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Hisar News: कम लागत, समय पर भुगतान ने बदली किसानों की बाजार पसंद, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के शोधार्थियों शोध में आया सामने कि किसान अब लाभ के हिसाब से चुन रहे बाजार
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हिसार की प्रो. सविता उब्बा
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हिसार। कम लागत, समय पर भुगतान और भरोसेमंद खरीद व्यवस्था अब किसानों के फैसले बदल रही है। हरियाणा का किसान परंपरागत मंडियों की सीमाओं से बाहर निकलकर नए बाजार विकल्पों की ओर बढ़ रहा है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के एक शोध का निष्कर्ष है कि किसान अब भावनाओं से नहीं, बल्कि लाभ और सुविधा के आधार पर बाजार चुन रहा है। वह केवल पारंपरिक मंडियों और आढ़तियों तक सीमित नहीं रहना चाहता। खेती की बढ़ती लागत, भुगतान में देरी और विपणन की परेशानियों के बीच किसान ऐसे बाजारों की तलाश में है जहां उसे कम खर्च, बेहतर दाम और समय पर भुगतान मिल सके। यही कारण है कि फल और सब्जी उत्पादक किसानों का रुझान धीरे-धीरे सुपरमार्केट की ओर बढ़ रहा है।
किसानों की बदलती सोच और बाजार चयन के पीछे कारणों को समझने के लिए जीजेयू के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के शोधार्थी मयंक सैनी और सुधीर भाटिया ने प्रो. सविता उब्बा के मार्गदर्शन में शोध किया। सुधीर वर्तमान में महाराजा अग्रसेन बिजनेस स्कूल, रोहिणी में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।
7 जिलों के 350 किसानों पर किया सर्वे
हरियाणा के सात जिलों- सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, सोनीपत और पानीपत के 350 फल व सब्जी उत्पादक किसानों पर आधारित पत्र को शोध पत्रिका जर्नल ऑफ इंटरनेशनल फूड एंड एग्रीबिजनेस मार्केटिंग में प्रकाशित किया गया है। शोध में सामने आया कि किसानों को सुपरमार्केट की ओर आकर्षित करने वाला सबसे बड़ा कारण विपणन लागत में कमी है। यदि किसान को लगता है कि सुपरमार्केट में उपज बेचने से परिवहन, कमीशन और खराब होने का खर्च कम होगा तो उसके वहां बिक्री करने की संभावना लगभग तीन गुना तक बढ़ जाती है। इसके अलावा समय पर भुगतान भी किसानों के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उम्र और अनुभव बाजार चयन को प्रभावित कर रहे
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि किसान की उम्र और अनुभव उसके बाजार चयन को प्रभावित करते हैं। अधिक उम्र और लंबे समय से खेती कर रहे किसान अब भी पारंपरिक आढ़तियों और मंडियों पर भरोसा करते हैं। उनके लिए यह केवल व्यापारिक संबंध नहीं बल्कि वर्षों पुराना सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव भी है। सह-शोधकर्ता सुधीर भाटिया का कहना है कि यह शोध केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह किसानों की मानसिकता और व्यवहार को समझने का प्रयास भी है।
किसान अब पूरी तरह व्यावहारिक सोच के साथ निर्णय ले रहा है। किसान वहां जाना चाहता है जहां उसका खर्च कम हो और लाभ अधिक मिले। सुपरमार्केट खरीद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाए रखें तो वे किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकते हैं।- शोधार्थी मयंक सैनी
किसान का निर्णय केवल आर्थिक आधार पर नहीं होता। उसके फैसले में सामाजिक विश्वास और वर्षों पुराने संबंध भी अहम भूमिका निभाते हैं। सुपरमार्केट किसानों को उसी स्तर का भरोसा, सम्मान और सुविधा देंगे तभी किसान पूरी तरह नए बाजार तंत्र को अपनाएगा। - प्रो. सविता उब्बा, शोध की मार्गदर्शक
किसानों की बदलती सोच और बाजार चयन के पीछे कारणों को समझने के लिए जीजेयू के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस के शोधार्थी मयंक सैनी और सुधीर भाटिया ने प्रो. सविता उब्बा के मार्गदर्शन में शोध किया। सुधीर वर्तमान में महाराजा अग्रसेन बिजनेस स्कूल, रोहिणी में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं।
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7 जिलों के 350 किसानों पर किया सर्वे
हरियाणा के सात जिलों- सिरसा, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, यमुनानगर, सोनीपत और पानीपत के 350 फल व सब्जी उत्पादक किसानों पर आधारित पत्र को शोध पत्रिका जर्नल ऑफ इंटरनेशनल फूड एंड एग्रीबिजनेस मार्केटिंग में प्रकाशित किया गया है। शोध में सामने आया कि किसानों को सुपरमार्केट की ओर आकर्षित करने वाला सबसे बड़ा कारण विपणन लागत में कमी है। यदि किसान को लगता है कि सुपरमार्केट में उपज बेचने से परिवहन, कमीशन और खराब होने का खर्च कम होगा तो उसके वहां बिक्री करने की संभावना लगभग तीन गुना तक बढ़ जाती है। इसके अलावा समय पर भुगतान भी किसानों के फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उम्र और अनुभव बाजार चयन को प्रभावित कर रहे
अध्ययन का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि किसान की उम्र और अनुभव उसके बाजार चयन को प्रभावित करते हैं। अधिक उम्र और लंबे समय से खेती कर रहे किसान अब भी पारंपरिक आढ़तियों और मंडियों पर भरोसा करते हैं। उनके लिए यह केवल व्यापारिक संबंध नहीं बल्कि वर्षों पुराना सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव भी है। सह-शोधकर्ता सुधीर भाटिया का कहना है कि यह शोध केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह किसानों की मानसिकता और व्यवहार को समझने का प्रयास भी है।
किसान अब पूरी तरह व्यावहारिक सोच के साथ निर्णय ले रहा है। किसान वहां जाना चाहता है जहां उसका खर्च कम हो और लाभ अधिक मिले। सुपरमार्केट खरीद प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाए रखें तो वे किसानों के लिए बेहतर विकल्प बन सकते हैं।- शोधार्थी मयंक सैनी
किसान का निर्णय केवल आर्थिक आधार पर नहीं होता। उसके फैसले में सामाजिक विश्वास और वर्षों पुराने संबंध भी अहम भूमिका निभाते हैं। सुपरमार्केट किसानों को उसी स्तर का भरोसा, सम्मान और सुविधा देंगे तभी किसान पूरी तरह नए बाजार तंत्र को अपनाएगा। - प्रो. सविता उब्बा, शोध की मार्गदर्शक