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Charkhi Dadri News: मानसून से पहले तालाब खाली करना जरूरी, ओवरफ्लो होने पर बस्तियों में भर जाता है बारिश का पानी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:36 PM IST
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गांव ढाणी फोगाट स्थिति तालाब में भरा दूषित पानी।
- फोटो : 1
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चरखी दादरी। मानसून सीजन से पहले शहर व गांवों में बने तालाब खाली करने की जरूरत है। तालाब ओवरफ्लो होने पर आवासीय बस्तियों में बारिश का पानी भर जाता है। इस समय अधिकतर तालाब दूषित पानी से भरे हुए हैं। जिले में 170 में से 80 तालाबों को खाली करने की सख्त जरूरत है। बारिश सीजन में तालाब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते हैं।
तालाबों को खाली करने से जलभराव से काफी राहत मिल सकती है। तालाबों के दूषित पानी को खाली जगह पर डाला जा सकता है। मानसून सीजन में तालाब भरकर ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे बाजारों व आवासीय बस्तियों में पानी भर जाता है। गांवों में खाली खेतों में इस पानी को समायोजित किया जा सकता है।
बाजारों में भरता है पानी
नगर में डूंगरवाला जोहड़ में ज्यादा मात्रा में पानी भरता है। इस जोहड़ में सभी बाजारों का पानी जाता है। जनस्वास्थ्य विभाग भी लाइन के जरिये इस जोहड़ में ही बारिश का पानी एकत्रित करता है। इसके बाद मोटरों से पानी का उठान कर एसटीपी तक पहुंचाया जाता है। अब तक यह जोहड़ मेन बाजारों में जलभराव का कारण बनता रहा है। यह जोहड़ मानसून के पानी को झेलता है। पानी की निकासी कर इनकी गाद भी निकाली जा सकती है ताकि पानी की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ जाए।
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जोहड़ों काे खाली करवाना जरूरी
इसी प्रकार शहर के अलावा गांवों में भी दूषित पानी से भरे जोहड़ों को खाली करना जरूरी हो गया है। जोहड़ भरकर ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे आसपास की आवासीय बस्तियों में पानी भर जाता है। गांव चरखी, बौंद कलां, मिसरी, बिरही कलां, छपार, ढाणी फोगाट, रासीवास, घसोला, सांवड़, सांजरवास, मालकोष, इमलोटा, भागवी, फतेहगढ़, साहुवास सहित करीब 20 गांवों में बारिश सीजन में जलभराव बनता है।
इतिहास खो रहे तालाब
इन सभी गांवों में दूषित पानी का रूप ले चुके जोहड़ों को आसपास खेतों में खाली किया जा सकता है ताकि बारिश सीजन में दिक्कत न आए। एक समय था जब तालाबों में साफ पानी होता था। अब तो सभी तालाबों में गांव का दूषित पानी जाता है। तालाब अपना प्राचीन सौंदर्य एवं इतिहास खो चुके हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत मॉडल तालाब बनाने की मुहिम शुरू कर रखी है।
25 मॉडल तालाबों पर काम जारी
देशभर में प्रत्येक जिले में 25 मॉडल तालाब बनाने पर काम हो रहा है। इस योजना के तहत तालाबों के किनारे पौधरोपण व रोशनी की व्यवस्था करने का प्रावधान है ताकि हरियाली को भी बढ़ावा मिल सके। इस योजना के तहत प्रत्येक तालाब पर करीब 25 से 50 लाख रुपये तक बजट खर्च किया जा रहा है। इन तालाबों की गाद निकासी सुंदरीकरण करने का काम किया जा रहा है।
वर्सन :
गांवों में सरपंचों से संपर्क किया जा रहा है ताकि जोहड़ ओवरफ्लो होने की स्थिति से बचाया जा सके और बस्तियों में पानी न घुसने पाए। इसके लिए जेई व एसडीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।- वेदपाल सांगवान, कार्यकारी अभियंता, मैकेनिकल शाखा
तालाबों को खाली करने से जलभराव से काफी राहत मिल सकती है। तालाबों के दूषित पानी को खाली जगह पर डाला जा सकता है। मानसून सीजन में तालाब भरकर ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे बाजारों व आवासीय बस्तियों में पानी भर जाता है। गांवों में खाली खेतों में इस पानी को समायोजित किया जा सकता है।
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बाजारों में भरता है पानी
नगर में डूंगरवाला जोहड़ में ज्यादा मात्रा में पानी भरता है। इस जोहड़ में सभी बाजारों का पानी जाता है। जनस्वास्थ्य विभाग भी लाइन के जरिये इस जोहड़ में ही बारिश का पानी एकत्रित करता है। इसके बाद मोटरों से पानी का उठान कर एसटीपी तक पहुंचाया जाता है। अब तक यह जोहड़ मेन बाजारों में जलभराव का कारण बनता रहा है। यह जोहड़ मानसून के पानी को झेलता है। पानी की निकासी कर इनकी गाद भी निकाली जा सकती है ताकि पानी की स्टोरेज क्षमता भी बढ़ जाए।
जोहड़ों काे खाली करवाना जरूरी
इसी प्रकार शहर के अलावा गांवों में भी दूषित पानी से भरे जोहड़ों को खाली करना जरूरी हो गया है। जोहड़ भरकर ओवरफ्लो हो जाते हैं जिससे आसपास की आवासीय बस्तियों में पानी भर जाता है। गांव चरखी, बौंद कलां, मिसरी, बिरही कलां, छपार, ढाणी फोगाट, रासीवास, घसोला, सांवड़, सांजरवास, मालकोष, इमलोटा, भागवी, फतेहगढ़, साहुवास सहित करीब 20 गांवों में बारिश सीजन में जलभराव बनता है।
इतिहास खो रहे तालाब
इन सभी गांवों में दूषित पानी का रूप ले चुके जोहड़ों को आसपास खेतों में खाली किया जा सकता है ताकि बारिश सीजन में दिक्कत न आए। एक समय था जब तालाबों में साफ पानी होता था। अब तो सभी तालाबों में गांव का दूषित पानी जाता है। तालाब अपना प्राचीन सौंदर्य एवं इतिहास खो चुके हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने अमृत सरोवर योजना के तहत मॉडल तालाब बनाने की मुहिम शुरू कर रखी है।
25 मॉडल तालाबों पर काम जारी
देशभर में प्रत्येक जिले में 25 मॉडल तालाब बनाने पर काम हो रहा है। इस योजना के तहत तालाबों के किनारे पौधरोपण व रोशनी की व्यवस्था करने का प्रावधान है ताकि हरियाली को भी बढ़ावा मिल सके। इस योजना के तहत प्रत्येक तालाब पर करीब 25 से 50 लाख रुपये तक बजट खर्च किया जा रहा है। इन तालाबों की गाद निकासी सुंदरीकरण करने का काम किया जा रहा है।
वर्सन :
गांवों में सरपंचों से संपर्क किया जा रहा है ताकि जोहड़ ओवरफ्लो होने की स्थिति से बचाया जा सके और बस्तियों में पानी न घुसने पाए। इसके लिए जेई व एसडीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई है।- वेदपाल सांगवान, कार्यकारी अभियंता, मैकेनिकल शाखा