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Charkhi Dadri News: डेढ़ साल बाद भी नहीं आई डिजिटल पशुगणना रिपोर्ट, योजनाएं प्रभावित
Sat, 01 Aug 2026 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:46 AM IST
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जिले के गांव में बंधे पशुओं को टीका लगाते विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में वर्ष 2024 के दौरान करवाई गई डिजिटल पशुगणना का अंतिम डेटा करीब डेढ़ साल बाद भी जारी नहीं हो पाया है। दिसंबर 2024 में पशुगणना का कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
इससे पशुपालन विभाग की कई योजनाओं के संचालन, टीकों की आपूर्ति, दवाओं की उपलब्धता और विकास कार्यों के लिए बजट निर्धारण प्रभावित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों और पशुपालकों को नई पशुगणना रिपोर्ट का इंतजार है ताकि जिले में पशुधन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
पशुपालन विभाग ने वर्ष 2024 में पहली बार डिजिटल माध्यम से पशुगणना करवाई थी। इसके तहत जिले के सभी गांवों में कर्मचारियों ने घर-घर जाकर प्रत्येक पशु का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया। इसमें पशुओं की नस्ल, आयु, लिंग, उपयोगिता और अन्य जरूरी जानकारियां पोर्टल पर दर्ज की गई थीं।
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उस समय उम्मीद जताई गई थी कि कुछ ही महीनों में रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी लेकिन लंबे समय बाद भी अंतिम आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
टीकों की मांग तय करने में हो रही परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं की संख्या के आधार पर ही मुंहखुर, गलघोंटू, लम्पी स्किन डिजीज और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीकों की मांग राज्य और केंद्र सरकार को भेजी जाती है। यदि वास्तविक पशुधन का आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा तो टीकों की आवश्यकता का सटीक आकलन करना मुश्किल हो जाता है।
इससे जरूरत से कम या अधिक मात्रा में टीकों की आपूर्ति होने की आशंका बनी रहती है जिसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
योजनाओं के बजट पर भी पड़ रहा प्रभाव
पशुपालन विभाग की अधिकांश योजनाओं का बजट भी पशुधन की संख्या के आधार पर तय किया जाता है। पशु स्वास्थ्य शिविर, कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं, नस्ल सुधार कार्यक्रम, पशुपालक प्रशिक्षण, चारा विकास और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि में पशुगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में नई रिपोर्ट जारी नहीं होने से कई योजनाओं की योजना बनाने और संसाधनों के सही वितरण में दिक्कतें आ रही हैं।
दुधारू पशुओं की संख्या घटने की संभावना
पशु विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जिले में दुधारू पशुओं की संख्या में कमी दर्ज हो सकती है। लगातार बढ़ती पशुपालन लागत, हरे चारे की कमी, पशु आहार के बढ़ते दाम और दूध उत्पादन से घटती आय के कारण कई पशुपालकों ने दुधारू पशुओं का पालन कम कर दिया है। हालांकि इसकी वास्तविक तस्वीर पशुगणना की अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद ही सामने आएगी।
करीब 1.98 लाख पशुधन का अनुमान
वर्तमान में जिले में करीब 1.98 लाख पशु होने का अनुमान है। इनमें गाय, भैंस, बैल, बकरी, भेड़, ऊंट, सुअर सहित अन्य पशु शामिल हैं। पशुपालकों का कहना है कि समय पर सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से विभाग को योजनाएं बनाने, टीकाकरण अभियान चलाने और पशु चिकित्सा सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
वहीं विभागीय अधिकारी भी नई रिपोर्ट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगामी योजनाओं और बजट का निर्धारण वास्तविक पशुधन के आधार पर किया जा सके।
वर्जन :
पशुगणना का आंकड़ा अभी जारी नहीं हुआ है। फिलहाल पुराने आंकड़ों के अनुसार ही पशुपालकों को सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। पशुगणना का आंकड़ा जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
- डॉ. जसवंत जून, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग।
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इससे पशुपालन विभाग की कई योजनाओं के संचालन, टीकों की आपूर्ति, दवाओं की उपलब्धता और विकास कार्यों के लिए बजट निर्धारण प्रभावित हो रहा है। विभागीय अधिकारियों और पशुपालकों को नई पशुगणना रिपोर्ट का इंतजार है ताकि जिले में पशुधन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
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पशुपालन विभाग ने वर्ष 2024 में पहली बार डिजिटल माध्यम से पशुगणना करवाई थी। इसके तहत जिले के सभी गांवों में कर्मचारियों ने घर-घर जाकर प्रत्येक पशु का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किया। इसमें पशुओं की नस्ल, आयु, लिंग, उपयोगिता और अन्य जरूरी जानकारियां पोर्टल पर दर्ज की गई थीं।
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उस समय उम्मीद जताई गई थी कि कुछ ही महीनों में रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी लेकिन लंबे समय बाद भी अंतिम आंकड़े सामने नहीं आए हैं।
टीकों की मांग तय करने में हो रही परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि पशुओं की संख्या के आधार पर ही मुंहखुर, गलघोंटू, लम्पी स्किन डिजीज और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीकों की मांग राज्य और केंद्र सरकार को भेजी जाती है। यदि वास्तविक पशुधन का आंकड़ा उपलब्ध नहीं होगा तो टीकों की आवश्यकता का सटीक आकलन करना मुश्किल हो जाता है।
इससे जरूरत से कम या अधिक मात्रा में टीकों की आपूर्ति होने की आशंका बनी रहती है जिसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
योजनाओं के बजट पर भी पड़ रहा प्रभाव
पशुपालन विभाग की अधिकांश योजनाओं का बजट भी पशुधन की संख्या के आधार पर तय किया जाता है। पशु स्वास्थ्य शिविर, कृत्रिम गर्भाधान सेवाएं, नस्ल सुधार कार्यक्रम, पशुपालक प्रशिक्षण, चारा विकास और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लिए मिलने वाली राशि में पशुगणना के आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में नई रिपोर्ट जारी नहीं होने से कई योजनाओं की योजना बनाने और संसाधनों के सही वितरण में दिक्कतें आ रही हैं।
दुधारू पशुओं की संख्या घटने की संभावना
पशु विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जिले में दुधारू पशुओं की संख्या में कमी दर्ज हो सकती है। लगातार बढ़ती पशुपालन लागत, हरे चारे की कमी, पशु आहार के बढ़ते दाम और दूध उत्पादन से घटती आय के कारण कई पशुपालकों ने दुधारू पशुओं का पालन कम कर दिया है। हालांकि इसकी वास्तविक तस्वीर पशुगणना की अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद ही सामने आएगी।
करीब 1.98 लाख पशुधन का अनुमान
वर्तमान में जिले में करीब 1.98 लाख पशु होने का अनुमान है। इनमें गाय, भैंस, बैल, बकरी, भेड़, ऊंट, सुअर सहित अन्य पशु शामिल हैं। पशुपालकों का कहना है कि समय पर सटीक आंकड़े उपलब्ध होने से विभाग को योजनाएं बनाने, टीकाकरण अभियान चलाने और पशु चिकित्सा सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।
वहीं विभागीय अधिकारी भी नई रिपोर्ट जारी होने का इंतजार कर रहे हैं ताकि आगामी योजनाओं और बजट का निर्धारण वास्तविक पशुधन के आधार पर किया जा सके।
वर्जन :
पशुगणना का आंकड़ा अभी जारी नहीं हुआ है। फिलहाल पुराने आंकड़ों के अनुसार ही पशुपालकों को सभी प्रकार की सुविधाएं दी जा रही हैं। पशुगणना का आंकड़ा जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
- डॉ. जसवंत जून, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग।