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Hisar News: गामां की चौधर...औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बना शहीदों का गांव तलवंडी रुक्का
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तलवंडी रुक्का में बना बाबा रामदेव का मंदिर।
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हिसार। जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित तलवंडी रुक्का शहीदों के गांव के रूप में विशेष पहचान रखता है। प्रथम विश्व युद्ध से लेकर चीन के साथ हुए युद्ध तक इस गांव के कई जवानों ने प्राण न्यौछावर किए हैं। शौर्य और बलिदान की यह परंपरा आज भी गांव की पहचान बनी हुई है। इतिहास के साथ-साथ तलवंडी रुक्का औद्योगिक गतिविधियों का भी केंद्र बन गया है। गांव में संचालित छह फैक्टरियों के कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है। सूर्या रोशनाई ब्रांड के संस्थापक बीडी अग्रवाल भी इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं, जिन्होंने देशभर में गांव का नाम रोशन किया।
तलवंडी रुक्का की स्थापना करीब 240 वर्ष पूर्व वर्ष 1774 में हुई थी। मोहरुराम कौशिक, मोर सिंह जाटू राजपूत, तुलाराम नाई और लोकराम यहां आकर बसे थे। ग्रामीणों के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में गांव की जमीन पर तालाबंदी का कार्य चल रहा था। उस दौरान एक अंग्रेज अधिकारी पास के गांव तलवंडी में ठहरा हुआ था। गांव के दूसरे छोर पर बसे लोगों को बुलाने के लिए उसने पत्र भेजा, जिसे उर्दू भाषा में रुक्का कहा जाता है। तभी से गांव का नाम तलवंडी रुक्का पड़ गया, जबकि जहां अंग्रेज अधिकारी ठहरा था, वह गांव तलवंडी बादशाहपुर कहलाया।
देश की आजादी और रक्षा में अहम योगदान
तलवंडी रुक्का के अनेक सपूतों ने देश की रक्षा में शहादत दी। खूबी सिंह चौहान प्रथम विश्व युद्ध, हरि सिंह राठौर द्वितीय विश्व युद्ध, रामचंद्र गुर्जर वर्ष 1946 में कश्मीर, अमृतपाल गुर्जर वर्ष 1962 के चीन युद्ध, रणजीत सिंह वर्ष 1998 और राजबीर सिंह वर्ष 1999 में शहीद हुए। ऑनरेरी कैप्टन भंवर सिंह, रिसालदार रामचंद्र, हवलदार जसवंत सिंह, हवलदार कुलवंत सिंह और नायक राम सिंह ने भी सेना में सेवाएं दीं। वर्तमान में बलजीत सिंह और मनजीत सिंह भारतीय सेना में हैं।
रोजगार व मूलभूत सुविधाएं
गांव में छह फैक्टरियां संचालित हैं, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। शिक्षा के लिए चार सरकारी और दो निजी स्कूल हैं। पेयजल की समुचित व्यवस्था के साथ पशुओं के लिए भी अलग प्रबंध किए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पशु अस्पताल है। गोशाला, सामुदायिक केंद्र और पंचायत भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी गांव में मौजूद हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है गांव
गांव में रामदेव बाबा का लगभग 150 साल पुराना मंदिर है, जिसका नवनिर्माण वर्ष 1970 में किया गया। गोगापीर का मंदिर भी करीब 150 वर्ष पुराना है। एक शिव मंदिर भी है, जिसका निर्माण वर्ष 2000 में रघुवीर सिंह भाटी ने करवाया। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की 150 साल पुरानी प्रतिमाओं वाला मंदिर भी गांव में स्थित है, जिसका नवनिर्माण वर्ष 2012 में किया गया। गांव में 100 साल से अधिक पुराने कुएं और 150 साल पुराना पेड़ भी मौजूद है, जिन्हें ग्रामीण धरोहर के रूप में सहेजकर रखे हुए हैं।
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गांव को एक छोटी काशी मानते हैं। गांव में बाबा रामदेव का प्राचीन मंदिर है। जोकि आस्था का केंद्र बना हुआ है। इन मंदिरों की देखरेख ग्रामीण अपने स्तर पर ही करते हैं। - सत्यवान मास्टर
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गांव में काफी भाईचारा है। सब मिल जुलकर प्रेम भाव से रहते हैं। गांव में सभी जातियों के लोग रहते हैं। कभी किसी को मदद की जरूरत होती है तो सभी मिलकर सहयोग करते हैं। - गोपीचंद
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गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर तलवंडी बादशाहपुर है। बताया जाता है कि वहां एक अंग्रेज अफसर वहां आया हुआ था। उसने लोगों से कहा कि साथ लगते गांव को रुक्का मारकर बुलाओ। तब ऊंचाई पर चढ़कर गांव को रुक्का मारा जाता था, जिस पर गांव का नाम तलवंडी रुक्का पड़ा। - जयप्रकाश गोयल
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गांव जिस समय बसा था, उस समय का एक मंदिर भी है। अब इस मंदिर को दोबारा से बनाया गया है। 5 साल तक इसका निर्माण कार्य चला। यहां साल में दो बार मेला लगता है। - रोशन सिंह
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यह शहीदों का गांव भी है। यहां के जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी। आज भी गांव के कई युवा सरहद पर देश की रक्षा कर रहे हैं। - गौरव सिंह
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गांव में पेयजल की काफी समस्या है। वाटर वर्क्स की नाली न बनने के कारण यह समस्या बनी हुई है। वाटर वर्क्स में बोरवेल लगा रखा है, जिससे गांव में पेयजल आपूर्ति की जाती है।
- रण सिंह चौहान
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गांव के ज्यादातर युवा ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में काम करते हैं। कई युवा अपनी कंपनी बना चुके हैं। मूलभूत सुविधाओं की कुछ कममी खल रही है। - डॉ. विजय
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तलवंडी रुक्का की स्थापना करीब 240 वर्ष पूर्व वर्ष 1774 में हुई थी। मोहरुराम कौशिक, मोर सिंह जाटू राजपूत, तुलाराम नाई और लोकराम यहां आकर बसे थे। ग्रामीणों के अनुसार अंग्रेजी शासनकाल में गांव की जमीन पर तालाबंदी का कार्य चल रहा था। उस दौरान एक अंग्रेज अधिकारी पास के गांव तलवंडी में ठहरा हुआ था। गांव के दूसरे छोर पर बसे लोगों को बुलाने के लिए उसने पत्र भेजा, जिसे उर्दू भाषा में रुक्का कहा जाता है। तभी से गांव का नाम तलवंडी रुक्का पड़ गया, जबकि जहां अंग्रेज अधिकारी ठहरा था, वह गांव तलवंडी बादशाहपुर कहलाया।
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देश की आजादी और रक्षा में अहम योगदान
तलवंडी रुक्का के अनेक सपूतों ने देश की रक्षा में शहादत दी। खूबी सिंह चौहान प्रथम विश्व युद्ध, हरि सिंह राठौर द्वितीय विश्व युद्ध, रामचंद्र गुर्जर वर्ष 1946 में कश्मीर, अमृतपाल गुर्जर वर्ष 1962 के चीन युद्ध, रणजीत सिंह वर्ष 1998 और राजबीर सिंह वर्ष 1999 में शहीद हुए। ऑनरेरी कैप्टन भंवर सिंह, रिसालदार रामचंद्र, हवलदार जसवंत सिंह, हवलदार कुलवंत सिंह और नायक राम सिंह ने भी सेना में सेवाएं दीं। वर्तमान में बलजीत सिंह और मनजीत सिंह भारतीय सेना में हैं।
रोजगार व मूलभूत सुविधाएं
गांव में छह फैक्टरियां संचालित हैं, जिससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल रहा है। शिक्षा के लिए चार सरकारी और दो निजी स्कूल हैं। पेयजल की समुचित व्यवस्था के साथ पशुओं के लिए भी अलग प्रबंध किए गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पशु अस्पताल है। गोशाला, सामुदायिक केंद्र और पंचायत भवन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी गांव में मौजूद हैं।
ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध है गांव
गांव में रामदेव बाबा का लगभग 150 साल पुराना मंदिर है, जिसका नवनिर्माण वर्ष 1970 में किया गया। गोगापीर का मंदिर भी करीब 150 वर्ष पुराना है। एक शिव मंदिर भी है, जिसका निर्माण वर्ष 2000 में रघुवीर सिंह भाटी ने करवाया। भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की 150 साल पुरानी प्रतिमाओं वाला मंदिर भी गांव में स्थित है, जिसका नवनिर्माण वर्ष 2012 में किया गया। गांव में 100 साल से अधिक पुराने कुएं और 150 साल पुराना पेड़ भी मौजूद है, जिन्हें ग्रामीण धरोहर के रूप में सहेजकर रखे हुए हैं।
गांव को एक छोटी काशी मानते हैं। गांव में बाबा रामदेव का प्राचीन मंदिर है। जोकि आस्था का केंद्र बना हुआ है। इन मंदिरों की देखरेख ग्रामीण अपने स्तर पर ही करते हैं। - सत्यवान मास्टर
गांव में काफी भाईचारा है। सब मिल जुलकर प्रेम भाव से रहते हैं। गांव में सभी जातियों के लोग रहते हैं। कभी किसी को मदद की जरूरत होती है तो सभी मिलकर सहयोग करते हैं। - गोपीचंद
गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर तलवंडी बादशाहपुर है। बताया जाता है कि वहां एक अंग्रेज अफसर वहां आया हुआ था। उसने लोगों से कहा कि साथ लगते गांव को रुक्का मारकर बुलाओ। तब ऊंचाई पर चढ़कर गांव को रुक्का मारा जाता था, जिस पर गांव का नाम तलवंडी रुक्का पड़ा। - जयप्रकाश गोयल
गांव जिस समय बसा था, उस समय का एक मंदिर भी है। अब इस मंदिर को दोबारा से बनाया गया है। 5 साल तक इसका निर्माण कार्य चला। यहां साल में दो बार मेला लगता है। - रोशन सिंह
यह शहीदों का गांव भी है। यहां के जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपनी शहादत दी। आज भी गांव के कई युवा सरहद पर देश की रक्षा कर रहे हैं। - गौरव सिंह
गांव में पेयजल की काफी समस्या है। वाटर वर्क्स की नाली न बनने के कारण यह समस्या बनी हुई है। वाटर वर्क्स में बोरवेल लगा रखा है, जिससे गांव में पेयजल आपूर्ति की जाती है।
- रण सिंह चौहान
गांव के ज्यादातर युवा ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में काम करते हैं। कई युवा अपनी कंपनी बना चुके हैं। मूलभूत सुविधाओं की कुछ कममी खल रही है। - डॉ. विजय