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Charkhi Dadri News: केंद्रीय बजट पर विभिन्न वर्गों के लोगों ने दीं मिलीजुली प्रक्रियाएं
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 02 Feb 2026 01:34 AM IST
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चरखी दादरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को लोकसभा में केंद्रीय आम बजट प्रस्तुत किया। बजट पर दादरी जिले के विभिन्न वर्गों के लोगों ने मिलीजुली प्रतिक्रियाएं दी हैं। महिला, किसान, युवा इस बजट से अधिक खुश नहीं दिखाई दे रहे हैं। वहीं, नौकरी पेशा व शिक्षा से जुड़े लोगों ने भी बजट को अधिक प्रभावी नहीं बताया।
किसान वर्ग :
इस बजट में किसान के लिए कोई ठोस राहत नहीं दिखाई दी। एमएसपी की गारंटी, डीजल-खाद के दाम और सिंचाई लागत पर सरकार ने चुप्पी साधी है। केवल योजनाओं की बात की गई, जमीनी हकीकत से यह बजट दूर नजर आता है।
- संदीप श्योराण, गांव कान्हड़ा
बजट से किसानों को काफी उम्मीद थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। फसलों के उचित दाम, कर्ज माफी या प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। खेती से जुड़े युवाओं को प्रोत्साहन देने की भी बात नहीं दिखी।
- रवि श्योराण, गांव बेरला
महिला वर्ग :
महिलाओं के लिए बजट में कुछ खास नजर नहीं आया। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन रसोई गैस, शिक्षा और स्वास्थ्य पर राहत नहीं मिली। स्वयं सहायता समूहों की बातें तो होती हैं, पर जमीनी सहायता बहुत कम है।
- मंजू देवी, दादरी निवासी।
इस बजट से कामकाजी महिलाओं को खास लाभ नहीं मिला। सरकार की ओर से शी-मार्ट खोलने की घोषणा सराहनीय है। इससे नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा टैक्स राहत, चाइल्ड केयर सुविधा और रोजगार सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
-अनु रानी, गांव बेरला निवासी।
व्यापारी वर्ग :
बजट छोटे उद्योगों, व्यापारियों व आमजन के लिए बड़ी सौगात लेकर आया है। 10 हजार करोड़ रुपये का चैंपियन एमएसएमई फंड छोटे उद्योगों को ग्लोबल बनाने में मदद करेगा। इनकम टैक्स नियमों में सरलीकरण से छोटे व मध्य व्यापारियों एवं आमजन को जटिलताओं से राहत मिलेगी। टीडीएस टीसीएस प्रक्रिया में सरलीकरण छोटे करदाताओं को राहत प्रदान करता है।
- बलराम गुप्ता, जिलाध्यक्ष, हरियाणा व्यापार मंडल
केंद्रीय बजट में की गई घोषणाओं से लगभग सभी वर्ग को निराशा का सामना करना पडा है। यह एक ऐसा बजट है जिसे खानापूर्ति के लिए ही पेश किया गया है। इसमें किसी छोटे व्यापारी, दुकानदार, किसान, गरीब का कोई प्रत्यक्ष भला होता दिखाई नहीं दे रहा है। यही कारण है कि बजट पेश करने के दौरान ही शेयर बाजार भी काफी टूट गया।
- संदीप फौगाट, उप प्रधान, दादरी नगर व्यापार मंडल
शिक्षक वर्ग :
शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले प्रावधान युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में सहायक होंगे। तकनीकी नवाचार और रोजगारोन्मुख योजनाएं देश के युवाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करेंगी।
- साजिद खान, शिक्षक।
सरकार से जो बजट में शिक्षा को लेकर उम्मीदें थी, वो पूरी हुई है। बेरोजगार प्रशिक्षित युवाओं, शिक्षकों की कमी और संसाधनों की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में बजट महत्वपूर्ण साबित होगा। शिक्षा को मजबूत किए बिना देश का भविष्य मजबूत नहीं हो सकता, बजट में यह सोच सही दिखाई दी है।
- मनोज कुमार, शिक्षक।
युवा :
केंद्रीय बजट में सरकार ने आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं।
- प्रियम बजाज, युवा
केंद्रीय बजट में युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई घोषणाएं की गई है, जो आने वाले समय में युवाओं के लिए लाभदायक होगीं। लघु एवं सीमांत उद्योगों में निवेश के लिए अच्छा मौका है। विभिन्न प्रकार के कोर्स करने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की शुरुआत की जानी भी अच्छे संकेत हैं।
- जतिन गर्ग, युवा।
नाैकरी पेशा वर्ग :
आम आदमी की रोजमर्रा की चिंताओं जैसे महंगाई, मध्यम और निम्न आय वर्ग पर करों का प्रभाव तथा स्वास्थ्य व शिक्षा की बढ़ती लागत पर और ठोस राहत की अपेक्षा थी। नौकरी पेशा वाले लोग भी सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए लक्षित उपाय यदि और स्पष्ट होते, तो इसका असर ज़मीन पर अधिक दिखता।
- साहिल नवांकुर, दादरी निवासी।
इस बजट में आम जनता के लिए कुछ खास घोषणाएं नहीं दिखाई दी। बजट में सैलरी क्लास के लिए कोई बड़ी राहत नहीं दी गई। टैक्स स्लैब में बदलाव और महंगाई नियंत्रण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। नौकरीपेशा वर्ग पहले ही दबाव में है, लेकिन बजट में उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।
- विक्रम राज, शहर निवासी।
केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र, विशेषकर आर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सरकार ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता दी है। बजट टिकाऊ खेती की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
- राकेश बेनिवाल, संस्थापक, किसान युवा क्लब
बजट कहीं न कहीं पूरी तरह आशा के अनुसार नहीं है लेकिन यह आने वाले दिनों में अनेक योजनाओं का खाका जरूर पेश कर रहा है। यदि सरकार इन योजनाओं को सही तरीके से धरातल पर उतारने में कामयाब रही तो दूरगामी सकारात्मक प्रभाव होंगे। शेयर बाजार के लिहाज से बजट निराशाजनक रहा है।
-- अंकित गुप्ता, शेयर बाजार निवेशक।
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किसान वर्ग :
इस बजट में किसान के लिए कोई ठोस राहत नहीं दिखाई दी। एमएसपी की गारंटी, डीजल-खाद के दाम और सिंचाई लागत पर सरकार ने चुप्पी साधी है। केवल योजनाओं की बात की गई, जमीनी हकीकत से यह बजट दूर नजर आता है।
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- संदीप श्योराण, गांव कान्हड़ा
बजट से किसानों को काफी उम्मीद थी, लेकिन निराशा ही हाथ लगी। फसलों के उचित दाम, कर्ज माफी या प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई। खेती से जुड़े युवाओं को प्रोत्साहन देने की भी बात नहीं दिखी।
- रवि श्योराण, गांव बेरला
महिला वर्ग :
महिलाओं के लिए बजट में कुछ खास नजर नहीं आया। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन रसोई गैस, शिक्षा और स्वास्थ्य पर राहत नहीं मिली। स्वयं सहायता समूहों की बातें तो होती हैं, पर जमीनी सहायता बहुत कम है।
- मंजू देवी, दादरी निवासी।
इस बजट से कामकाजी महिलाओं को खास लाभ नहीं मिला। सरकार की ओर से शी-मार्ट खोलने की घोषणा सराहनीय है। इससे नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा टैक्स राहत, चाइल्ड केयर सुविधा और रोजगार सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
-अनु रानी, गांव बेरला निवासी।
व्यापारी वर्ग :
बजट छोटे उद्योगों, व्यापारियों व आमजन के लिए बड़ी सौगात लेकर आया है। 10 हजार करोड़ रुपये का चैंपियन एमएसएमई फंड छोटे उद्योगों को ग्लोबल बनाने में मदद करेगा। इनकम टैक्स नियमों में सरलीकरण से छोटे व मध्य व्यापारियों एवं आमजन को जटिलताओं से राहत मिलेगी। टीडीएस टीसीएस प्रक्रिया में सरलीकरण छोटे करदाताओं को राहत प्रदान करता है।
- बलराम गुप्ता, जिलाध्यक्ष, हरियाणा व्यापार मंडल
केंद्रीय बजट में की गई घोषणाओं से लगभग सभी वर्ग को निराशा का सामना करना पडा है। यह एक ऐसा बजट है जिसे खानापूर्ति के लिए ही पेश किया गया है। इसमें किसी छोटे व्यापारी, दुकानदार, किसान, गरीब का कोई प्रत्यक्ष भला होता दिखाई नहीं दे रहा है। यही कारण है कि बजट पेश करने के दौरान ही शेयर बाजार भी काफी टूट गया।
- संदीप फौगाट, उप प्रधान, दादरी नगर व्यापार मंडल
शिक्षक वर्ग :
शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले प्रावधान युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और रोजगार के नए अवसर तलाशने में सहायक होंगे। तकनीकी नवाचार और रोजगारोन्मुख योजनाएं देश के युवाओं के आत्मविश्वास को मजबूत करेंगी।
- साजिद खान, शिक्षक।
सरकार से जो बजट में शिक्षा को लेकर उम्मीदें थी, वो पूरी हुई है। बेरोजगार प्रशिक्षित युवाओं, शिक्षकों की कमी और संसाधनों की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में बजट महत्वपूर्ण साबित होगा। शिक्षा को मजबूत किए बिना देश का भविष्य मजबूत नहीं हो सकता, बजट में यह सोच सही दिखाई दी है।
- मनोज कुमार, शिक्षक।
युवा :
केंद्रीय बजट में सरकार ने आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं।
- प्रियम बजाज, युवा
केंद्रीय बजट में युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए कई घोषणाएं की गई है, जो आने वाले समय में युवाओं के लिए लाभदायक होगीं। लघु एवं सीमांत उद्योगों में निवेश के लिए अच्छा मौका है। विभिन्न प्रकार के कोर्स करने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों की शुरुआत की जानी भी अच्छे संकेत हैं।
- जतिन गर्ग, युवा।
नाैकरी पेशा वर्ग :
आम आदमी की रोजमर्रा की चिंताओं जैसे महंगाई, मध्यम और निम्न आय वर्ग पर करों का प्रभाव तथा स्वास्थ्य व शिक्षा की बढ़ती लागत पर और ठोस राहत की अपेक्षा थी। नौकरी पेशा वाले लोग भी सरकार से राहत की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे व्यापारियों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए लक्षित उपाय यदि और स्पष्ट होते, तो इसका असर ज़मीन पर अधिक दिखता।
- साहिल नवांकुर, दादरी निवासी।
इस बजट में आम जनता के लिए कुछ खास घोषणाएं नहीं दिखाई दी। बजट में सैलरी क्लास के लिए कोई बड़ी राहत नहीं दी गई। टैक्स स्लैब में बदलाव और महंगाई नियंत्रण पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। नौकरीपेशा वर्ग पहले ही दबाव में है, लेकिन बजट में उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया।
- विक्रम राज, शहर निवासी।
केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र, विशेषकर आर्गेनिक और प्राकृतिक खेती के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सरकार ने रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत को प्राथमिकता दी है। बजट टिकाऊ खेती की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
- राकेश बेनिवाल, संस्थापक, किसान युवा क्लब
बजट कहीं न कहीं पूरी तरह आशा के अनुसार नहीं है लेकिन यह आने वाले दिनों में अनेक योजनाओं का खाका जरूर पेश कर रहा है। यदि सरकार इन योजनाओं को सही तरीके से धरातल पर उतारने में कामयाब रही तो दूरगामी सकारात्मक प्रभाव होंगे। शेयर बाजार के लिहाज से बजट निराशाजनक रहा है।
