सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   World Earth Day Haryana Temperature Rises by 1.5 Degrees Over 114 Years

विश्व पृथ्वी दिवस: 114 साल में डेढ़ डिग्री बढ़ा हरियाणा का तापमान, पंचकूला-यमुनानगर में अधिक; क्या है कारण

आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Wed, 22 Apr 2026 09:30 AM IST
विज्ञापन
सार

चंडीगढ़ मौसम विभाग के अध्ययन के अनुसार प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तापमान में काफी बदलाव दर्ज किए गए हैं जो जलवायु परिवर्तन की जटिल तस्वीर पेश करते हैं।

World Earth Day Haryana Temperature Rises by 1.5 Degrees Over 114 Years
भीषण गर्मी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

हरियाणा के मौसम में बदलाव के बड़े संकेत मिल रहे हैं। चंडीगढ़ मौसम विभाग के 114 वर्षों के अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। 
Trending Videos


आंकड़ों के मुताबिक इन वर्षों में पंचकूला व यमुनानगर के तापमान में लगभग 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई है जो राज्य में सबसे अधिक बढ़ोतरी वाले क्षेत्र हैं। 

सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, पलवल और रेवाड़ी जैसे जिलों में तापमान करीब 1 डिग्री तक बढ़ा है। इससे शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के प्रभाव का संकेत मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके विपरीत अंबाला, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल और जींद में तापमान में लगभग 0.5 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, रोहतक, भिवानी और पानीपत में भी तापमान घटने के संकेत मिले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जिन इलाकों में तापमान में गिरावट देखी गई है वहां धान की खेती अहम कारण हो सकती है। धान की फसल में अधिक पानी की जरूरत होती है। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और आसपास का तापमान नियंत्रित रहता है। इसके अलावा अन्य बदलाव भी हो सकते हैं जिसके लिए अनुसंधान करने की आवश्यकता है।

पहाड़ से नजदीकी और शहरीकरण का पड़ा असर

चंडीगढ़ मौसम विभाग के निदेशक व वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक सुरेंद्र पाल ने बताया, पंचकूला व यमुनानगर में तापमान के बढ़ने का बड़ा कारण इन इलाकों में मानसून सीजन के दौरान काफी कम बारिश होती है। दो से तीन वर्षों को छोड़कर बाकी वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जाती रही है। ये दोनों इलाके ही हिमाचल से लगते हैं। मैदानी इलाकों की तुलना में पहाड़ों पर तापमान तेजी से बढ़ा है। 

इसके अलावा पंचकूला-यमुनानगर समेत सोनीपत, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, पलवल और रेवाड़ी में शहरीकरण तेजी से हुआ है। शहरों में कंक्रीट दिन में सूरज की रोशनी को अवशोषित करते हैं और रात में गर्माहट छोड़ते हैं। जिन इलाकों में तेजी से सड़कों की मरम्मत व निर्माण कार्य होते हैं वहां भी तापमान में बढ़ोतरी देखी गई है।

मानसून की विदाई आगे खिसकी

- तापमान में आए बदलाव का सबसे ज्यादा असर मानसून पर पड़ा है। आमतौर पर मानसून की विदाई 30 सितंबर तक हो जाती थी मगर अब मानसून की विदाई अक्तूबर में होने लगी है।
- इसका सीधा असर फसलों पर पड़ रहा है। बारिश होने से धान की फसल की कटाई समय पर नहीं होती।
- लंबे समय तक बारिश होने से मिट्टी में नमी लंबे समय बनी रहती है जिससे सर्दियों में धुंध ज्यादा दिनों तक रहती है।
- तापमान बढ़ने का एक असर लू पर भी पड़ा है। पिछले तीन से चार वर्षों में हरियाणा में लू के दिन बढ़ गए हैं। अब अप्रैल महीने से ही लू चलने लगती है।
- बढ़ते तापमान का असर भूजल पर पड़ रहा है साथ ही बिजली की मांग भी बढ़ रही है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed