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Hisar News: लाॅरेंस गैंग के संपर्क में आकर कैसे बन गए शूटर...परिजनों को भनक तक नहीं
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हिसार। हांसी के जिम संचालक कपिल रेढ़ू हत्याकांड में वांछित और पुलिस मुठभेड़ में मारे गए टिब्बा दानाशेर निवासी प्रवेश और जाखोद खेड़ा निवासी हिमांशु का वारदात के बाद से कोई अता-पता नहीं था। परिजनों को भी नहीं पता कि दोनों कैसे अपराध की दुनिया में पहुंच गए।
दोनों के मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना पर परिजन शव लाने बहादुरगढ़ चले गए। हालांकि देर रात तक शव गांव में नहीं पहुंंचे थे। प्रवेश के ममेरे भाई विशाल ने बताया कि वह दसवीं पास था। इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ समय तक बिस्किट बनाने वाली फैक्टरी में काम किया। उसके पिता जयप्रकाश सब्जी की रेहड़ी लगाते हैं और मां सुनीता मजदूरी करती हैं। प्रवेश तीन बड़ी बहनों का इकलौता भाई था।
विशाल ने बताया कि कुछ समय पहले प्रवेश के पिता गंभीर रूप से झुलस गए थे जिससे उनका काम बंद हो गया था। अब स्वस्थ होने के बाद उन्होंने फिर से सब्जी बेचनी शुरू की है। परिवार मूल रूप से मिर्जापुर गांव का रहने वाला है लेकिन पिछले करीब 40 वर्षों से हिसार के टिब्बा दानाशेर में रह रहा है।
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विशाल ने बताया कि प्रवेश एक बार मामूली मारपीट के मामले में जेल गया था लेकिन यकीन नहीं हो रहा कि वह जिम संचालक की हत्या में शामिल हो सकता है। उसके पिता की 10 जून को प्रवेश से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद से परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं था।
हालांकि वारदात के एक-दो दिन बाद पुलिस घर पहुंची और बताया कि हत्या के मामले में प्रवेश का नाम सामने आया है। परिजनों से कहा कि वे उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहें। रविवार सुबह एचटीएम थाने से सूचना मिली कि प्रवेश पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है। इसके बाद परिवार के सदस्य बहादुरगढ़ रवाना हो गए। देर रात तक शव घर नहीं पहुंचे थे।
दोनों के मुठभेड़ में मारे जाने की सूचना पर परिजन शव लाने बहादुरगढ़ चले गए। हालांकि देर रात तक शव गांव में नहीं पहुंंचे थे। प्रवेश के ममेरे भाई विशाल ने बताया कि वह दसवीं पास था। इसके बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी और कुछ समय तक बिस्किट बनाने वाली फैक्टरी में काम किया। उसके पिता जयप्रकाश सब्जी की रेहड़ी लगाते हैं और मां सुनीता मजदूरी करती हैं। प्रवेश तीन बड़ी बहनों का इकलौता भाई था।
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विशाल ने बताया कि कुछ समय पहले प्रवेश के पिता गंभीर रूप से झुलस गए थे जिससे उनका काम बंद हो गया था। अब स्वस्थ होने के बाद उन्होंने फिर से सब्जी बेचनी शुरू की है। परिवार मूल रूप से मिर्जापुर गांव का रहने वाला है लेकिन पिछले करीब 40 वर्षों से हिसार के टिब्बा दानाशेर में रह रहा है।
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विशाल ने बताया कि प्रवेश एक बार मामूली मारपीट के मामले में जेल गया था लेकिन यकीन नहीं हो रहा कि वह जिम संचालक की हत्या में शामिल हो सकता है। उसके पिता की 10 जून को प्रवेश से आखिरी बार बात हुई थी। इसके बाद से परिवार से उसका कोई संपर्क नहीं था।
हालांकि वारदात के एक-दो दिन बाद पुलिस घर पहुंची और बताया कि हत्या के मामले में प्रवेश का नाम सामने आया है। परिजनों से कहा कि वे उसे आत्मसमर्पण करने के लिए कहें। रविवार सुबह एचटीएम थाने से सूचना मिली कि प्रवेश पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है। इसके बाद परिवार के सदस्य बहादुरगढ़ रवाना हो गए। देर रात तक शव घर नहीं पहुंचे थे।