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Hisar News: तकनीक के सहारे जलभराव के अभिशाप से पाया पार
Mon, 13 Jul 2026 01:34 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 13 Jul 2026 01:34 AM IST
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नारनौंद क्षेत्र के गांव राजथल में जल निकासी के लिए लगाया गया पंप और पाइपलाइन व्यवस्था। स्रोत :
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नारनौंद। जलभराव के अभिशाप से जूझते गांवों के लिए क्षेत्रों के सामने गांव राजथल ने आदर्श उदाहरण पेश किया। इस समस्या के आगे घुटने टेकने के बजाय आधुनिक तकनीक से समाधान की नई इबारत लिखी गई। यहां अब न रास्तों पर पानी ठहरता है और न ही उम्मीदें। बिजली संचालित पंपों का बटन दबाते ही पाइपलाइनों के माध्यम से कुछ ही पलों में खेतों, ड्रेन और आबादी वाले क्षेत्र से दूर बरसाती और दूषित पानी की निकासी कर ही जाती है।
बारिश के दौरान गलियां और सड़कें जलमग्न हो जाती हैं जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरपंच रेणु की पहल और सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा की सोच से तैयार इस व्यवस्था के तहत गांव में विकसित किए गए स्थायी जल निकासी तंत्र से वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या लगभग समाप्त हो गई है।
गोदारा ने बताया कि पहले बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी महीनों तक जमा रहता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह निकासी व्यवस्था तैयार की गई।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर सही योजना और इच्छाशक्ति के साथ सीमित संसाधनों में भी बड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अन्य गांव भी इस तरह की व्यवस्था अपनाकर जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
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निकासी के साथ सिंचाई में भी मिल रहा लाभ :
राजथल की यह व्यवस्था केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है। गांव से निकाले गए बरसाती और अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाता है जहां किसान इसका उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। इससे गांव जलभराव मुक्त होने के साथ किसानों को अतिरिक्त जल सुविधा भी मिल रही है। यही दोहरा लाभ इस मॉडल को प्रभावी और उपयोगी बनाता है।
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बारिश के दौरान गलियां और सड़कें जलमग्न हो जाती हैं जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरपंच रेणु की पहल और सरपंच प्रतिनिधि अनिल गोदारा की सोच से तैयार इस व्यवस्था के तहत गांव में विकसित किए गए स्थायी जल निकासी तंत्र से वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या लगभग समाप्त हो गई है।
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गोदारा ने बताया कि पहले बारिश के बाद कई स्थानों पर पानी महीनों तक जमा रहता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह निकासी व्यवस्था तैयार की गई।
उन्होंने कहा कि स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर सही योजना और इच्छाशक्ति के साथ सीमित संसाधनों में भी बड़ी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अन्य गांव भी इस तरह की व्यवस्था अपनाकर जलभराव की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।
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निकासी के साथ सिंचाई में भी मिल रहा लाभ :
राजथल की यह व्यवस्था केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है। गांव से निकाले गए बरसाती और अतिरिक्त पानी को पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाता है जहां किसान इसका उपयोग सिंचाई के लिए करते हैं। इससे गांव जलभराव मुक्त होने के साथ किसानों को अतिरिक्त जल सुविधा भी मिल रही है। यही दोहरा लाभ इस मॉडल को प्रभावी और उपयोगी बनाता है।