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Charkhi Dadri News: अतिक्रमण हटाओ अभियान बना कागजी शेर, भारी-भरकम काफिला रहा बेअसर
Thu, 02 Jul 2026 12:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 02 Jul 2026 12:47 AM IST
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शहर के वार्ड 18 में अतिक्रमण हटते हुए हुए जेसीबी ।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। शहर को अतिक्रमण मुक्त करने के बड़े-बड़े दावों के साथ नगर परिषद की ओर से शुरू किया गया विशेष अभियान महज एक कागजी शेर साबित हुआ है। भारी-भरकम प्रशासनिक अमले, पुलिस बल और ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में चलाए गए इस अभियान के दौरान न तो अतिक्रमण हट सका और न ही शहरवासियों की शिकायतों को निपटान हो सका। अभियान की विफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिन 9 शिकायतों का निपटान करने का लक्ष्य रखा गया था उनमें से बड़ी मुश्किल दो का ही समाधान हो पाया। वहीं एक प्रतिवादी महिला बोली अपने नाम बता कर जाओ, जो हर रोज बेइज्जत करने आ जाते हो।
उपायुक्त के आदेश के बाद समाधान शिविर में आई 9 शिकायतों के समाधान करने के लिए नगर परिषद को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अभियान को सफल बनाने के लिए नगर परिषद ने पूरी ताकत झोंक दी थी। टीम में नगर परिषद के एमई वीरेंद्र हुड्डा, जेई अक्षय, बीआई बिजेंद्र शर्मा सहित कुल 20 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। सुरक्षा की दृष्टि से 12 पुलिसकर्मियों का दस्ता तैनात किया गया था साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कृषि विभाग से कृषि विकास अधिकारी सत्यप्रकाश को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नियुक्त किया गया था। इतने बड़े तामझाम के साथ निकली टीम का लोगों में खौफ कम और चर्चा ज्यादा थी। टीम ने दोपहर 12 बजे वार्ड 17 स्थित पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सांगवान वाली गली से अभियान की शुरुआत की। यहां दो शिकायतों का निपटान होना था लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही एक मकान मालिक ने अपना चबूतरा खुद हटा लिया था। दूसरी शिकायत के तौर पर शौचालय के बाहर बने पाइप के स्पॉट को हटाकर टीम ने खानापूर्ति की।
कोर्ट आदेश के सामने टेके घुटने
इसके बाद टीम चरखी दरवाजा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के पास पहुंची जहां सड़क निर्माण के लिए पैमाइश करने का बहाना बनाकर अतिक्रमण हटाने की बात को भविष्य के लिए टाल दिया गया। वार्ड-14 की बंजारा बस्ती में टीम ने दो कब्जाधारियों को महज एक दिन की मोहलत देकर अपने कदम पीछे खींच लिए। अभियान के दौरान असली किरकिरी तब हुई जब वार्ड-15 के दाइयों वाले मोहल्ले और खंजाची मोहल्ले में टीम को कोर्ट स्टे (स्थगन आदेश) की कॉपियां दिखाई गईं। इसके बाद कोर्ट के आदेशों के आगे नतमस्तक होकर अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए बैरंग लौट आए। अंत में, वार्ड 18 स्थित भिवानी रोड पर एक कच्चा चबूतरा तोड़कर टीम ने औपचारिक रूप से अभियान को दम तोड़ता पाया। अपनी साख बचाने की आखिरी कोशिश में अधिकारियों ने मेजबान चौक से रोज गार्डन तक दुकानों के बाहर रखे बोर्ड और कुछ सामान को जब्त किया और देखते ही देखते पूरे अभियान की इतिश्री कर दी गई।
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प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन को पहले से ही कोर्ट स्टे या अन्य तकनीकी बाधाओं की जानकारी थी तो फिर इतनी बड़ी फौज के साथ निकलने का कोई औचित्य नहीं था। वहीं टीम को अपने साथ नगर परिषद की ओर से नियुक्त अधिवक्ता को साथ लेकर जाना चाहिए था। शहर में जगह-जगह हुए अवैध कब्जों ने यातायात को बाधित कर रखा है जिससे आमजन को रोज जूझना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली और कार्रवाई में ढिलाई के कारण ही अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।
वर्सन:
वीरवार सुबह ही टीम दोबारा से उन जगहों पर जाएगी जहां अभियान एक दिन लिए छोड़ा गया था। इसके अलावा टीम अपने अधिवक्ता को भी साथ लेकर अतिक्रमण हटाओ अभियान दोबारा से चलाया जा सकता है।- विरेंद्र सिंह हुड्डा, एमई, नगर परिषद।
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उपायुक्त के आदेश के बाद समाधान शिविर में आई 9 शिकायतों के समाधान करने के लिए नगर परिषद को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अभियान को सफल बनाने के लिए नगर परिषद ने पूरी ताकत झोंक दी थी। टीम में नगर परिषद के एमई वीरेंद्र हुड्डा, जेई अक्षय, बीआई बिजेंद्र शर्मा सहित कुल 20 अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। सुरक्षा की दृष्टि से 12 पुलिसकर्मियों का दस्ता तैनात किया गया था साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कृषि विभाग से कृषि विकास अधिकारी सत्यप्रकाश को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर नियुक्त किया गया था। इतने बड़े तामझाम के साथ निकली टीम का लोगों में खौफ कम और चर्चा ज्यादा थी। टीम ने दोपहर 12 बजे वार्ड 17 स्थित पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सांगवान वाली गली से अभियान की शुरुआत की। यहां दो शिकायतों का निपटान होना था लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही एक मकान मालिक ने अपना चबूतरा खुद हटा लिया था। दूसरी शिकायत के तौर पर शौचालय के बाहर बने पाइप के स्पॉट को हटाकर टीम ने खानापूर्ति की।
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कोर्ट आदेश के सामने टेके घुटने
इसके बाद टीम चरखी दरवाजा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के पास पहुंची जहां सड़क निर्माण के लिए पैमाइश करने का बहाना बनाकर अतिक्रमण हटाने की बात को भविष्य के लिए टाल दिया गया। वार्ड-14 की बंजारा बस्ती में टीम ने दो कब्जाधारियों को महज एक दिन की मोहलत देकर अपने कदम पीछे खींच लिए। अभियान के दौरान असली किरकिरी तब हुई जब वार्ड-15 के दाइयों वाले मोहल्ले और खंजाची मोहल्ले में टीम को कोर्ट स्टे (स्थगन आदेश) की कॉपियां दिखाई गईं। इसके बाद कोर्ट के आदेशों के आगे नतमस्तक होकर अधिकारी बिना कोई कार्रवाई किए बैरंग लौट आए। अंत में, वार्ड 18 स्थित भिवानी रोड पर एक कच्चा चबूतरा तोड़कर टीम ने औपचारिक रूप से अभियान को दम तोड़ता पाया। अपनी साख बचाने की आखिरी कोशिश में अधिकारियों ने मेजबान चौक से रोज गार्डन तक दुकानों के बाहर रखे बोर्ड और कुछ सामान को जब्त किया और देखते ही देखते पूरे अभियान की इतिश्री कर दी गई।
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प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन को पहले से ही कोर्ट स्टे या अन्य तकनीकी बाधाओं की जानकारी थी तो फिर इतनी बड़ी फौज के साथ निकलने का कोई औचित्य नहीं था। वहीं टीम को अपने साथ नगर परिषद की ओर से नियुक्त अधिवक्ता को साथ लेकर जाना चाहिए था। शहर में जगह-जगह हुए अवैध कब्जों ने यातायात को बाधित कर रखा है जिससे आमजन को रोज जूझना पड़ता है। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की लचर कार्यप्रणाली और कार्रवाई में ढिलाई के कारण ही अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद हैं।
वर्सन:
वीरवार सुबह ही टीम दोबारा से उन जगहों पर जाएगी जहां अभियान एक दिन लिए छोड़ा गया था। इसके अलावा टीम अपने अधिवक्ता को भी साथ लेकर अतिक्रमण हटाओ अभियान दोबारा से चलाया जा सकता है।- विरेंद्र सिंह हुड्डा, एमई, नगर परिषद।