14 अक्तूबर 2025 को डीसी कार्यालय, रेवाड़ी से मांगी सूचना देने से यह कहते हुए खारिज कर दिया।

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DITS now under the ambit of RTI
सूचना का अधिकार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसायटी (डीआईटीएस) से जुड़ी सूचना आरटीआई अधिनियम के दायरे में आएगी। यह कहकर सूचना देने से मना नहीं किया जा सकता है कि वह पंजीकृत सोसायटी है। जब उपायुक्त (डीसी) को डीआईटीएस के रिकॉर्ड तक पहुंच व प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त है। यह फैसला हरियाणा के सभी जिलों में डीआईटीएस से जुड़ी लंबित आरटीआई मामलों पर असर डाल सकता है।
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राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने यह आदेश रेवाड़ी निवासी अरुण राव की शिकायत पर दिया। शिकायतकर्ता द्वारा 14 अक्तूबर 2025 को डीसी कार्यालय, रेवाड़ी से मांगी सूचना देने से यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि डीआईटीएस लोक प्राधिकरण नहीं है। सुनवाई में रेवाड़ी के सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वीकार किया कि डीआईटीएस का कार्यालय सरकारी परिसर में है, उसके अध्यक्ष उपायुक्त हैं और संचालन समिति में एडीसी, एसडीएम, सीएमओ, जिला शिक्षा अधिकारी, एनआईसी अधिकारी सहित अधिकांश सदस्य सरकारी अधिकारी हैं। डीआईटीएस ई-गवर्नेंस परियोजनाओं, कॉमन सर्विस सेंटरों और डिजिटल सेवाओं के संचालन का काम करती है।
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आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एफ) व दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जिस संस्था की सूचना लोक प्राधिकरण अपने कानूनी अधिकार से प्राप्त कर सकता है, उसे आरटीआई के तहत उपलब्ध कराना होगा। हालांकि आयोग ने कहा कि मामला धारा-18 के तहत शिकायत का था, इसलिए सीधे सूचना देने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता नई आरटीआई लगाता है तो अधिकारी को डीआईटीएस से रिकॉर्ड लेकर तय समय में सूचना देनी होगी, बशर्ते वह धारा-8 के अपवादों में शामिल न हो।
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अब तक यह व्यवस्था 
अब तक अधिकांश मामलों में डीआईटीटीएस केवल पंजीकृत सोसायटी बताते हुए उससे जुड़ी सूचनाएं देने से इनकार कर दिया जाता था। लोक सूचना अधिकारी यह तर्क देते थे कि डीआईटीएस आरटीआई अधिनियम के तहत लोक प्राधिकरण नहीं है, इसलिए उसके रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सकते हैं।

फैसले का असर और फायदा
इस फैसले से राज्य के सभी जिलों में डीआईटीएस से जुड़ी सूचनाएं हासिल करना आसान होगा। आरटीआई आवेदकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और आम नागरिकों को ई-गवर्नेंस परियोजनाओं, खर्च, नियुक्तियों और कामकाज में अधिक पारदर्शिता मिलेगी। इससे सूचना रोकने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगेगा।

डीआईटीएस की संचालन समिति में कौन-कौन शामिल
उपायुक्त (डीसी) – अध्यक्ष
अतिरिक्त उपायुक्त (एडीसी) – उपाध्यक्ष
उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) – सदस्य
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) – सदस्य
जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) – सदस्य
जिला मुख्यालय के कार्यकारी अभियंता/उप मंडल अधिकारी (सिविल) – सदस्य
विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, विज्ञान एवं कृषि संस्थानों के नामित सदस्य – सदस्य
जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) – सदस्य
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक – सदस्य
जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) – सदस्य
लीड जिला प्रबंधक (बैंक) – सदस्य
जिला सांख्यिकी अधिकारी – सदस्य
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के जिला सूचना विज्ञान अधिकारी – सदस्य सचिव
अध्यक्ष द्वारा नामित लेखा अधिकारी/अनुभाग अधिकारी/एएसआर – कोषाध्यक्ष/लेखाकार
राज्य नामित एजेंसी द्वारा नामित जिला प्रबंधक (डीआईटीएस) – सदस्य
बीएसएनएल का प्रतिनिधि – सदस्य
नागरिक सेवाओं से जुड़े संबंधित विभाग का प्रतिनिधि – विशेष आमंत्रित सदस्य
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