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Hisar News: फैमिली आईडी की गड़बड़ी से मजदूर की आय दिखी तीन लाख, राशन और आयुष्मान कार्ड बंद
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बालसमंद। डिजिटल पोर्टल में गड़बड़ी का एक और मामला सामने आया है। यहां एक गरीब मजदूर की आय गलत तरीके से बढ़ाकर उसके सरकारी लाभ बंद कर दिए गए।
गांव सीसवाला निवासी वीरेंद्र मजदूरी करते हैं। कुछ माह पूर्व डिपो पर राशन लेने पहुंचे पता चला कि उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है। इसका कारण उनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये दर्ज होना बताया गया। इसी आधार पर उनका आयुष्मान कार्ड काट दिया गया। बच्चों की छात्रवृत्ति भी रोक दी गई।
सीएससी में फैमिली आईडी देखने पर पता चला कि वीरेंद्र की फैमिली आईडी में गांव के किसी दूसरे वीरेंद्र की कार और किसी तीसरे वीरेंद्र की बाइक जोड़ दी गई है। इसी वजह से उसकी आय स्वतः बढ़कर 3 लाख रुपये दर्ज हो गई। इसे सुधारने के लिए पीड़ित वीरेंद्र पिछले छह महीनों से विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
यह मामला सरकारी पोर्टल की खामियों और डेटा एंट्री में लापरवाही को उजागर करता है, जिससे जरूरतमंद लोगों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।
वीरेंद्र का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो वह कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल होते ही एडीसी विकास यादव ने क्रीड विभाग को वीरेंद्र की फैमिली आईडी जांच कर गलतियां दुरुस्त करने के आदेश दिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को सुलझाकर पीड़ित को कब तक राहत दिला पाता है।
गाड़ी बेचीं फिर भी आईडी से नहीं हट रही
इसी प्रकार सीसवाला गांव के ही विकास ने बताया कि उनके पास स्कॉर्पियो कार थी। इससे आय बढ़कर तीन लाख हो गई और सरकारी लाभ बंद हो गए। इसलिए उन्होंने पिछले वर्ष मार्च में पंजाब निवासी व्यक्ति को बेच दिया था। पंजाब के मालिक ने कार का नंबर भी बदलवा लिया। तब से वह कई बार सीएससी और एडीसी कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं। इसके बाद भी स्कॉर्पियो की मैपिंग नहीं हटाई जा रही है।
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गांव सीसवाला निवासी वीरेंद्र मजदूरी करते हैं। कुछ माह पूर्व डिपो पर राशन लेने पहुंचे पता चला कि उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है। इसका कारण उनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये दर्ज होना बताया गया। इसी आधार पर उनका आयुष्मान कार्ड काट दिया गया। बच्चों की छात्रवृत्ति भी रोक दी गई।
सीएससी में फैमिली आईडी देखने पर पता चला कि वीरेंद्र की फैमिली आईडी में गांव के किसी दूसरे वीरेंद्र की कार और किसी तीसरे वीरेंद्र की बाइक जोड़ दी गई है। इसी वजह से उसकी आय स्वतः बढ़कर 3 लाख रुपये दर्ज हो गई। इसे सुधारने के लिए पीड़ित वीरेंद्र पिछले छह महीनों से विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
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यह मामला सरकारी पोर्टल की खामियों और डेटा एंट्री में लापरवाही को उजागर करता है, जिससे जरूरतमंद लोगों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ प्रभावित हो रहा है।
वीरेंद्र का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं किया गया तो वह कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल होते ही एडीसी विकास यादव ने क्रीड विभाग को वीरेंद्र की फैमिली आईडी जांच कर गलतियां दुरुस्त करने के आदेश दिए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को सुलझाकर पीड़ित को कब तक राहत दिला पाता है।
गाड़ी बेचीं फिर भी आईडी से नहीं हट रही
इसी प्रकार सीसवाला गांव के ही विकास ने बताया कि उनके पास स्कॉर्पियो कार थी। इससे आय बढ़कर तीन लाख हो गई और सरकारी लाभ बंद हो गए। इसलिए उन्होंने पिछले वर्ष मार्च में पंजाब निवासी व्यक्ति को बेच दिया था। पंजाब के मालिक ने कार का नंबर भी बदलवा लिया। तब से वह कई बार सीएससी और एडीसी कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं। इसके बाद भी स्कॉर्पियो की मैपिंग नहीं हटाई जा रही है।