{"_id":"69bc4675f00fa1d02707d6c7","slug":"long-wait-for-e-buses-city-service-hinges-on-just-five-buses-hisar-news-c-21-hsr1020-832249-2026-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: ई-बसों का इंतजार लंबा, पांच बसों पर टिकी सिटी सेवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: ई-बसों का इंतजार लंबा, पांच बसों पर टिकी सिटी सेवा
विज्ञापन
ई-बस स्टैंड से बस में चढ़ते हुए यात्री।
विज्ञापन
हिसार। शहर में ई-बसों का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। पिछले 14 माह से सिटी बस सेवा केवल पांच ई-बसों के सहारे चल रही है। कई रूटों पर ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं की ओर से ई-बस सेवा शुरू करने की मांग की जा रही है। हिसार में 50 ई-बसों का अलग डिपो बनाने की योजना भी बनाई गई थी लेकिन नई बसें नहीं मिलने से यह योजना साकार नहीं हो पाई है। इसका सबसे अधिक असर स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है।
जिले में 305 गांव और सात तहसीलें हैं। हिसार डिपो के पास अभी 259 सामान्य बसें, नौ पिंक बसें और पांच ई-बसों का बेड़ा है। हिसार रोडवेज डिपो प्रदेश के सबसे बड़े डिपो में गिना जाता है। गांवों की संख्या अधिक होने के कारण यहां यात्रियों का भी भारी दबाव रहता है। रोजाना करीब 10 हजार यात्री रोडवेज बसों में सफर करते हैं। यात्रियों को आरामदायक सफर की सुविधा देने के लिए जनवरी 2025 में 5 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया था। उस समय 50 ई-बसों का अलग से डिपो बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। फिलहाल पांच बसें चल रही हैं। एसी बस और कम किराये में सुविधाजनक सफर यात्रियों को काफी पसंद आ रहा है। इसी को देखते हुए शहर में ई-बसों की संख्या 50 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद हिसार डिपो को नई ई-बसें मिलने की उम्मीद थी लेकिन अब तक बसें नहीं मिल पाई हैं।
-- -- -- --
रोजाना 12 हजार छात्र-छात्राएं करते हैं आवागमन
हिसार के शिक्षण संस्थानों में रोजाना करीब 12 हजार छात्र-छात्राएं गांवों से आवागमन करते हैं। ये विद्यार्थी रोडवेज और निजी बस सेवाओं पर ही निर्भर हैं। ग्रामीण रूटों पर रोडवेज बसों की कमी है। निजी बसों में विद्यार्थी छतों और दरवाजों के बीच लटकते हुए हिसार पहुंचते हैं। ऐसे में ई-बसों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ई-बस डिपो में फिलहाल पांच बसें हैं। इनकी संख्या बढ़ाने के लिए डिपो अधिकारियों ने मुख्यालय को प्रस्ताव भेज रखा है। प्रस्ताव मंजूर होने पर और बसें मिलने की उम्मीद है। अभी नजदीकी रूटों पर ई-बसें चलाई जा रही हैं। जरूरत के अनुसार कई रूटों पर फेरे बढ़ाए हैं।
- केशव कुमार, डीआई, ई-बस सेवा, हिसार डिपो
Trending Videos
जिले में 305 गांव और सात तहसीलें हैं। हिसार डिपो के पास अभी 259 सामान्य बसें, नौ पिंक बसें और पांच ई-बसों का बेड़ा है। हिसार रोडवेज डिपो प्रदेश के सबसे बड़े डिपो में गिना जाता है। गांवों की संख्या अधिक होने के कारण यहां यात्रियों का भी भारी दबाव रहता है। रोजाना करीब 10 हजार यात्री रोडवेज बसों में सफर करते हैं। यात्रियों को आरामदायक सफर की सुविधा देने के लिए जनवरी 2025 में 5 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया था। उस समय 50 ई-बसों का अलग से डिपो बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया। फिलहाल पांच बसें चल रही हैं। एसी बस और कम किराये में सुविधाजनक सफर यात्रियों को काफी पसंद आ रहा है। इसी को देखते हुए शहर में ई-बसों की संख्या 50 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद हिसार डिपो को नई ई-बसें मिलने की उम्मीद थी लेकिन अब तक बसें नहीं मिल पाई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
रोजाना 12 हजार छात्र-छात्राएं करते हैं आवागमन
हिसार के शिक्षण संस्थानों में रोजाना करीब 12 हजार छात्र-छात्राएं गांवों से आवागमन करते हैं। ये विद्यार्थी रोडवेज और निजी बस सेवाओं पर ही निर्भर हैं। ग्रामीण रूटों पर रोडवेज बसों की कमी है। निजी बसों में विद्यार्थी छतों और दरवाजों के बीच लटकते हुए हिसार पहुंचते हैं। ऐसे में ई-बसों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
ई-बस डिपो में फिलहाल पांच बसें हैं। इनकी संख्या बढ़ाने के लिए डिपो अधिकारियों ने मुख्यालय को प्रस्ताव भेज रखा है। प्रस्ताव मंजूर होने पर और बसें मिलने की उम्मीद है। अभी नजदीकी रूटों पर ई-बसें चलाई जा रही हैं। जरूरत के अनुसार कई रूटों पर फेरे बढ़ाए हैं।
- केशव कुमार, डीआई, ई-बस सेवा, हिसार डिपो