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Charkhi Dadri News: खराब मोबाइल बेचने पर कंपनी को झटका, ब्याज सहित 13 हजार लौटाने के आदेश
Mon, 27 Jul 2026 10:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 27 Jul 2026 10:18 PM IST
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चरखी दादरी। दादरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक मोबाइल निर्माता कंपनी को ग्राहक को फोन की पूरी कीमत 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं।
इसके अलावा कंपनी को मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के रूप में कुल 10 हजार रुपये का हर्जाना भी देना होगा। आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने यह आदेश जारी किया।
मामले के अनुसार गांव चरखी निवासी प्रदीप ने 19 नवंबर 2024 को एक दुकान से 13 हजार रुपये में मोबाइल हैंडसेट खरीदा था। खरीदारी के समय फोन पर एक वर्ष और बैटरी पर छह माह की वारंटी का आश्वासन दिया गया था। उपभोक्ता का आरोप है कि फोन लेने के तुरंत बाद ही बैटरी तेजी से खत्म होने लगी। वारंटी अवधि के दौरान वह कई बार सर्विस सेंटर गया। कंपनी के रोहतक स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर ने बैटरी भी बदली लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।
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प्रदीप ने बताया कि नया फोन होने के बावजूद तकनीकी खराबी लगातार बनी रही। जब कंपनी को भेजे गए कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं मिला तो उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की।
आयोग ने मानी निर्माण संबंधी खराबी
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि नोटिस मिलने के बावजूद मोबाइल निर्माता कंपनी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई जिसके चलते मामला एकतरफा चला। आयोग ने टिप्पणी की कि कोई भी ग्राहक नए मोबाइल के लिए बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
वारंटी अवधि में भी खराबी का ठीक न होना इस बात का संकेत है कि हैंडसेट में निर्माण संबंधी (मैन्युफैक्चरिंग) दोष था। आयोग ने विक्रेता को राहत देते हुए कहा कि वह केवल रिटेलर है और तकनीकी खामियों के लिए निर्माता कंपनी ही जिम्मेदार होगी।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी शिकायत दर्ज होने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 13 हजार रुपये उपभोक्ता को लौटाए। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 5 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अलग से अदा करे।
कंपनी को यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करना होगा। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद उपभोक्ता खराब मोबाइल हैंडसेट कंपनी को वापस सौंप देगा।
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इसके अलावा कंपनी को मानसिक प्रताड़ना और अदालती खर्च के रूप में कुल 10 हजार रुपये का हर्जाना भी देना होगा। आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने यह आदेश जारी किया।
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मामले के अनुसार गांव चरखी निवासी प्रदीप ने 19 नवंबर 2024 को एक दुकान से 13 हजार रुपये में मोबाइल हैंडसेट खरीदा था। खरीदारी के समय फोन पर एक वर्ष और बैटरी पर छह माह की वारंटी का आश्वासन दिया गया था। उपभोक्ता का आरोप है कि फोन लेने के तुरंत बाद ही बैटरी तेजी से खत्म होने लगी। वारंटी अवधि के दौरान वह कई बार सर्विस सेंटर गया। कंपनी के रोहतक स्थित अधिकृत सर्विस सेंटर ने बैटरी भी बदली लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।
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प्रदीप ने बताया कि नया फोन होने के बावजूद तकनीकी खराबी लगातार बनी रही। जब कंपनी को भेजे गए कानूनी नोटिस का भी कोई जवाब नहीं मिला तो उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की।
आयोग ने मानी निर्माण संबंधी खराबी
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि नोटिस मिलने के बावजूद मोबाइल निर्माता कंपनी आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुई जिसके चलते मामला एकतरफा चला। आयोग ने टिप्पणी की कि कोई भी ग्राहक नए मोबाइल के लिए बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
वारंटी अवधि में भी खराबी का ठीक न होना इस बात का संकेत है कि हैंडसेट में निर्माण संबंधी (मैन्युफैक्चरिंग) दोष था। आयोग ने विक्रेता को राहत देते हुए कहा कि वह केवल रिटेलर है और तकनीकी खामियों के लिए निर्माता कंपनी ही जिम्मेदार होगी।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने आदेश दिया है कि कंपनी शिकायत दर्ज होने की तिथि से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 13 हजार रुपये उपभोक्ता को लौटाए। साथ ही मानसिक परेशानी के लिए 5 हजार रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5 हजार रुपये अलग से अदा करे।
कंपनी को यह आदेश 45 दिनों के भीतर लागू करना होगा। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया तो ब्याज दर बढ़कर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि भुगतान प्राप्त होने के बाद उपभोक्ता खराब मोबाइल हैंडसेट कंपनी को वापस सौंप देगा।