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Fatehabad News: 40% उपस्थिति का कोरम पूरा न होने पर जिले की 64 ग्राम पंचायतों की बैठकें स्थगित

संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Sat, 24 Jan 2026 11:10 PM IST
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Meetings of 64 Gram Panchayats in the district were postponed due to lack of 40% attendance quorum
गांव समैन में ग्राम पंचायत की ओर आयोजित की गई ग्राम सभा बैठक में शामिल पंचायत सदस्य। स्रोत: ग्र
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फतेहाबाद। जिले के ग्रामीण विकास के रोडमैप को तैयार करने के लिए बुलाई गई ग्राम सभा की बैठकें कोरम के अभाव में सिरे नहीं चढ़ सकीं। जिले के चिह्नित सभी 64 गांवों में शनिवार को ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन होना था, लेकिन किसी भी पंचायत में निर्धारित संख्या में मतदाता नहीं जुटे। नतीजतन, प्रशासन को ये सभी बैठकें स्थगित करनी पड़ी हैं।
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पंचायती राज नियमों के अनुसार, ग्राम सभा की पहली बैठक की कार्यवाही शुरू करने के लिए कुल मतदाताओं का कम से कम 40 फीसदी उपस्थिति होना अनिवार्य है। शनिवार को हुई कवायद में स्थिति यह रही कि किसी भी गांव में 40 फीसदी की उपस्थिति का आंकड़ा पार नहीं हो सका। कोरम पूरा न होने के कारण विकास कार्यों के प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी और न ही कोई प्रस्ताव पास किया जा सका। यदि पहली बैठक कोरम के अभाव में स्थगित होती है, तो अगली बैठक के लिए कोरम की यह बाध्यता शिथिल हो जाती है, ताकि विकास कार्य बाधित न हो।
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समैन में कोरम पूरा न होने के कारण नहीं हो पाई ग्राम सभा की बैठक

गांव समैन में 40 फीसदी उपस्थिति का कोरम पूरा न होने के कारण ग्रामसभा की बैठक स्थगित कर दी गई। ग्राम सचिव जोगी राम ने बताया कि बैठक में पंचायत सदस्य व कुछ ग्रामीण ही शामिल हुए। ग्राम सचिव के अनुसार ग्राम सभा की अगली बैठक 31 जनवरी को रखी गई है। गांव समैन के अलावा नांगली, रत्ताखेड़ा, खनौरा में भी ग्राम सभा की बैठक रखी गई थी लेकिन वहां पर भी कोरम पूरा न होने कारण बैठकें स्थगित कर दी गईं।

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जल्द होगी अगली बैठक

जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी अनूप सिंह ने बताया कि अब इन सभी 64 गांवों में अगले कुछ दिनों दोबारा ग्राम सभा की बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रशासन ने सरपंचों और ग्राम सचिवों को निर्देश दिए हैं कि वे मुनादी और अन्य माध्यमों से ग्रामीणों को जागरूक करें ताकि अगली बैठक में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इन बैठकों में गांवों के विकास के लिए वार्षिक कार्ययोजना मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों और अन्य जनहित की योजनाओं पर मुहर लगनी है। यदि ग्रामीण अपनी भागीदारी नहीं बढ़ाते हैं, तो बजट आवंटन और विकास कार्यों की गति पर इसका सीधा असर पड़ता है।
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