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Hisar News: औषधीय-सुगंधित फसलों से बढ़ेगी किसानों की आय
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हिसार के केवीके सदलपुर में औषधीय एवं सुगंधित फसलों के प्रशिक्षण शिविर में शामिल किसान।
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हिसार। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सदलपुर में मंगलवार को औषधीय, सुगंधित और संभावित फसलों की खेती, संरक्षण व उपयोग विषय पर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों से औषधीय और सुगंधित फसलों का उत्पादन बढ़ाने का आह्वान किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ संयोजक डॉ. नरेंद्र जनागल ने कहा कि आधुनिक कृषि में औषधीय व सुगंधित पौधों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है और इनकी बाजार में मांग भी अधिक है। इन उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दे सकते हैं।
एचएयू के औषधीय, सुगंधित व संभावित फसल अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार आर्य और वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण कुमार ने किसानों को क्षेत्र के लिए उपयुक्त विभिन्न फसलों, उन्नत उत्पादन तकनीकों तथा मूल्य संवर्धन व विपणन के अवसरों की जानकारी दी। आईसीएआर-डीएमएपीआर से प्रायोजित यह कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू) के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग (एमएपी वर्ग) की ओर से अनुसूचित जाति के किसानों के लिए आयोजित किया गया।
इसका उद्देश्य किसानों को औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती की तकनीकों, संरक्षण रणनीतियों और उनके आर्थिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि संबंधी अध्ययन सामग्री, उपकरण, बीज और औषधीय पौधों की रोपण सामग्री भी वितरित की गई। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने कृषि विविधीकरण और बेहतर आय के लिए इन फसलों को अपनाने में रुचि दिखाई।
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एचएयू के औषधीय, सुगंधित व संभावित फसल अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. राजेश कुमार आर्य और वैज्ञानिक डॉ. कृष्ण कुमार ने किसानों को क्षेत्र के लिए उपयुक्त विभिन्न फसलों, उन्नत उत्पादन तकनीकों तथा मूल्य संवर्धन व विपणन के अवसरों की जानकारी दी। आईसीएआर-डीएमएपीआर से प्रायोजित यह कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (सीसीएसएचएयू) के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग (एमएपी वर्ग) की ओर से अनुसूचित जाति के किसानों के लिए आयोजित किया गया।
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इसका उद्देश्य किसानों को औषधीय और सुगंधित फसलों की खेती की तकनीकों, संरक्षण रणनीतियों और उनके आर्थिक उपयोग के प्रति जागरूक करना था। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को कृषि संबंधी अध्ययन सामग्री, उपकरण, बीज और औषधीय पौधों की रोपण सामग्री भी वितरित की गई। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक सत्र के साथ हुआ, जिसमें किसानों ने कृषि विविधीकरण और बेहतर आय के लिए इन फसलों को अपनाने में रुचि दिखाई।