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Charkhi Dadri News: बीमा कंपनी को दिए वाहन ऋण को बीमा राशि से चुकता करने और शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:12 AM IST
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चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा और फाइनेंस कंपनी की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने दोनों कंपनियों को सेवा में कोताही का दोषी पाते हुए मृतक महिला के वाहन ऋण को बीमा राशि से चुकता करने और शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
गांव कादमा निवासी सुभाष ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी माता अनीता देवी ने 28 जनवरी 2023 को एक महिंद्रा बोलेरो गाड़ी फाइनेंस करवाई थी। इस ऋण की सुरक्षा के लिए एक बीमा कंपनी से ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी ताकि ऋणी की मृत्यु की स्थिति में बीमा कंपनी बकाया ऋण का भुगतान करे। आठ मार्च 2023 को अनीता देवी का निधन हो गया। मृत्यु के बाद जब उनके बेटे सुभाष ने बीमा क्लेम किया तो कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृतका को पहले से बीमारियां थीं जिन्हें पॉलिसी लेते समय छिपाया गया था। वहीं दूसरी ओर फाइनेंस कंपनी ने क्लेम लंबित होने के बावजूद किश्तें वसूलना जारी रखा और वाहन की एनओसी देने से मना कर दिया।
आयोग ने यह की टिप्पणी
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को निराधार पाया। आयोग ने कहा कि कंपनी ने जिन मेडिकल रिकॉर्ड्स का हवाला दिया है उनमें केवल सामान्य बीमारियां जैसे कमर दर्द और डर्मेटाइटिस का उल्लेख था जिन्हें जानलेवा या गंभीर पूर्व-बीमारी नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि इन सामान्य बीमारियों का मृत्यु से कोई सीधा संबंध था।
आयोग ने ये दिए निर्देश
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह बीमा पॉलिसी के तहत क्लेम का निपटारा करे और वाहन की बकाया ऋण राशि सीधे फाइनेंस कंपनी को जमा करवाए। फाइनेंस कंपनी को आदेश दिया गया कि वह शिकायतकर्ता से किश्तों की मांग तुरंत बंद करे और बीमा राशि प्राप्त होने के बाद वाहन की एनओसी जारी करे। साथ ही दोनों कंपनियों को संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 5500 रुपये देने के आदेश दिए गए।
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गांव कादमा निवासी सुभाष ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी माता अनीता देवी ने 28 जनवरी 2023 को एक महिंद्रा बोलेरो गाड़ी फाइनेंस करवाई थी। इस ऋण की सुरक्षा के लिए एक बीमा कंपनी से ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी ली गई थी ताकि ऋणी की मृत्यु की स्थिति में बीमा कंपनी बकाया ऋण का भुगतान करे। आठ मार्च 2023 को अनीता देवी का निधन हो गया। मृत्यु के बाद जब उनके बेटे सुभाष ने बीमा क्लेम किया तो कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृतका को पहले से बीमारियां थीं जिन्हें पॉलिसी लेते समय छिपाया गया था। वहीं दूसरी ओर फाइनेंस कंपनी ने क्लेम लंबित होने के बावजूद किश्तें वसूलना जारी रखा और वाहन की एनओसी देने से मना कर दिया।
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आयोग ने यह की टिप्पणी
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के तर्कों को निराधार पाया। आयोग ने कहा कि कंपनी ने जिन मेडिकल रिकॉर्ड्स का हवाला दिया है उनमें केवल सामान्य बीमारियां जैसे कमर दर्द और डर्मेटाइटिस का उल्लेख था जिन्हें जानलेवा या गंभीर पूर्व-बीमारी नहीं माना जा सकता। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि इन सामान्य बीमारियों का मृत्यु से कोई सीधा संबंध था।
आयोग ने ये दिए निर्देश
आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह बीमा पॉलिसी के तहत क्लेम का निपटारा करे और वाहन की बकाया ऋण राशि सीधे फाइनेंस कंपनी को जमा करवाए। फाइनेंस कंपनी को आदेश दिया गया कि वह शिकायतकर्ता से किश्तों की मांग तुरंत बंद करे और बीमा राशि प्राप्त होने के बाद वाहन की एनओसी जारी करे। साथ ही दोनों कंपनियों को संयुक्त रूप से शिकायतकर्ता को मानसिक और शारीरिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 5500 रुपये देने के आदेश दिए गए।