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साइबर अपराध की जांच के लिए या तो पुलिस अयोग्य या जानकारी की कमी : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। साइबर ठगी से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस अधिकारी या तो अक्षम हैं या उन्हें आधुनिक साइबर अपराधों के तरीकों की पर्याप्त जानकारी नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों को साइबर अपराधों के आधुनिक तौर-तरीकों की बेहतर समझ विकसित करने की जरूरत है अन्यथा इससे देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों के हितों को नुकसान हो सकता है। अदालत ने कहा कि जब तक इस दिशा में प्रभावी कानून और व्यवस्थाएं नहीं बनेंगी केवल अदालतें इस समस्या का समाधान नहीं कर सकतीं।
नारनौल के साइबर थाने में दर्ज मामले में आरोपी मोहित ने एडवोकेट आदित्य सांघी के माध्यम से नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि आरोपी मोहित के कब्जे से 33 एटीएम कार्ड, 28 बैंक पासबुक और 12 चेक बुक बरामद हुई थीं। साथ ही यह भी कहा गया कि लगभग 1.14 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न खातों में जमा हुई थी हालांकि अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उक्त राशि वर्तमान में कहां है या उसका आगे क्या हुआ। राज्य की ओर से यह कहा गया कि रकम संभवतया क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) के माध्यम से किसी अन्य खाते में भेजी गई होगी लेकिन अदालत ने इसे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं माना। मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत ने आरोपी को पहले दी गई अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया और उसे नियमित जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
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नारनौल के साइबर थाने में दर्ज मामले में आरोपी मोहित ने एडवोकेट आदित्य सांघी के माध्यम से नियमित जमानत याचिका दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से बताया गया कि आरोपी मोहित के कब्जे से 33 एटीएम कार्ड, 28 बैंक पासबुक और 12 चेक बुक बरामद हुई थीं। साथ ही यह भी कहा गया कि लगभग 1.14 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न खातों में जमा हुई थी हालांकि अदालत ने पाया कि जांच एजेंसी यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि उक्त राशि वर्तमान में कहां है या उसका आगे क्या हुआ। राज्य की ओर से यह कहा गया कि रकम संभवतया क्रिप्टोकरेंसी (यूएसडीटी) के माध्यम से किसी अन्य खाते में भेजी गई होगी लेकिन अदालत ने इसे संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं माना। मामले के तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत ने आरोपी को पहले दी गई अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया और उसे नियमित जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए।
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