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विश्व तंबाकू निषेध दिवस : शिक्षण संस्थानों में बड़ी सफलता, गांवों में अभी भी चुनौती बरकरार

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस : हरियाणा के 95.10% संस्थान तंबाकू मुक्त घोषित, गांव 17 फीसदी से ज्यादा



चंडीगढ़। हरियाणा में तंबाकू नियंत्रण को लेकर सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार सक्रिय हैं। जहां शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने में बड़ी सफलता मिली है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह अभियान अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश के 13,553 शैक्षणिक संस्थानों का मूल्यांकन किया गया। इनमें से 12,888 संस्थानों को तंबाकू मुक्त घोषित किया गया। यह लगभग 95.10 प्रतिशत की उपलब्धि है, जो इस दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।



इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है। हरियाणा में कुल लगभग 6,500 गांव हैं। इनमें से अब तक 1,142 गांवों को तंबाकू मुक्त घोषित किया जा चुका है जो करीब 17.57 प्रतिशत बैठता है। यह दर्शाता है कि गांवों में तंबाकू नियंत्रण की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है और इसमें लंबा सफर तय करना बाकी है।
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विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में हुक्का संस्कृति और सामाजिक परंपराएं तंबाकू उन्मूलन में एक बड़ी बाधा हैं। इसी के मद्देनजर पंचायत विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर गांवों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। ग्रामीण स्तर पर 1,484 ग्राम सभाएं, समितियों का गठन और 901 तंबाकू नियंत्रण राजदूतों की नियुक्ति जैसे प्रयास किए गए हैं। तंबाकू छोड़ने के इच्छुक व्यक्तियों की सहायता के लिए प्रदेश के सभी 22 जिलों और 17 मेडिकल कॉलेजों में तंबाकू निवारण व परामर्श केंद्र कार्यरत हैं।
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पुरुषों में मुंह के कैंसर के केस हरियाणा में सबसे अधिक
हरियाणा में पुरुषों में मुंह के कैंसर के केस सबसे अधिक हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि तंबाकू का सेवन कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों, स्ट्रोक और नशे की लत का प्रमुख कारण माना जाता है। धूम्रपान ही नहीं, बल्कि धूम्ररहित तंबाकू जैसे गुटखा, खैनी और जर्दा भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही खतरनाक हैं। इसके सेवन से मुख, गले और फेफड़ों के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, साथ ही उच्च रक्तचाप, हृदयघात और असमय मृत्यु की संभावना भी काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा तंबाकू का असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी गंभीर रूप से पड़ता है। यह पुरुषों में नपुंसकता, शुक्राणुओं की संख्या में कमी और अन्य प्रजनन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।


गांवों को तंबाकू मुक्त करने का अभियान अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन आने वाले समय में पंचायतों और समुदाय की भागीदारी से हरियाणा को पूरी तरह तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। हालांकि पूरी उम्मीद है कि इसमें हमें कामयाबी जरूर मिलेगी।
डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु, एमडी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, हरियाणा
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