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Fatehabad News: खतरे में बच्चों की मुस्कान...फास्ट फूड और चॉकलेट दे रहे दर्द
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बच्चे के दांत की जांत करते डॉ विक्रम पंघाल और डॉ बंसी लाल बेनिवाल
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हिसार। 3 से 8 साल के बच्चों में दांतों में कीड़े लगने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जंक फूड और चॉकलेट का अधिक सेवन बच्चों के दांतों की को कमजोर कर रहा है। दांत जल्दी सड़ने लगते हैं और मसूड़ों की समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों की प्राकृतिक मुस्कान प्रभावित हो रही है और उन्हें दांत दर्द झेलना पड़ रहा है।
जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 20 बच्चे दांतों के दर्द और अन्य समस्याओं के लिए आते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में ओरल हेल्थ की जागरूकता की कमी और नियमित रूप से ब्रश न करने की आदत इसके मुख्य कारण हैं।
जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. विक्रम पंघाल, डॉ. बंसी लाल बेनिवाल और डॉ. वंदना ने बताया कि बच्चों में दांतों की सड़न, मसूड़ों में सूजन, दूध के दांत टूट जाने के बाद पक्के दांत न आना और दांतों में कीड़ा जैसी समस्याएं आम हो रही हैं। दांत दर्द होने पर बच्चे ठीक से खाना नहीं खा पाते। इसका असर पोषण पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने के कारण बच्चा चिड़चिड़ापन का शिकार हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के दूध के दांत आम तौर पर 6 से 10 महीने की उम्र में निकलने लगते हैं और तीन साल तक पूरे 20 दांत आ जाते हैं। पक्के दांत 6 से 7 साल की उम्र से आने शुरू होते हैं और 12-13 साल तक दूध के दांत गिरकर स्थायी दांतों की जगह ले लेते हैं। ऐसे में अभिभावक बच्चों को सही तरीके से ब्रश करने की आदत डलवाएं, मीठा और जंक फूड कम खिलाएं, और हर तीन महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराएं। इससे दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं से बचाव संभव है।
एक माह तक चलाया जाएगा जागरूकता कार्यक्रम :
हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को दांत और मुंह की सेहत के प्रति जागरूक करना है। इस बार का थीम है-ए हैप्पी माउथ इज ए हैप्पी लाइफ। जिला नागरिक अस्पताल में 20 मार्च से एक माह तक कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस दौरान शिविर लगाकर मरीजों की जांच की जाएगी और एक सेल्फी पॉइंट बनाया जाएगा ताकि लोग फोटो खींचकर ओरल हेल्थ के महत्व को साझा कर सकें।
ये आ रहीं समस्याएं :
-दांतों में कीड़ा लगना।
-मसूड़ों से खून आना।
-पायरिया (मसूड़ों में सूजन और दर्द)।
-मुंह की बदबू।
-दांतों का पीला पड़ना।
इन बातों को रखें ध्यान :
-दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें।
-फ्लॉस और माउथवॉश का उपयोग करें।
-जंक फूड और मीठे खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
-हर तीन महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराएं।
अभिभावकों ने बताईं समस्याएं
केस 1: सात साल के बच्चे के माता-पिता ने बताया कि उनके बेटे के दांत पिछले चार महीने से टूटे हुए हैं और नए दांत नहीं आ रहे। वे डॉक्टर से सलाह लेने आए।
केस 2: एक अन्य अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा चॉकलेट अधिक खाता है जिससे उसके दो दांतों में कीड़ा लग गया है। दर्द के कारण वह खाना भी नहीं खा पा रहा। डॉक्टर ने दवा के साथ खान-पान में सावधानी रखने की सलाह दी है।
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जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना करीब 20 बच्चे दांतों के दर्द और अन्य समस्याओं के लिए आते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों में ओरल हेल्थ की जागरूकता की कमी और नियमित रूप से ब्रश न करने की आदत इसके मुख्य कारण हैं।
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जिला नागरिक अस्पताल में कार्यरत डॉ. विक्रम पंघाल, डॉ. बंसी लाल बेनिवाल और डॉ. वंदना ने बताया कि बच्चों में दांतों की सड़न, मसूड़ों में सूजन, दूध के दांत टूट जाने के बाद पक्के दांत न आना और दांतों में कीड़ा जैसी समस्याएं आम हो रही हैं। दांत दर्द होने पर बच्चे ठीक से खाना नहीं खा पाते। इसका असर पोषण पर पड़ता है। नींद पूरी नहीं होने के कारण बच्चा चिड़चिड़ापन का शिकार हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के दूध के दांत आम तौर पर 6 से 10 महीने की उम्र में निकलने लगते हैं और तीन साल तक पूरे 20 दांत आ जाते हैं। पक्के दांत 6 से 7 साल की उम्र से आने शुरू होते हैं और 12-13 साल तक दूध के दांत गिरकर स्थायी दांतों की जगह ले लेते हैं। ऐसे में अभिभावक बच्चों को सही तरीके से ब्रश करने की आदत डलवाएं, मीठा और जंक फूड कम खिलाएं, और हर तीन महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराएं। इससे दांतों की सड़न और अन्य समस्याओं से बचाव संभव है।
एक माह तक चलाया जाएगा जागरूकता कार्यक्रम :
हर साल 20 मार्च को वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को दांत और मुंह की सेहत के प्रति जागरूक करना है। इस बार का थीम है-ए हैप्पी माउथ इज ए हैप्पी लाइफ। जिला नागरिक अस्पताल में 20 मार्च से एक माह तक कार्यक्रम चलाया जाएगा। इस दौरान शिविर लगाकर मरीजों की जांच की जाएगी और एक सेल्फी पॉइंट बनाया जाएगा ताकि लोग फोटो खींचकर ओरल हेल्थ के महत्व को साझा कर सकें।
ये आ रहीं समस्याएं :
-दांतों में कीड़ा लगना।
-मसूड़ों से खून आना।
-पायरिया (मसूड़ों में सूजन और दर्द)।
-मुंह की बदबू।
-दांतों का पीला पड़ना।
इन बातों को रखें ध्यान :
-दिन में कम से कम दो बार ब्रश करें।
-फ्लॉस और माउथवॉश का उपयोग करें।
-जंक फूड और मीठे खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
-हर तीन महीने में दंत चिकित्सक से जांच कराएं।
अभिभावकों ने बताईं समस्याएं
केस 1: सात साल के बच्चे के माता-पिता ने बताया कि उनके बेटे के दांत पिछले चार महीने से टूटे हुए हैं और नए दांत नहीं आ रहे। वे डॉक्टर से सलाह लेने आए।
केस 2: एक अन्य अभिभावक ने बताया कि उनका बेटा चॉकलेट अधिक खाता है जिससे उसके दो दांतों में कीड़ा लग गया है। दर्द के कारण वह खाना भी नहीं खा पा रहा। डॉक्टर ने दवा के साथ खान-पान में सावधानी रखने की सलाह दी है।