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Hisar News: बिखरा रहा उम्मीदों का मौसम...बूंदों की आस में सूखीं फसलें
Sun, 02 Aug 2026 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:58 AM IST
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हांसी के ढाणा खुर्द में सिंचाई या बारिश के अभाव में सूख रही फसल। स्रोत : ग्रामीण
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हांसी। मानसून की बेरुखी ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं। पर्याप्त बारिश ने होने से जिले के खेतों में खड़ी फसलों की सांसें उखड़ने लगी हैं। विशेषकर धान की फसल पीली पड़कर दम तोड़ रही है। फसल सूखने से पसरी मायूसी किसानों की सुनहरी उम्मीदों के बिखरने की कहानी कह रही है।
फसलों में नमी बनाए रखने के लिए किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान जैसी फसलों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी है।
यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। बारिश के इंतजार में किसानों की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द मानसून सक्रिय होगा और फसलों को राहत मिलेगी।
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यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बारिश नहीं होने के कारण किसानों को अब ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ रहा है।- शमशेर, किसान, ढाणा खुर्द।
बारिश नहीं होने से हमारी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। अब पूरी उम्मीद बारिश पर ही टिकी हुई है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान होगा। ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे डीजल और बिजली का खर्च काफी बढ़ जाएगा। ऐसे में खेती की लागत भी बढ़ेगी और किसान आर्थिक परेशानी में आ जाएंगे।- सत्यनारायण, किसान, ढाणा खुर्द।
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इस समय धान के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हांसी का इलाका धान का है, यहां धान की रोपाई सबसे ज्यादा होती है। धान पीले पड़ने लग रहे हैं, बहुत जगह ऐसी है जहां धान लगी है लेकिन वहां जमीन में पानी की कमी के कारण दरार है। इस समय बारिश की सख्त जरूरत है। बारिश होगी तो किसानों को राहत मिलेगी।- डॉ. रविंद्र कुमार, एसडीओ, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
1.46 लाख एकड़ में हुई है धान की बिजाई
हांसी, नारनौंद और बास खंड में कुल 229944 एकड़ क्षेत्र में बिजाई की गई है। धान का रकबा ज्यादा है। धान की कुल बिजाई 1,46, 500 एकड़ में हुई है जिसमें बासमती धान 111500 एकड़, गैर-बासमती धान 20000 एकड़ और डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) 15000 एकड़ में लगाया गया है। हांसी में 59500 एकड़ में धान की बिजाई हुई है। बीटी कपास 53507 एकड़ में बोई गई है। देसी हाइब्रिड कपास 3232 एकड़ में बोई गई है। इसके अलावा चारा 14500 एकड़, बाजरा 10090 एकड़ व गन्ना 2060 एकड़ में बोया गया है।
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फसलों में नमी बनाए रखने के लिए किसान ट्यूबवेल से सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान जैसी फसलों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी है।
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यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है। बारिश के इंतजार में किसानों की नजरें अब आसमान पर टिकी हैं। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द मानसून सक्रिय होगा और फसलों को राहत मिलेगी।
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यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बारिश नहीं होने के कारण किसानों को अब ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे डीजल और बिजली का खर्च बढ़ रहा है।- शमशेर, किसान, ढाणा खुर्द।
बारिश नहीं होने से हमारी फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई है। अब पूरी उम्मीद बारिश पर ही टिकी हुई है। अगर जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान होगा। ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे डीजल और बिजली का खर्च काफी बढ़ जाएगा। ऐसे में खेती की लागत भी बढ़ेगी और किसान आर्थिक परेशानी में आ जाएंगे।- सत्यनारायण, किसान, ढाणा खुर्द।
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इस समय धान के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। हांसी का इलाका धान का है, यहां धान की रोपाई सबसे ज्यादा होती है। धान पीले पड़ने लग रहे हैं, बहुत जगह ऐसी है जहां धान लगी है लेकिन वहां जमीन में पानी की कमी के कारण दरार है। इस समय बारिश की सख्त जरूरत है। बारिश होगी तो किसानों को राहत मिलेगी।- डॉ. रविंद्र कुमार, एसडीओ, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।
1.46 लाख एकड़ में हुई है धान की बिजाई
हांसी, नारनौंद और बास खंड में कुल 229944 एकड़ क्षेत्र में बिजाई की गई है। धान का रकबा ज्यादा है। धान की कुल बिजाई 1,46, 500 एकड़ में हुई है जिसमें बासमती धान 111500 एकड़, गैर-बासमती धान 20000 एकड़ और डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) 15000 एकड़ में लगाया गया है। हांसी में 59500 एकड़ में धान की बिजाई हुई है। बीटी कपास 53507 एकड़ में बोई गई है। देसी हाइब्रिड कपास 3232 एकड़ में बोई गई है। इसके अलावा चारा 14500 एकड़, बाजरा 10090 एकड़ व गन्ना 2060 एकड़ में बोया गया है।