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Chandigarh-Haryana News: सिविल जज परीक्षा में पुनर्मूल्यांकन की मांग पर हाईकोर्ट सख्त, समीक्षा याचिका खारिज
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- हाईकोर्ट ने कहा- समीक्षा का अधिकार अत्यंत सीमित, न तो इसे अपील के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही गुण दोष पर बहस के लिए
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा की एक अभ्यर्थी द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि समीक्षा का अधिकार अत्यंत सीमित है। इसका उपयोग न तो अपील के विकल्प के रूप में किया जा सकता है और न ही मामले के गुण-दोष पर दोबारा बहस के लिए। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा शक्ति का उद्देश्य किसी ऐसे मामले को फिर से उठाना नहीं है जिस पर अदालत पहले ही विस्तार से सुनवाई कर अंतिम निर्णय दे चुकी हो।
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि, न्यायालय द्वारा की गई किसी प्रत्यक्ष गलती या नए एवं महत्वपूर्ण साक्ष्य के सामने आने जैसी परिस्थितियों को सुधारना है। यह पुनः सुनवाई का अवसर प्रदान करने का माध्यम नहीं है। अदालत 260 दिन की देरी को माफ करने की अर्जी के साथ दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि देरी के लिए कोई ठोस और संतोषजनक कारण नहीं दिया गया जो यह दर्शाता है कि याचिकाकर्ता मुकदमे को अनावश्यक रूप से लंबा खींचना चाहती थी।
याचिकाकर्ता ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा 2023-24 के अंग्रेज़ी पेपर-4 के प्रश्न संख्या 2(एक्स) के उत्तर-पत्र के पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी। साथ ही अतिरिक्त अंक देकर अंतिम चयन सूची में सफल घोषित किए जाने की भी प्रार्थना की थी हालांकि 28 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने मूल रिट याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने तब कहा था कि पुनर्मूल्यांकन पर स्पष्ट रोक है और कोर्ट परीक्षक के निर्णय के ऊपर सुपर-इवैल्यूएटर की भूमिका नहीं निभा सकता। कोर्ट ने माना कि न तो रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट त्रुटि है और न ही समीक्षा के लिए कोई वैध कारण। इसलिए समीक्षा याचिका और 260 दिन की देरी माफी की अर्जी दोनों को खारिज कर दिया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा की एक अभ्यर्थी द्वारा दायर समीक्षा याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि समीक्षा का अधिकार अत्यंत सीमित है। इसका उपयोग न तो अपील के विकल्प के रूप में किया जा सकता है और न ही मामले के गुण-दोष पर दोबारा बहस के लिए। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा शक्ति का उद्देश्य किसी ऐसे मामले को फिर से उठाना नहीं है जिस पर अदालत पहले ही विस्तार से सुनवाई कर अंतिम निर्णय दे चुकी हो।
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि समीक्षा का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि, न्यायालय द्वारा की गई किसी प्रत्यक्ष गलती या नए एवं महत्वपूर्ण साक्ष्य के सामने आने जैसी परिस्थितियों को सुधारना है। यह पुनः सुनवाई का अवसर प्रदान करने का माध्यम नहीं है। अदालत 260 दिन की देरी को माफ करने की अर्जी के साथ दायर समीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि देरी के लिए कोई ठोस और संतोषजनक कारण नहीं दिया गया जो यह दर्शाता है कि याचिकाकर्ता मुकदमे को अनावश्यक रूप से लंबा खींचना चाहती थी।
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याचिकाकर्ता ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा 2023-24 के अंग्रेज़ी पेपर-4 के प्रश्न संख्या 2(एक्स) के उत्तर-पत्र के पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी। साथ ही अतिरिक्त अंक देकर अंतिम चयन सूची में सफल घोषित किए जाने की भी प्रार्थना की थी हालांकि 28 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने मूल रिट याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने तब कहा था कि पुनर्मूल्यांकन पर स्पष्ट रोक है और कोर्ट परीक्षक के निर्णय के ऊपर सुपर-इवैल्यूएटर की भूमिका नहीं निभा सकता। कोर्ट ने माना कि न तो रिकॉर्ड पर कोई स्पष्ट त्रुटि है और न ही समीक्षा के लिए कोई वैध कारण। इसलिए समीक्षा याचिका और 260 दिन की देरी माफी की अर्जी दोनों को खारिज कर दिया गया।
