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रूस में गांव कुम्हारिया के दूसरे युवक की भी मौत: यूक्रेन युद्व में आर्मी में धकेला, साल 2025 में गया था विदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद (हरियाणा)
Published by: Naveen
Updated Wed, 29 Apr 2026 10:45 AM IST
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सार
विजय पूनिया जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां उसे नौकरी का झांसा देकर एजेंटों ने अपने जाल में फंसा लिया और जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन युद्व में धकेल दिया गया था।
मृतक विजय
- फोटो : संवाद
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विस्तार
रूस में सपने पूरे करने के लिए गए गांव कुम्हारिया के दूसरे युवक की भी मौत हो गई है। 25 दिनों बाद रूस दूसरे युवक विजय पूनिया की मौत की सूचना आई है। सूचना के बाद गांव शोक का माहौल है और परिवार शव लेने के लिए दिल्ली गया हुआ है। दोपहर बाद तक शव गांव में पहुंच सकता है। इससे पहले गांव के युवक अंकित जांगड़ा की भी मौत हो गई थी।
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अंकित और विजय दोनों की आखिरी बार बात 13 सितंबर को हुई थी और उस समय उन्होंने रूसी सेना में भर्ती करके यूक्रेन युद्व में जबरदस्ती धकेलने की बात कही थी। इसके बाद से परिवार लगातार दोनों के भारत वापसी के लिए सरकार से गुहार लगा रहा था। विजय पूनिया के पिता का कुछ साल पहले निधन हो चुका है। परिवार में सिर्फ मां माया और छोटा भाई सुनील है। सुनील फिलहाल पढ़ रहा है।
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करीब दो माह पहले ही मंगवाया था डीएनए
विजय पूनिया जुलाई 2025 में बिजनेस वीजा पर रूस गया था। वहां उसे नौकरी का झांसा देकर एजेंटों ने अपने जाल में फंसा लिया और जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया। इसके बाद उसे यूक्रेन युद्व में धकेल दिया गया था। विजय का करीब दो माह पहले ही डीएनए मंगवाया गया था।
आखिरी बार बोले थे हमें बचा लो :
विजय के साथ गांव का ही अंकित जांगड़ा (23) भी इसी तरह ठगी का शिकार हुआ था। अंकित फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर रूस पहुंचा था । 13 सितंबर 2025 को उनका आखिरी वाइस मैसेज आया था कि सुबह हमें युद्ध में लेकर जा रहे हैं, बचा सकते हो तो बचा लो। इसके बाद दोनों से संपर्क टूट गया था। 4 अप्रैल को अंकित का पार्थिव शरीर गांव लाया गया था।
विजय पूनिया जुलाई 2024 में स्टडी वीजा पर गया था। वीजा एक्सटेंड नहीं हुआ, तो एक महीने बाद वापस आ गया था। फिर अक्टूबर 2024 में दोबारा गया। 6 महीने रहकर मार्च के आखिर में वापस गांव आया। इसके बाद 15 जुलाई 2025 को विजय एक साल का बिजनेस वीजा लगवाकर रशिया गया। परिवार ने लोन लेकर उसे विदेश भेजा था।

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