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Jhajjar-Bahadurgarh News: मांडोठी बाजार और बागवाला मोहल्ले को जलभराव से चाहिए आजादी
Fri, 14 Aug 2026 04:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 14 Aug 2026 04:32 PM IST
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फोटो-53: मांडोठी बाजार में हुआ जलभराव। फाइल फोटो
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। देश आज आजादी का जश्न मना रहा है लेकिन बहादुरगढ़ के मांडोठी बाजार और बागवाला मोहल्ले के करीब दो हजार परिवार आज भी जलभराव से आजादी का इंतजार कर रहे हैं। पुराने शहर के ये दोनों प्रमुख इलाके पिछले 20 वर्षों से भी अधिक समय से बारिश के पानी की समस्या झेल रहे हैं।
हालात ऐसे हैं कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़कें डेढ़ से तीन फीट तक पानी में डूब जाती हैं और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। उन्हें घरों में ही कैद रहना पड़ता है। घरा से बाहर पैर रखते ही लोग दो-तीन फीट पानी में होते हैं। बागवाला मोहल्ला निवासी विपिन, भूपेंद्र राठी आदि का आरोप है कि बागवाला मोहल्ले में जलनिकासी के स्थायी इंतजाम करने के बजाय अब तक कई स्तर पर खानापूर्ति होती रही है।
लाखों रुपये की लागत से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया, लेकिन जलभराव की समस्या खत्म नहीं हुई। वहीं शहर में करीब पौने दो करोड़ रुपये की लागत से नालों की सफाई का काम चल रहा है, इसके बावजूद इलाके के नाले जाम हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना पैसा खर्च होने के बाद भी लोगों को जलभराव से राहत क्यों नहीं मिली। 4 अगस्त को जलभराव के बीच जर्जर तारों से करंट की चपेट में आने से 38 वर्षीय ओमप्रकाश की मौत ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
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मांडोठी बाजार की स्थिति भी अलग नहीं है। यहां राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का मुख्य रास्ता होने के कारण बारिश के दौरान छात्राओं को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। जलभराव के कारण लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। मांडोठी बाजार निवासी योगेंद्र वत्स ने कहा कि प्रशासन को अब कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि पानी निकासी का स्थायी इंतजाम करना चाहिए। समाज सेवी राजकुमार अरोड़ा ने का कहना है कि आजादी के जश्न के बीच दोनों इलाकों के लोगों का एक ही सवाल है कि जलभराव से उन्हें आखिर कब मिलेगी आजादी? वहीं इस बारे में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय रोहिल्ला ने बताया कि ये दोनों निचले क्षेत्र हैं। ऐसे में जब भी बारिश होती है तो एक बार जलभराव होता है। कुछ देर बाद तुरंत निकासी हो जाती है।
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बहादुरगढ़। देश आज आजादी का जश्न मना रहा है लेकिन बहादुरगढ़ के मांडोठी बाजार और बागवाला मोहल्ले के करीब दो हजार परिवार आज भी जलभराव से आजादी का इंतजार कर रहे हैं। पुराने शहर के ये दोनों प्रमुख इलाके पिछले 20 वर्षों से भी अधिक समय से बारिश के पानी की समस्या झेल रहे हैं।
हालात ऐसे हैं कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़कें डेढ़ से तीन फीट तक पानी में डूब जाती हैं और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। उन्हें घरों में ही कैद रहना पड़ता है। घरा से बाहर पैर रखते ही लोग दो-तीन फीट पानी में होते हैं। बागवाला मोहल्ला निवासी विपिन, भूपेंद्र राठी आदि का आरोप है कि बागवाला मोहल्ले में जलनिकासी के स्थायी इंतजाम करने के बजाय अब तक कई स्तर पर खानापूर्ति होती रही है।
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लाखों रुपये की लागत से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया, लेकिन जलभराव की समस्या खत्म नहीं हुई। वहीं शहर में करीब पौने दो करोड़ रुपये की लागत से नालों की सफाई का काम चल रहा है, इसके बावजूद इलाके के नाले जाम हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतना पैसा खर्च होने के बाद भी लोगों को जलभराव से राहत क्यों नहीं मिली। 4 अगस्त को जलभराव के बीच जर्जर तारों से करंट की चपेट में आने से 38 वर्षीय ओमप्रकाश की मौत ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
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मांडोठी बाजार की स्थिति भी अलग नहीं है। यहां राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का मुख्य रास्ता होने के कारण बारिश के दौरान छात्राओं को पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। जलभराव के कारण लोगों के घरों और दुकानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। मांडोठी बाजार निवासी योगेंद्र वत्स ने कहा कि प्रशासन को अब कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि पानी निकासी का स्थायी इंतजाम करना चाहिए। समाज सेवी राजकुमार अरोड़ा ने का कहना है कि आजादी के जश्न के बीच दोनों इलाकों के लोगों का एक ही सवाल है कि जलभराव से उन्हें आखिर कब मिलेगी आजादी? वहीं इस बारे में नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी संजय रोहिल्ला ने बताया कि ये दोनों निचले क्षेत्र हैं। ऐसे में जब भी बारिश होती है तो एक बार जलभराव होता है। कुछ देर बाद तुरंत निकासी हो जाती है।