{"_id":"6a78dcee9e885297870831f7","slug":"lori-wale-dada-who-delighted-audiences-on-the-ramlila-stage-for-four-decades-is-no-more-hisar-news-c-21-hsr1005-927859-2026-08-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hisar News: रामलीला के मंच पर चार दशक तक गुदगुदाने वाले लोरी वाले दादा नहीं रहे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hisar News: रामलीला के मंच पर चार दशक तक गुदगुदाने वाले लोरी वाले दादा नहीं रहे
Mon, 10 Aug 2026 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
Updated Mon, 10 Aug 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिवानी मंडी। प्रसिद्ध हास्य कलाकार और श्रीराम नाटक क्लब के संस्थापक सदस्य और लोरी वाले दादा के नाम से मशहूर पंडित मांगेराम वशिष्ठ का रविवार सुबह 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से शहर और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार रविवार सुबह मुक्तिधाम आश्रम में किया गया। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शामिल होकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
पंडित मांगेराम वशिष्ठ वर्ष 1981 में श्रीराम नाटक क्लब की स्थापना के समय से इससे जुड़े थे। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक रामलीला के मंच पर हास्य पात्रों का अभिनय कर दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनकी बुलंद आवाज और सहज अभिनय के कारण लोग उन्हें ‘कॉमेडियन किंग’ के नाम से जानते थे। उनकी हास्य शैली मर्यादित और सहज थी।
उनके भाई गजानंद वशिष्ठ ने बताया कि बड़े भाई उनके लिए गुरु समान थे। उन्होंने ही उन्हें अभिनय की बारीकियां सिखाईं। मांगेराम की पत्नी दिवंगत कांता देवी ने एक बार उनसे रामलीला में कोई अन्य पात्र निभाने को कहा था। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि यही तो मेरी पहचान है।
विज्ञापन
श्रीराम नाटक क्लब के प्रधान अजीत बंसल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मांगेराम केवल हास्य कलाकार नहीं बल्कि क्लब और शहर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा थे। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रोत्साहित किया और सभी को परिवार की तरह साथ लेकर चले। उनके निधन से क्लब ने कलाकार ही नहीं बल्कि अपना मार्गदर्शक और अभिभावक भी खो दिया है।
पंडित मांगेराम के निधन पर उद्योगपति बाबूलाल जिंदल, मुंशी राम कौशिक, कृष्ण हेतमपुरिया, नवीन सूरतपुरिया, सज्जन वशिष्ठ, शिवकुमार वशिष्ठ, राधेश्याम सोनी, पवन गट्टानी, नरसी प्रजापत, राजू मेहता, मास्टर कृष्ण वर्मा, पार्षद दीपक शर्मा विनोद शर्मा, मास्टर बजरंग लाल, अधिवक्ता प्रमोद शर्मा आदि ने शोक जताया है।
विज्ञापन
पंडित मांगेराम वशिष्ठ वर्ष 1981 में श्रीराम नाटक क्लब की स्थापना के समय से इससे जुड़े थे। उन्होंने चार दशक से अधिक समय तक रामलीला के मंच पर हास्य पात्रों का अभिनय कर दर्शकों को खूब गुदगुदाया। उनकी बुलंद आवाज और सहज अभिनय के कारण लोग उन्हें ‘कॉमेडियन किंग’ के नाम से जानते थे। उनकी हास्य शैली मर्यादित और सहज थी।
विज्ञापन
उनके भाई गजानंद वशिष्ठ ने बताया कि बड़े भाई उनके लिए गुरु समान थे। उन्होंने ही उन्हें अभिनय की बारीकियां सिखाईं। मांगेराम की पत्नी दिवंगत कांता देवी ने एक बार उनसे रामलीला में कोई अन्य पात्र निभाने को कहा था। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि यही तो मेरी पहचान है।
विज्ञापन
श्रीराम नाटक क्लब के प्रधान अजीत बंसल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मांगेराम केवल हास्य कलाकार नहीं बल्कि क्लब और शहर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा थे। उन्होंने नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रोत्साहित किया और सभी को परिवार की तरह साथ लेकर चले। उनके निधन से क्लब ने कलाकार ही नहीं बल्कि अपना मार्गदर्शक और अभिभावक भी खो दिया है।
पंडित मांगेराम के निधन पर उद्योगपति बाबूलाल जिंदल, मुंशी राम कौशिक, कृष्ण हेतमपुरिया, नवीन सूरतपुरिया, सज्जन वशिष्ठ, शिवकुमार वशिष्ठ, राधेश्याम सोनी, पवन गट्टानी, नरसी प्रजापत, राजू मेहता, मास्टर कृष्ण वर्मा, पार्षद दीपक शर्मा विनोद शर्मा, मास्टर बजरंग लाल, अधिवक्ता प्रमोद शर्मा आदि ने शोक जताया है।