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Highcourt: मां को वृद्धावस्था पेंशन मिलती है तो भी बेटे पर आश्रित मानने से इन्कार नहीं कर सकती सरकार

Fri, 24 Jul 2026 10:32 AM IST
Nivedita न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Fri, 24 Jul 2026 10:32 AM IST
सार

जस्टिस संदीप मौदगिल ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारी बलवंत सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के 14 अक्तूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश के तहत उसकी मां के इलाज का मेडिकल क्लेम खारिज किया गया था।

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High Court Government cannot refuse to consider mother dependent on her son because she receives pension
पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी सरकारी कर्मचारी के माता-पिता को केवल इसलिए आश्रित मानने से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्हें वृद्धावस्था पेंशन मिल रही है।
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अदालत ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता की निर्भरता का निर्धारण केवल उनकी आय या पेंशन के आधार पर नहीं किया जा सकता। मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति सरकार की कृपा नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए कल्याणकारी व्यवस्था का हिस्सा है।
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जस्टिस संदीप मौदगिल ने हरियाणा रोडवेज कर्मचारी बलवंत सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के 14 अक्तूबर 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश के तहत उसकी मां के इलाज का मेडिकल क्लेम खारिज किया गया था। हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 1,30,073 रुपये की मेडिकल प्रतिपूर्ति छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित दो माह के भीतर जारी की जाए। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर ब्याज की दर नौ प्रतिशत वार्षिक होगी।
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मामले के अनुसार, बलवंत सिंह की 85 वर्षीय मां चन्नो देवी का जुलाई 2024 में मोहाली के मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हृदय का ऑपरेशन हुआ था। उपचार के दौरान स्टेंट डाला गया और इलाज पर 1,30,073 रुपये खर्च हुए। कर्मचारी ने मेडिकल खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए दावा किया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने 14 दिसंबर 2007 के प्रशासनिक निर्देशों का हवाला देते हुए दावा खारिज कर दिया।


अदालत ने कहा कि ‘पूरी तरह आश्रित’ होने का अर्थ केवल आर्थिक निर्भरता नहीं है। इसमें शारीरिक निर्भरता भी शामिल है। बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार माता-पिता की मामूली पेंशन उन्हें महंगे इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं बनाती। ऐसे में केवल पेंशन मिलने के आधार पर मेडिकल क्लेम खारिज करना मनमाना और कानून के विपरीत है।
 
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