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Hisar News: हरियाली तीज 17 को, शिव-पार्वती की आराधना के साथ मनाया जाएगा पर्व
Mon, 13 Jul 2026 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:13 AM IST
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हिसार। सावन मास का प्रमुख पर्व हरियाली तीज इस वर्ष 17 जुलाई को श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। जिले के शिवालयों और देवी मंदिरों में भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश का विशेष शृंगार किया जाएगा।
पर्व के उपलक्ष्य में मंदिरों में भजन-कीर्तन, कथा, सामूहिक पूजा-अर्चना तथा झूला उत्सव का आयोजन होगा। विभिन्न संस्थाओं की ओर से तीज महोत्सव, तीज मिलन, मेहंदी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और झूला उत्सव आयोजित किए जाएंगे। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह शृंगार के साथ उत्साहपूर्वक पर्व मनाएंगी।
शिव मंदिर के पुजारी पंडित राकेश ने बताया कि हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण यह पर्व अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और अटूट वैवाहिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
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झूलों और लोकगीतों से मचेगी धूम :
हरियाली तीज पर विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी, जबकि अविवाहित युवतियां योग्य वर की कामना से माता पार्वती का पूजन करेंगी। पूजा में बेलपत्र, पुष्प, फल, मेहंदी, हरी चूड़ियां, शृंगार सामग्री तथा सुहाग की अन्य वस्तुएं अर्पित की जाएंगी। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने का संदेश देता है। सावन की हरियाली के बीच महिलाएं झूला झूलेंगी, लोकगीत गाएंगी और मेहंदी रचाकर इस पर्व का आनंद लेंगी।
पर्व के उपलक्ष्य में मंदिरों में भजन-कीर्तन, कथा, सामूहिक पूजा-अर्चना तथा झूला उत्सव का आयोजन होगा। विभिन्न संस्थाओं की ओर से तीज महोत्सव, तीज मिलन, मेहंदी प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और झूला उत्सव आयोजित किए जाएंगे। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और सोलह शृंगार के साथ उत्साहपूर्वक पर्व मनाएंगी।
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शिव मंदिर के पुजारी पंडित राकेश ने बताया कि हरियाली तीज भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक पर्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए 108 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण यह पर्व अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और अटूट वैवाहिक प्रेम का प्रतीक माना जाता है।
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झूलों और लोकगीतों से मचेगी धूम :
हरियाली तीज पर विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखेंगी, जबकि अविवाहित युवतियां योग्य वर की कामना से माता पार्वती का पूजन करेंगी। पूजा में बेलपत्र, पुष्प, फल, मेहंदी, हरी चूड़ियां, शृंगार सामग्री तथा सुहाग की अन्य वस्तुएं अर्पित की जाएंगी। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और दांपत्य जीवन में प्रेम बनाए रखने का संदेश देता है। सावन की हरियाली के बीच महिलाएं झूला झूलेंगी, लोकगीत गाएंगी और मेहंदी रचाकर इस पर्व का आनंद लेंगी।