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Hisar News: स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार... नागरिक अस्पताल में बेड क्षमता होगी 300, नए बजट से ठीक पहले बेड बढ़ाने की घोषणा को दी सैद्धांतिक मंजूरी
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हिसार। जिला नागरिक अस्पताल की बेड क्षमता अब 300 की जाएगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पिछले बजट में तीन घोषणाएं की थीं, जिनमें से एक घोषणा को नए बजट से ठीक पहले सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में विस्तार से कार्य योजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषणा की थी कि जिला नागरिक अस्पताल में बेड संख्या 200 से बढ़ाकर 300 की जाएगी। साथ ही, अस्पताल में एमआरआई की सुविधा और क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया था। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पताल में 200 बेड की क्षमता है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण एक ही बेड पर दो मरीजों को इलाज दिया जाता है। इससे न केवल मरीजों को परेशानी होती है, बल्कि संक्रमण फैलने की संभावना भी रहती है। बेड की संख्या बढ़ने से मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
इसके अलावा अस्पताल में एमआरआई की सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। क्रिटिकल केयर ब्लॉक की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। इन सुविधाओं का उपलब्ध होना मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
घोषणाओं के लागू होने पर अभी भी संशय
यदि अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाई जाती है और क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जाता है, तो इसके लिए नए निर्माण कार्य की आवश्यकता होगी। लेकिन जिला नागरिक अस्पताल संरक्षित स्मारक के प्रतिबंधित दायरे में आता है, जिससे यहां नए निर्माण कार्य की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ये घोषणाएं वास्तव में लागू हो सकेंगी या नहीं।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में बेड संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी। अस्पताल में इस भवन में यह सुविधा उपलब्ध करवाना मुश्किल है। पहले भी अस्पताल के विस्तार का कार्य शुरू हुआ था जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बंद करवा दिया है। अब इस संबंध में आगामी कार्रवाई पीडब्ल्यूडी बीएंडआर कार्यालय कर रहा है। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, कार्यकारी सीएमओ।
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भाजपा सरकार सिर्फ जुमलों की सरकार है। वह सिर्फ घोषणाएं करती हैं लेकिन ये घोषणाएं कभी धरातल पर लागू नहीं होती। पिछले बजट में मुख्यमंत्री ने जितनी घोषणाएं की थीं, उनमें से आज तक एक घोषणा ने धरातल पर मूर्त रूप नहीं लिया होगा। - बजरंग गर्ग, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस।
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बजट में कोई भी घोषणा होती है, उसे लागू करने में समय लगता है। इसके लिए बजट का प्रावधान करना पड़ता है। कई विभागों की मंजूरी की जरूरत होती है। इस कागजी प्रक्रिया में समय लगता है। - डॉ. कमल गुप्ता, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री।
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मुख्यमंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषणा की थी कि जिला नागरिक अस्पताल में बेड संख्या 200 से बढ़ाकर 300 की जाएगी। साथ ही, अस्पताल में एमआरआई की सुविधा और क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया था। वर्तमान में जिला नागरिक अस्पताल में 200 बेड की क्षमता है, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण एक ही बेड पर दो मरीजों को इलाज दिया जाता है। इससे न केवल मरीजों को परेशानी होती है, बल्कि संक्रमण फैलने की संभावना भी रहती है। बेड की संख्या बढ़ने से मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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इसके अलावा अस्पताल में एमआरआई की सुविधा न होने के कारण मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ता है। क्रिटिकल केयर ब्लॉक की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। इन सुविधाओं का उपलब्ध होना मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।
घोषणाओं के लागू होने पर अभी भी संशय
यदि अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ाई जाती है और क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण किया जाता है, तो इसके लिए नए निर्माण कार्य की आवश्यकता होगी। लेकिन जिला नागरिक अस्पताल संरक्षित स्मारक के प्रतिबंधित दायरे में आता है, जिससे यहां नए निर्माण कार्य की अनुमति नहीं मिलती। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ये घोषणाएं वास्तव में लागू हो सकेंगी या नहीं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट में बेड संख्या बढ़ाने की घोषणा की थी। अस्पताल में इस भवन में यह सुविधा उपलब्ध करवाना मुश्किल है। पहले भी अस्पताल के विस्तार का कार्य शुरू हुआ था जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बंद करवा दिया है। अब इस संबंध में आगामी कार्रवाई पीडब्ल्यूडी बीएंडआर कार्यालय कर रहा है। - डॉ. जितेंद्र शर्मा, कार्यकारी सीएमओ।
भाजपा सरकार सिर्फ जुमलों की सरकार है। वह सिर्फ घोषणाएं करती हैं लेकिन ये घोषणाएं कभी धरातल पर लागू नहीं होती। पिछले बजट में मुख्यमंत्री ने जितनी घोषणाएं की थीं, उनमें से आज तक एक घोषणा ने धरातल पर मूर्त रूप नहीं लिया होगा। - बजरंग गर्ग, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस।
बजट में कोई भी घोषणा होती है, उसे लागू करने में समय लगता है। इसके लिए बजट का प्रावधान करना पड़ता है। कई विभागों की मंजूरी की जरूरत होती है। इस कागजी प्रक्रिया में समय लगता है। - डॉ. कमल गुप्ता, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री।