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Fatehabad News: होली के उल्लास में न भूलें त्वचा का ध्यान
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शहर के नागरिक अस्पताल में मरीजों को जांच करती त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीत कौर। संवाद
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फतेहाबाद। रंगों का त्योहार होली खुशियों और उमंग का प्रतीक है लेकिन इस दौरान इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग हमारी त्वचा के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। होली के पर्व पर त्वचा की सुरक्षा और देखभाल को लेकर प्रसिद्ध त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीत कौर ने विशेष परामर्श जारी किया है।
डॉ. कौर के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी बरत कर अपनी त्वचा को सुरक्षित रख सकते हैं और त्योहार को मना सकते हैं। होली खेलने से पहले त्वचा के बचाव के लिए तैयारी बेहद जरूरी है। रंगों के सीधे संपर्क से बचने के लिए त्वचा को मॉइस्चराइज रखना सबसे जरूरी कदम है। होली खेलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे और पूरे शरीर पर नारियल-जैतून का तेल या किसी अच्छी गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइजर की एक मोटी परत लगाएं।
तेल त्वचा पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिससे रंग त्वचा के छिद्रों के अंदर नहीं जा पाते और बाद में उन्हें साफ करना भी आसान हो जाता है। डॉ. प्रीत कौर का कहना है कि सावधानी ही सुरक्षा है। यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर किसी भी तरह की जलन या दाने दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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पक्के रंगों को प्रयोग करने से बचें
इस बार पक्के रंगों के बजाय सूखे गुलाल का प्रयोग करें। बाजार में मिलने वाले पक्के रंगों में अक्सर इंजन ऑयल, कांच का चूरा और हानिकारक केमिकल मिले होते हैं, जो त्वचा पर जलन, खुजली और रेशैज पैदा कर सकते हैं। कोशिश करें कि केवल उच्च गुणवत्ता वाले और हर्बल रंगों का ही चुनाव करें। यदि संभव हो तो घर पर बने प्राकृतिक रंगों (जैसे हल्दी, पलाश के फूल या चंदन) का उपयोग करें।
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एलर्जी वाले मरीज रहें सावधान
जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें पहले से त्वचा एलर्जी, एक्जिमा या सोरायसिस जैसी समस्या है, उन्हें रंगों से परहेज करना चाहिए। डॉ. प्रीत कौर के अनुसार, ऐसे व्यक्तियों के लिए सूखे गुलाल का संपर्क भी हानिकारक हो सकता है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे रंगों के बजाय तिलक होली खेलें और पूरी बाजू के सूती कपड़े पहनें ताकि त्वचा का कम से कम हिस्सा रंगों के संपर्क में आए। रंग निकलने के बाद त्वचा पर भारी मात्रा में मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल लगाएं ताकि नमी बनी रहे।
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डॉ. कौर के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी बरत कर अपनी त्वचा को सुरक्षित रख सकते हैं और त्योहार को मना सकते हैं। होली खेलने से पहले त्वचा के बचाव के लिए तैयारी बेहद जरूरी है। रंगों के सीधे संपर्क से बचने के लिए त्वचा को मॉइस्चराइज रखना सबसे जरूरी कदम है। होली खेलने से कम से कम 20 मिनट पहले चेहरे और पूरे शरीर पर नारियल-जैतून का तेल या किसी अच्छी गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइजर की एक मोटी परत लगाएं।
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तेल त्वचा पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिससे रंग त्वचा के छिद्रों के अंदर नहीं जा पाते और बाद में उन्हें साफ करना भी आसान हो जाता है। डॉ. प्रीत कौर का कहना है कि सावधानी ही सुरक्षा है। यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर किसी भी तरह की जलन या दाने दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें।
पक्के रंगों को प्रयोग करने से बचें
इस बार पक्के रंगों के बजाय सूखे गुलाल का प्रयोग करें। बाजार में मिलने वाले पक्के रंगों में अक्सर इंजन ऑयल, कांच का चूरा और हानिकारक केमिकल मिले होते हैं, जो त्वचा पर जलन, खुजली और रेशैज पैदा कर सकते हैं। कोशिश करें कि केवल उच्च गुणवत्ता वाले और हर्बल रंगों का ही चुनाव करें। यदि संभव हो तो घर पर बने प्राकृतिक रंगों (जैसे हल्दी, पलाश के फूल या चंदन) का उपयोग करें।
एलर्जी वाले मरीज रहें सावधान
जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें पहले से त्वचा एलर्जी, एक्जिमा या सोरायसिस जैसी समस्या है, उन्हें रंगों से परहेज करना चाहिए। डॉ. प्रीत कौर के अनुसार, ऐसे व्यक्तियों के लिए सूखे गुलाल का संपर्क भी हानिकारक हो सकता है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे रंगों के बजाय तिलक होली खेलें और पूरी बाजू के सूती कपड़े पहनें ताकि त्वचा का कम से कम हिस्सा रंगों के संपर्क में आए। रंग निकलने के बाद त्वचा पर भारी मात्रा में मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल लगाएं ताकि नमी बनी रहे।