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Haryana: 50 हजार विदेशी पक्षी ठंडे देशों पहुंचे रामसर वैटलैंड, अटखेलियां कर सैलानियों को कर रहे आकर्षित

राकेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 14 Dec 2022 05:40 PM IST
सार

फ्लेमिंगो पक्षी, सारस स्केन, रोजी पोलिंग, कॉमन पोचार्ड दुर्लभ किस्म के प्रवासी पक्षी भी पहुंचे हैं। पक्षियों का कलरव सुनकर लोगों सुकून मिल रहा है।

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50 thousand foreign birds of  cold countries reached in Ramsar Wetland
रोजर फ्लेमिंग पक्षी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

हरियाणा में झज्जर जिला मुख्यालय से 15 किमी दूर भिंडावास गांव स्थित रामसर वैटलैंड विदेशी मेहमान पक्षियों को खूब रास आ रहा है। यहां की झील में बसेरा बनाकर अपनी मनमोहक कलरव और एक-दूसरे से चोंच मिलाकर अटखेलियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। झील में करीब 50 हजार विदेशी पक्षी ठंडे देशों से आ चुके हैं।



इस बार क्षेत्र में पक्षियों का आगमन अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में शुरू हो गया था। अब तक जिले में करीब एक लाख पक्षी आ चुके हैं। इसके अलावा साइबेरिया, कजाकिस्तान, रसिया, मंगोलिया, मध्य एशिया आदि से डीघल, छोछी, दुजाना, मांडोठी गांव के अलावा क्षेत्र के खेतों में भरे बारिश के छिछले पानी में भी करीब 40 हजार पक्षियों ने अपना बसेरा बना लिया है और कलरव कर रहे हैं। 

इसके अलावा गांव दुजाना, छोछी, मांडोठी, डीघल के ग्रामीण भी पक्षियों को देखकर बेहद खुश हैं। वन्य प्राणी विभाग ने पक्षियों की सुरक्षा के लिए भी निगरानी बढ़ा दी है। प्रवासी पक्षियों का शिकार न हो, इसके लिए भी वन्य विभाग अलर्ट पर है। पक्षियों को शिकारियों से बचाने के लिए आसपास के गांवों के लोगों को वन्य प्राणी विभाग ने अपने मोबाइल नंबर भी उपलब्ध कराए हैं।

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50 thousand foreign birds of  cold countries reached in Ramsar Wetland
भिंडावास झील में तैरते हुए प्रवासी पक्षी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सेलानी पक्षियों की सैरगाह के रूप में विख्यात है भिंडावास झील
फ्लेमिंगो पक्षी, सारस स्केन, रोजी पोलिंग, कॉमन पोचार्ड दुर्लभ किस्म के प्रवासी पक्षी भी पहुंचे हैं। पक्षियों का कलरव सुनकर लोगों सुकून मिल रहा है। डीघल-रोहतक सड़क मार्ग पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना है। यही वजह है कि भिंडावास झील सेलानी पक्षियों की सैरगाह के रूप में मशहूर है, क्योंकि यहां मौसम उनके अनुकूल रहता है। जलजमाव से भोजन का इंतजाम हो जाता है।

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एशियन ओपनबिल, फेरूजिनस डक, ग्रे लेंग्स, पेन्टिडंड स्टोर्क। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

इन प्रजातियों की है मौजूदगी
वन्य प्राणी विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गेडवेल, नोर्थन, सोलवर, रूढिस सेलडेक, कामडेक, स्पोर्ट बिल, मालार्ट, नौर्थन पिटेंल, कॉमन सेलडेड, पेन्टीड, स्टोर्क, सारस्केन, फ्लेमिंगो, हेडेड गूज, ग्रे लेग गूज, रेडशल डक, टफ्टेड डक आदि प्रवासी परिंदे देखे जा रहे हैं। ये प्रवासी पक्षी फरवरी के अंत तक यहां रहेंगे, इसके बाद यहां से उड़ जाते हैं।

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खेतो में हुए जलभराव में प्रवासी पक्षी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

1074 एकड़ में फैला है अभयारण्य क्षेत्र 
वर्ष 1986 में सरकार की ओर से भिंडावास झील की स्थापना की गई थी। वर्ष 2009 में केंद्र सरकार द्वारा इसे एक पक्षी अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। पिछले वर्ष 2021 में इस झील को रामसर वैटलैंड में शामिल किया गया था। जवाहरलाल नेहरू नहर कैनाल के अतिरिक्त पानी को स्टोर करने के लिए इसका निर्माण किया गया। यह 1074 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। जिसमें कन्हवा, बिलोचपुरा, नवादा, रेडूवास, शाहजहांपुर व चढ़वाना गांव का क्षेत्र शामिल है। भिंडावास झील एक ताजे पानी की झील है।

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भिंडावास झील में उड़ते हुए प्रवासी पक्षी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सर्दी का मौसम शुरू होते ही भिंडावास रामसर वैटलैंड के अलावा दर्जनों गांवों के खेतों में जलजमाव होने के कारण हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं। वन्य प्राणी विभाग की टीम प्रवासी पक्षियों की लगातार मॉनीटरिंग कर रही है। शिकारियों से बचाने के लिए विभाग अलर्ट है। - राजेश कुमार, निरीक्षक, वन्य प्राणी विभाग 

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