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Fatehabad News: पिछले पांच साल की तुलना में 38% कम बारिश, सूखने की कगार पर धान
Sat, 01 Aug 2026 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:54 PM IST
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फतेहाबाद। किसान के एक खेत में बारिश न होने के कारण सूखती धान की फसल। संवाद
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फतेहाबाद। जिले में इस साल मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले पांच सालों के आंकड़ों की तुलना में इस बार अब तक औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। जिले में सालाना औसतन बारिश 395 एमएम है जबकि इस बार अभी तक 298 एमएम बारिश हुई है। साल 2021 के मुकाबले इस सीजन में करीब 38 फीसदी कम बारिश हुई हैं।
वर्ष 2025 की तुलना में भी जुलाई महीने में ही 37 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं जिससे कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है। जिला राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में पिछले 6 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई थी। उस दौरान समय पर और पर्याप्त बारिश होने से फसलों को काफी लाभ मिला था।
इसके विपरीत इस वर्ष मानसून की चाल सुस्त रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार गिरते बारिश के आंकड़े और बढ़ता तापमान फसलों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं। बारिश ने होने से भूमिगत जलस्तर पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
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सिंचाई संकट और धान के रकबे में गिरावट
फसलों को पर्याप्त पानी न मिलने के कारण धान की रोपाई पर असर पड़ रहा है। इससे धान के कुल रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। जिन किसानों ने रोपाई कर भी ली है वे अब फसलों को बचाने के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल और नहरी पानी पर निर्भर हैं। सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने से उनका कृषि बजट बिगड़ रहा है और उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। बारिश की भारी कमी के कारण धान के अलावा कपास, बाजरा और ग्वार जैसी अन्य खरीफ फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। खेतों में नमी खत्म होने से पौधों का विकास रुक गया है।
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जिले में हुई बारिश के आंकड़े (आंकड़े 21 जुलाई तक )
खंड-2020-2021-2022-2023-2024-2025-2026
फतेहाबाद-20-323-223-81-148-110-20-29
टोहाना-217-355-301-135-93-90-58-67
रतिया-174-110-189-108-97-70-12-27
भट्टूकलां-84-174-273-265-173-60-08-62
भूना-184-169-146-173-51-55-90-40-45
कुलां-190-290-244-89-75-80-15-19
जाखल-186-301-315-47-79-130-60-49
कुल-1055-1722-1563-1174-808-335-298
:: बारिश की कमी का असर फसलों पर दिखाई दे रहा है। हालांकि जिले में सिंचाई के स्रोत है, लेकिन सिंचाई से बारिश की पूर्ति पूरी नहीं का सकती। साल 2021 में अच्छी बारिश होने से फसलों की पैदावार भी बेहतर हुई थी।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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बारिश की कमी से समैन क्षेत्र में सूखने लगी धान
समैन। टोहाना उपमंडल के कई गांवों में बारिश की कमी के कारण धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि अगले दस दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
गांव समैन, कन्हड़ी, नांगली, नांगला, गाजुवाला, पिरथला, पारता, ललोदा, हांसेवाला, कमालवाला, बलियावाला, डांगरा और बिढाई खेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल सूखने लगी हैं। गांव समैन, कन्हड़ी और गाजुवाला के किसान सतपाल सिंह, दर्शन सिंह, सुरेंद्र सिंह, काला, प्रदीप, सतीश और ओमप्रकाश ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान फसल की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
समैन, कन्हड़ी, नांगली, गाजुवाला, भीमेवाला और चितैन में धान की फसल पर सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। किसानों ने बताया कि धान की रोपाई के बाद नियमित सिंचाई जरूरी होती है लेकिन मानसून की बारिश नहीं होने और नहरी पानी की उपलब्धता कम होने से फसल प्रभावित हो रही है। कृषि विभाग टोहाना के एसडीओ मुकेश महला ने बताया कि धान की फसल के लिए इस समय अच्छी बारिश बेहद जरूरी है। कई गांवों में फसल खराब होने की जानकारी मिली है।
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वर्ष 2025 की तुलना में भी जुलाई महीने में ही 37 मिलीमीटर कम बारिश हुई है। बारिश न होने के कारण खेतों में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं जिससे कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है। जिला राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में पिछले 6 वर्षों की तुलना में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई थी। उस दौरान समय पर और पर्याप्त बारिश होने से फसलों को काफी लाभ मिला था।
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इसके विपरीत इस वर्ष मानसून की चाल सुस्त रहने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार गिरते बारिश के आंकड़े और बढ़ता तापमान फसलों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं। बारिश ने होने से भूमिगत जलस्तर पर भी प्रभाव पड़ रहा है।
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सिंचाई संकट और धान के रकबे में गिरावट
फसलों को पर्याप्त पानी न मिलने के कारण धान की रोपाई पर असर पड़ रहा है। इससे धान के कुल रकबे में गिरावट दर्ज की गई है। जिन किसानों ने रोपाई कर भी ली है वे अब फसलों को बचाने के लिए पूरी तरह ट्यूबवेल और नहरी पानी पर निर्भर हैं। सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने से उनका कृषि बजट बिगड़ रहा है और उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है। बारिश की भारी कमी के कारण धान के अलावा कपास, बाजरा और ग्वार जैसी अन्य खरीफ फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। खेतों में नमी खत्म होने से पौधों का विकास रुक गया है।
जिले में हुई बारिश के आंकड़े (आंकड़े 21 जुलाई तक )
खंड-2020-2021-2022-2023-2024-2025-2026
फतेहाबाद-20-323-223-81-148-110-20-29
टोहाना-217-355-301-135-93-90-58-67
रतिया-174-110-189-108-97-70-12-27
भट्टूकलां-84-174-273-265-173-60-08-62
भूना-184-169-146-173-51-55-90-40-45
कुलां-190-290-244-89-75-80-15-19
जाखल-186-301-315-47-79-130-60-49
कुल-1055-1722-1563-1174-808-335-298
:: बारिश की कमी का असर फसलों पर दिखाई दे रहा है। हालांकि जिले में सिंचाई के स्रोत है, लेकिन सिंचाई से बारिश की पूर्ति पूरी नहीं का सकती। साल 2021 में अच्छी बारिश होने से फसलों की पैदावार भी बेहतर हुई थी।
- डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।
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बारिश की कमी से समैन क्षेत्र में सूखने लगी धान
समैन। टोहाना उपमंडल के कई गांवों में बारिश की कमी के कारण धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। किसानों का कहना है कि अगले दस दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
गांव समैन, कन्हड़ी, नांगली, नांगला, गाजुवाला, पिरथला, पारता, ललोदा, हांसेवाला, कमालवाला, बलियावाला, डांगरा और बिढाई खेड़ा सहित आसपास के क्षेत्रों में धान की फसल सूखने लगी हैं। गांव समैन, कन्हड़ी और गाजुवाला के किसान सतपाल सिंह, दर्शन सिंह, सुरेंद्र सिंह, काला, प्रदीप, सतीश और ओमप्रकाश ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान फसल की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
समैन, कन्हड़ी, नांगली, गाजुवाला, भीमेवाला और चितैन में धान की फसल पर सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है। किसानों ने बताया कि धान की रोपाई के बाद नियमित सिंचाई जरूरी होती है लेकिन मानसून की बारिश नहीं होने और नहरी पानी की उपलब्धता कम होने से फसल प्रभावित हो रही है। कृषि विभाग टोहाना के एसडीओ मुकेश महला ने बताया कि धान की फसल के लिए इस समय अच्छी बारिश बेहद जरूरी है। कई गांवों में फसल खराब होने की जानकारी मिली है।