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Charkhi Dadri News: सीसीआई की जमीन को लेकर एक बार फिर लोगों के हाथ लगी निराशा
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:42 AM IST
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दादरी में स्थित सीसीआई के सीमेंट कारखाने के मुख्य द्वार की तस्वीर।
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चरखी दादरी। दादरी में स्थित सीमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) की 200 एकड़ से अधिक जमीन को दोबारा से उपयोग में लाने को लेकर योजना नहीं बन सकी है। पिछले काफी समय से हर वर्ष क्षेत्र के लोग उम्मीद रखते हैं कि केंद्रीय आम बजट में इस जमीन को लेकर कोई घोषणा हो सकती है लेकिन हर बार लोगों की यह उम्मीद टूटती है। इस बार भी लोगों के साथ ऐसा ही हुआ।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किए गए आम बजट में इस जमीन को दोबारा से उपयोग में लाने से संबंधित कोई घोषणा नहीं की गई। जिससे लोगों को एक बार फिर से निराशा ही हाथ लगी है।
क्षेत्र के लोग पिछले काफी समय से मांग कर रहे हैं कि यह जमीन प्रदेश सरकार को हस्तांतरित कर देनी चाहिए, ताकि इस जमीन को दोबारा से उपयोग में लाया जा सके।
तत्कालीन सीएम ने दिया था सुझाव
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिसंबर 2019 में सार्वजनिक उपक्रम की बंद पड़ी केंद्रीय इकाइयों को प्रदेश सरकार को बेचने संबंधित प्रस्ताव केंद्रीय आम बजट में लाने का सुझाव दिया था। उनके द्वारा इस प्रस्ताव में दादरी के सीसीआई कारखाने का भी जिक्र किया गया था। उस समय भी लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद अब यह जमीन प्रदेश सरकार को मिल सकती है। लेकिन पांच वर्ष से ज्यादा का समय बीतने के बावजूद यह सिरे नहीं चढ़ सकी है।
1996 से बंद है उत्पादन कार्य
वर्ष 1938 में डालमिया परिवार व जींद रियासत के शासक महाराजा रणवीर सिंह के प्रयासों से दादरी में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर सीमेंट कारखाना स्थापित किया गया था। वर्ष 1980 में इस कारखाने पर तालाबंदी कर दी गई थी। हजारों कर्मचारियों द्वारा धरना-प्रदर्शन करने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसमें हस्तक्षेप किया और केंद्र सरकार ने 23 जून 1981 को अधिसूचना जारी कर इस कारखाने को सीसीआई का उपक्रम बना दिया। वर्ष 1996 से इस कारखाने में सीमेंट का उत्पादन बंद पड़ा है और वर्तमान में यहां काफी संख्या में झाड़ियां उगी हुई हैं।
वेयरहाउस, रिहायशी क्षेत्र के तौर पर हो सकता है विकसित
गौरतलब है कि मौजूदा समय में दादरी जिले में कोई भी औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक सीसीआई की इस जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मांग उठाई जा रही थी। लेकिन वर्तमान में इस जमीन के चारों तरफ रिहायशी कॉलोनियां विकसित होने के कारण यहां औद्योगिक क्षेत्र बनने की संभावनाएं कम हैं। लोगों का कहना है कि अब इस जमीन को वेयरहाउस या फिर रिहायशी क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जा सकता है।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किए गए आम बजट में इस जमीन को दोबारा से उपयोग में लाने से संबंधित कोई घोषणा नहीं की गई। जिससे लोगों को एक बार फिर से निराशा ही हाथ लगी है।
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क्षेत्र के लोग पिछले काफी समय से मांग कर रहे हैं कि यह जमीन प्रदेश सरकार को हस्तांतरित कर देनी चाहिए, ताकि इस जमीन को दोबारा से उपयोग में लाया जा सके।
तत्कालीन सीएम ने दिया था सुझाव
प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने दिसंबर 2019 में सार्वजनिक उपक्रम की बंद पड़ी केंद्रीय इकाइयों को प्रदेश सरकार को बेचने संबंधित प्रस्ताव केंद्रीय आम बजट में लाने का सुझाव दिया था। उनके द्वारा इस प्रस्ताव में दादरी के सीसीआई कारखाने का भी जिक्र किया गया था। उस समय भी लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद अब यह जमीन प्रदेश सरकार को मिल सकती है। लेकिन पांच वर्ष से ज्यादा का समय बीतने के बावजूद यह सिरे नहीं चढ़ सकी है।
1996 से बंद है उत्पादन कार्य
वर्ष 1938 में डालमिया परिवार व जींद रियासत के शासक महाराजा रणवीर सिंह के प्रयासों से दादरी में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर सीमेंट कारखाना स्थापित किया गया था। वर्ष 1980 में इस कारखाने पर तालाबंदी कर दी गई थी। हजारों कर्मचारियों द्वारा धरना-प्रदर्शन करने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसमें हस्तक्षेप किया और केंद्र सरकार ने 23 जून 1981 को अधिसूचना जारी कर इस कारखाने को सीसीआई का उपक्रम बना दिया। वर्ष 1996 से इस कारखाने में सीमेंट का उत्पादन बंद पड़ा है और वर्तमान में यहां काफी संख्या में झाड़ियां उगी हुई हैं।
वेयरहाउस, रिहायशी क्षेत्र के तौर पर हो सकता है विकसित
गौरतलब है कि मौजूदा समय में दादरी जिले में कोई भी औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। कुछ वर्ष पहले तक सीसीआई की इस जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मांग उठाई जा रही थी। लेकिन वर्तमान में इस जमीन के चारों तरफ रिहायशी कॉलोनियां विकसित होने के कारण यहां औद्योगिक क्षेत्र बनने की संभावनाएं कम हैं। लोगों का कहना है कि अब इस जमीन को वेयरहाउस या फिर रिहायशी क्षेत्र के तौर पर विकसित किया जा सकता है।
