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Charkhi Dadri News: जिले के 35 गांवों में जमीन की नई जमाबंदी 25 दिन में हो जाएगी दुरुस्त
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 26 Jan 2026 02:22 AM IST
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दादरी स्थित सरल केंद्र, जहां रजिस्ट्री आदि से संबंधित कार्य होते हैं।
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चरखी दादरी। दादरी जिले के 35 गांवों में जमीन की नई जमाबंदी 25 दिन में बनकर तैयार हो जाएगी। राजस्व विभाग ने 26 गांवों की जमाबंदी का कार्य पूरा कर लिया है।
विभाग हर चार साल में जमीन की जमाबंदी को दुरुस्त करता है। जमाबंदी में विशेष रूप से नए मालिक का नाम जोड़ने व पुराने को हटाने का काम होता है। जिला राजस्व अधिकारी जमाबंदी की बारीकी से निगरानी रख रहे हैं। जिले में 167 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक गांव की अलग जमाबंदी है। जमीन की खरीद-फरोख्त का कार्य जमाबंदी में दर्ज विवरण के आधार पर ही होता है।
जिले में प्रति माह करीब 700 मकान एवं जमीन की रजिस्टि्रयां होती हैं। एक साल में करीब 8500 रजिस्ट्री हो जाती हैं। ऐसे में जमाबंदी में हर साल ये नए मालिक बन जाते हैं। विभाग चार साल में एक बार जमाबंदी को अपडेट यानी दुरुस्त करता है। नई जमाबंदी तैयार करते समय इन नए मालिकों के नाम इसमें दर्ज कर दिया जाता है। जिले में तीन खंड हैं जिनमें रजिस्ट्री बनाने का काम होता है। इन खंड में बौंद कलां, बाढड़ा व दादरी शामिल हैं। रजिस्ट्री तहसीलदार, एसडीएम व डीआरओ की निगरानी में होती हैं। ये तीनों अधिकारी ही आवेदन को अंतिम स्वीकृति देते हैं। उसके बाद रजिस्ट्री बनती है।
इस समय जिले के गांवों व शहर में जमाबंदी में हजारों की संख्या में त्रुटियां भी हैं। किसी का रकबा कम पड़ रहा है तो किसी का ज्यादा दिखाया गया है। किसी जमाबंदी में मूल मालिक का नाम ही नहीं है। जमीन की रजिस्ट्री करवाते समय इस त्रुटि का पता चल पाता है। त्रुटि दूर करने के लिए पटवारी से बदर लिखवाकर तहसीलदार के हस्ताक्षर होने पर मूल रिकार्ड में संशोधन करना पड़ता है, तब जाकर त्रुटि दूर हो पाती है।
अब जमाबंदी में खामियां दूर करने व नए मालिकों का नाम जोड़ने का काम जारी है। अब तक 26 गांवों की नई जमाबंदी बनकर तैयार हो चुकी है। नौ गांवों की जमाबंदी का काम 25 दिन में पूरा होने जा रहा है।
विदित रहे हर साल किसी न किसी गांव की नई जमाबंदी तैयार करनी पड़ती है क्योंकि उस गांव की चार वर्ष की समयावधि पूरी हो चुकी होती है।
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विभाग हर चार साल में जमीन की जमाबंदी को दुरुस्त करता है। जमाबंदी में विशेष रूप से नए मालिक का नाम जोड़ने व पुराने को हटाने का काम होता है। जिला राजस्व अधिकारी जमाबंदी की बारीकी से निगरानी रख रहे हैं। जिले में 167 ग्राम पंचायतें हैं। प्रत्येक गांव की अलग जमाबंदी है। जमीन की खरीद-फरोख्त का कार्य जमाबंदी में दर्ज विवरण के आधार पर ही होता है।
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जिले में प्रति माह करीब 700 मकान एवं जमीन की रजिस्टि्रयां होती हैं। एक साल में करीब 8500 रजिस्ट्री हो जाती हैं। ऐसे में जमाबंदी में हर साल ये नए मालिक बन जाते हैं। विभाग चार साल में एक बार जमाबंदी को अपडेट यानी दुरुस्त करता है। नई जमाबंदी तैयार करते समय इन नए मालिकों के नाम इसमें दर्ज कर दिया जाता है। जिले में तीन खंड हैं जिनमें रजिस्ट्री बनाने का काम होता है। इन खंड में बौंद कलां, बाढड़ा व दादरी शामिल हैं। रजिस्ट्री तहसीलदार, एसडीएम व डीआरओ की निगरानी में होती हैं। ये तीनों अधिकारी ही आवेदन को अंतिम स्वीकृति देते हैं। उसके बाद रजिस्ट्री बनती है।
इस समय जिले के गांवों व शहर में जमाबंदी में हजारों की संख्या में त्रुटियां भी हैं। किसी का रकबा कम पड़ रहा है तो किसी का ज्यादा दिखाया गया है। किसी जमाबंदी में मूल मालिक का नाम ही नहीं है। जमीन की रजिस्ट्री करवाते समय इस त्रुटि का पता चल पाता है। त्रुटि दूर करने के लिए पटवारी से बदर लिखवाकर तहसीलदार के हस्ताक्षर होने पर मूल रिकार्ड में संशोधन करना पड़ता है, तब जाकर त्रुटि दूर हो पाती है।
अब जमाबंदी में खामियां दूर करने व नए मालिकों का नाम जोड़ने का काम जारी है। अब तक 26 गांवों की नई जमाबंदी बनकर तैयार हो चुकी है। नौ गांवों की जमाबंदी का काम 25 दिन में पूरा होने जा रहा है।
विदित रहे हर साल किसी न किसी गांव की नई जमाबंदी तैयार करनी पड़ती है क्योंकि उस गांव की चार वर्ष की समयावधि पूरी हो चुकी होती है।