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एसपीसीए अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त डीजीपी की नियुक्ति पर जवाब दे सरकार : हाईकोर्ट
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-नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब के लिए सरकार को अंतिम अवसर
-चार सप्ताह में जवाब नहीं दिया तो सरकार का जवाब देने का अधिकार माना जाएगा समाप्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एसपीसीए (स्टेट पुलिस कंप्लेंट्स अथाॅरिटी) अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त डीजीपी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब के लिए अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया गया तो राज्य सरकार का जवाब देने का अधिकार समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि 29 अगस्त 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद हरियाणा सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस शिकायत प्राधिकरण की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2007 में कानून बनाकर इस पद के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज या सेवानिवृत्त सिविल सेवक का प्रावधान किया था लेकिन एक साल बाद संशोधन कर इसे और कमजोर कर दिया गया। संशोधित प्रावधान के तहत प्रशासन या कानून के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति की नियुक्ति की अनुमति दे दी गई जिसके आधार पर सेवानिवृत्त डीजीपी को अध्यक्ष बनाया गया। याची ने 2015 में इसी तरह के एक मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला दिया जिसमें चंडीगढ़ में सेवानिवृत्त भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) अधिकारी की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई और वह अंतिम रूप से लागू हो चुका है। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
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-चार सप्ताह में जवाब नहीं दिया तो सरकार का जवाब देने का अधिकार माना जाएगा समाप्त
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। एसपीसीए (स्टेट पुलिस कंप्लेंट्स अथाॅरिटी) अध्यक्ष पद पर सेवानिवृत्त डीजीपी की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब के लिए अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल नहीं किया गया तो राज्य सरकार का जवाब देने का अधिकार समाप्त माना जाएगा। खंडपीठ ने कहा कि 29 अगस्त 2025 को नोटिस जारी होने के बावजूद हरियाणा सरकार अब तक अपना जवाब दाखिल नहीं कर पाई है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने 2006 के प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ फैसले में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुलिस शिकायत प्राधिकरण की अध्यक्षता सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने 2007 में कानून बनाकर इस पद के लिए सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज या सेवानिवृत्त सिविल सेवक का प्रावधान किया था लेकिन एक साल बाद संशोधन कर इसे और कमजोर कर दिया गया। संशोधित प्रावधान के तहत प्रशासन या कानून के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले किसी भी प्रतिष्ठित व्यक्ति की नियुक्ति की अनुमति दे दी गई जिसके आधार पर सेवानिवृत्त डीजीपी को अध्यक्ष बनाया गया। याची ने 2015 में इसी तरह के एक मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले का हवाला दिया जिसमें चंडीगढ़ में सेवानिवृत्त भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) अधिकारी की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ बताते हुए रद्द कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी गई और वह अंतिम रूप से लागू हो चुका है। इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को प्राधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
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