Haryana: जेबीटी भर्ती में हाईकोर्ट के फैसले से ढाई दशक पुराने विवाद का अंत, इनेलो को मिली सियासी संजीवनी
जेबीटी भर्ती मामला करीब ढाई दशक से हरियाणा की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। वर्ष 1999-2000 में हुई 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
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हाईकोर्ट के जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में आया फैसला इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के लिए संजीवनी साबित हो सकता है। अदालत के निर्णय से 3206 जेबीटी शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित हो गई है, जबकि 160 अभ्यर्थियों को भी राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
यह फैसला जहां हजारों शिक्षक परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, वहीं इनेलो इसे अपने राजनीतिक पुनरुत्थान के अवसर के रूप में देख रही है।
जेबीटी भर्ती मामला करीब ढाई दशक से हरियाणा की राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। वर्ष 1999-2000 में हुई 3206 जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। आरोप था कि चयन सूची में बदलाव कर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इस मामले की जांच सीबीआई ने की और बाद में अदालत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला व कई अधिकारियों को दोषी ठहराया था। इस मामले ने इनेलो की राजनीति को सबसे बड़ा झटका दिया। ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला को सजा हुई और पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया। कभी हरियाणा की सत्ता की प्रमुख दावेदार रही इनेलो बाद के वर्षों में राजनीतिक हाशिये पर चली गई। अब हाईकोर्ट के फैसले ने पार्टी को अपनी पुरानी कहानी को नए सिरे से जनता के सामने रखने का अवसर दे दिया है।
फैसले को समर्थन के ताैर पर पेश कर रही इनेलो
इनेलो इस फैसले को अपनी राजनीतिक दलीलों के समर्थन के रूप में पेश कर रही है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष रामपाल माजरा ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक विरोधियों को कमजोर करने के लिए सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल किया। ऐसा ही खेल अब भाजपा कर रही है। भाजपा पर भी आरोप लगाते हुए कहा कि वह विपक्ष की आवाज दबाने के लिए जांच एजेंसियों का सहारा ले रही है। इनेलो अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में अभियान चलाने की तैयारी में है।
पार्टी की रणनीति केवल जेबीटी भर्ती तक सीमित नहीं रहने वाली है। इनेलो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, सरकारी नीतियों और कथित एजेंसी दुरुपयोग जैसे मुद्दों को जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। साथ ही पुराने कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय कर संगठन को मजबूत करने का प्रयास भी किया जाएगा।
हरियाणा की राजनीति में भाजपा, कांग्रेस और जेजेपी के बीच मुकाबले के दौर में इनेलो के लिए जेबीटी भर्ती फैसला निश्चित रूप से एक बड़ा मुद्दा बन गया है। यह फैसला पार्टी को अपने समर्थकों के बीच विश्वास लौटाने का अवसर दे सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इनेलो इस कानूनी राहत को कितना बड़ा राजनीतिक आंदोलन बना पाती है और क्या इससे चौटाला परिवार की सियासी विरासत को फिर से मजबूती मिलती है।
क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. आरआर मलिक के अनुसार जेबीटी को लेकर हाईकोर्ट का फैसला इनेलो के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर है। ओमप्रकाश चौटाला और अजय चौटाला लंबे समय से खुद को राजनीतिक कार्रवाई का शिकार बताते रहे हैं। इस फैसले से उनके समर्थकों को नैतिक मजबूती मिलेगी और उन पर लगे भ्रष्टाचार के दाग को कम करने का मौका मिलेगा।
हालांकि यह इनेलो पर भी निर्भर करेगा कि वे इस हाईकोर्ट के फैसले से निकले संदेश को लोगों तक कैसे लेकर जाती है। यदि इनेलो इस मुद्दे को जनता के बीच प्रभावी ढंग से उठाती है तो पार्टी को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।