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Hisar News: मलबे में दम न तोड़ दे स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल आने का ख्वाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Apr 2026 12:09 AM IST
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Don't let the dream of topping the Swachh Survey die in the rubble.
हिसार साऊथ बाईपास पर नगर निगम का अधूरा पड़ा सीएंडडी वेस्ट प्लांट ।
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हिसार। स्वच्छ सर्वेक्षण में अव्वल आने के लिए शहर में दीवारों से लेकर सड़कों, गलियों और पार्काें को चमकाया जा रहा है लेकिन कागजों में ही सिमटी भवन निर्माण मलबा (सीएंडडी वेस्ट) निस्तारण योजना सारी कवायद पर पानी फेर सकती है। यह योजना पांच सालों से सिरे नहीं चढ़ पाई है। शहर के बाहरी हिस्सों में खाली भूखंडों और सड़क किनारे भवन निर्माण सामग्री के मलबे के ढेर लगे हैं।
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नगर निगम ने दिसंबर 2020 में सातरोड के पास साउथ बाईपास किनारे करीब पांच एकड़ जमीन पर सीएंडडी वेस्ट प्लांट स्थापित किया था। इसका उद्घाटन तत्कालीन मेयर गौतम सरदाना ने किया। योजना यह थी कि प्लांट में आने वाले भवन निर्माण मलबे को री-साइकिल कर इंटरलॉकिंग टाइलें तैयार की जाएंगी। इन टाइलों का उपयोग सड़क निर्माण में किया जाएगा। अमर उजाला संवाददाता सोमवार को प्लांट की साइट पर पहुंचा तो देखा तो प्रवेश द्वार पर लगा पहचान बोर्ड गायब है। प्लांट में भवन निर्माण मलबा नाममात्र ही था और गोबर के बड़े-बड़े ढेर पड़े थे। यहां मलबा निस्तारण का काम ही नहीं हो रहा। मलबे के निपटान की कोई प्रभावी व्यवस्था न होने के कारण सड़कों, सेक्टरों और कॉलोनियों में खाली प्लाॅटों में मलबे के ढेर लग रहे हैं। साउथ बाईपास किनारे, सेक्टर 14-15, 27 और ऋषिनगर क्षेत्र में भी सड़कों व प्लॉटों के पास निर्माण सामग्री का मलबा खुले में पड़ा है।
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मलबा उठाने के लिए शुल्क है तय

नगर निगम ने मलबे के उठान के लिए शुल्क तय कर रखा है। कोई व्यक्ति निर्माण सामग्री का मलबा उठवाना चाहता है तो उसे 700 रुपये प्रति ट्रॉली के हिसाब से निगम में जमा करवाने होते हैं। इसके बाद निगम की ओर से मलबे को उठाकर सीएंडडी वेस्ट प्लांट तक पहुंचाया जाना तय है। फिलहाल यह प्रक्रिया भी कागजों तक सीमित है।

खुले में मलबा डालने से स्वच्छ सर्वेक्षण में कटते हैं अंक

भवन निर्माण सामग्री का मलबा खुले में डालने से न केवल शहर की छवि धूमिल होती है स्वच्छ सर्वेक्षण में भी अंक कटते हैं। ठोस अपशिष्ट की तरह मलबे का भी वैज्ञानिक निपटान जरूरी है तभी शहर को स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर स्थान मिल सकेगा। इस माह के दूसरे पखवाड़े में स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम का दौरा प्रस्तावित किया गया है।

निपटान के लिए भी बनेगी नई व्यवस्था

वर्तमान में शहर से प्रतिदिन 40 मीट्रिक टन मलबा उत्पन्न हो रहा है। एकत्रीकरण और उठान का रेट निर्धारित किया जा चुका है। चयनित एजेंसी मलबा एकत्र कर प्लांट तक पहुंचाएगी। निगम की फाइनेंस कमेटी से मंजूरी के बाद इस काम को शुरू कराया जाएगा। इसके लिए 2.69 करोड़ रुपये का टेंडर मंजूर किया गया है।

कचरे से बिजली तैयार की जाएगी
नगर निगम की ओर से शहर में कचरा निस्तारण के लिए भी प्लांट बनाया जाएगा। इसमें कचरे से बिजली तैयार की जाएगी। सीएम नायब सिंह सैनी ने हाल ही इस प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान की है। इस प्लांट के लिए तीन महीने में रिपोर्ट तैयार की जानी है।

सीएंडडी वेस्ट प्लांट में प्रोसेसिंग के लिए जल्द ही एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद टेंडर लगाकर एजेंसियों को आमंत्रित किया जाएगा। निगम की ओर से एजेंसी तय किए जाने के बाद टाइल निर्माण का कार्य शुरू कराया जाएगा। - नीरज कुमार, निगम आयुक्त।
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