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यूपीएससी : तीसरे प्रयास में हासिल की 852वीं रैंक, सीनियर से हुईं प्रभावित
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फोटो-57: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में 852वीं रैंक हासिल करने वाली बहादुरगढ़ के गांव जसौर ख
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बहादुरगढ़। गांव जसौर खेड़ी की बेटी मानसी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में तीसरे प्रयास में 852वीं रैंक हासिल की है। पहले दो प्रयासों में वह प्री और मेन परीक्षा पार नहीं कर सकी थी लेकिन इस बार वे पहली बार साक्षात्कार तक पहुंचीं और अंतिम परिणाम में सफलता हासिल कर ली।
मानसी का कहना है कि वे रैंक में सुधार करने के लिए अभी प्रयास जारी रखेंगी। आगे भी वे यह परीक्षा और कड़ी मेहनत के साथ देंगी। स्नातक की पढ़ाई के दौरान मानसी ने अपनी एक सीनियर को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते देखा। यहीं से यूपीएससी का सपना जगा।
शुरुआत में वह प्रतिदिन लगभग 4 से 5 घंटे पढ़ाई करती थीं। पहले दो प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद मानसी ने हिम्मत नहीं हारी। तीसरे प्रयास में उन्होंने पढ़ाई के घंटे बढ़ाए और सिलेबस पूरा करने और नियमित रिवीजन पर ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने रोजाना अखबार पढ़ने की आदत भी बनाए रखी।
मानसी के पिता विरेंद्र दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं जबकि उनकी मां निर्मला गृहिणी हैं। तीन बहनों में मानसी दूसरे नंबर पर हैं और उनका एक छोटा भाई भी है। परिवार में पढ़ाई का माहौल रहा है और तीनों बहनें पढ़ाई में काफी होनहार मानी जाती हैं।
मानसी की छोटी बहन मातनहेल में ग्राम सचिव के पद पर कार्यरत है जबकि बड़ी बहन भी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर चुकी हैं। पिता विरेंद्र ने बताया कि मानसी शुरू से ही पढ़ाई में तेज रही हैं। दसवीं कक्षा गांव के ही एक निजी स्कूल से प्रथम स्थान के साथ पास की थी।
इसके बाद उन्होंने बहादुरगढ़ के बीएसएम स्कूल से 12वीं कक्षा नॉन मेडिकल संकाय से द्वितीय स्थान के साथ उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिए मानसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से बीएससी नॉन मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है।
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मानसी का कहना है कि वे रैंक में सुधार करने के लिए अभी प्रयास जारी रखेंगी। आगे भी वे यह परीक्षा और कड़ी मेहनत के साथ देंगी। स्नातक की पढ़ाई के दौरान मानसी ने अपनी एक सीनियर को यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते देखा। यहीं से यूपीएससी का सपना जगा।
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शुरुआत में वह प्रतिदिन लगभग 4 से 5 घंटे पढ़ाई करती थीं। पहले दो प्रयासों में सफलता नहीं मिलने के बावजूद मानसी ने हिम्मत नहीं हारी। तीसरे प्रयास में उन्होंने पढ़ाई के घंटे बढ़ाए और सिलेबस पूरा करने और नियमित रिवीजन पर ध्यान दिया। इसके साथ ही उन्होंने रोजाना अखबार पढ़ने की आदत भी बनाए रखी।
मानसी के पिता विरेंद्र दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर हैं जबकि उनकी मां निर्मला गृहिणी हैं। तीन बहनों में मानसी दूसरे नंबर पर हैं और उनका एक छोटा भाई भी है। परिवार में पढ़ाई का माहौल रहा है और तीनों बहनें पढ़ाई में काफी होनहार मानी जाती हैं।
मानसी की छोटी बहन मातनहेल में ग्राम सचिव के पद पर कार्यरत है जबकि बड़ी बहन भी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कर चुकी हैं। पिता विरेंद्र ने बताया कि मानसी शुरू से ही पढ़ाई में तेज रही हैं। दसवीं कक्षा गांव के ही एक निजी स्कूल से प्रथम स्थान के साथ पास की थी।
इसके बाद उन्होंने बहादुरगढ़ के बीएसएम स्कूल से 12वीं कक्षा नॉन मेडिकल संकाय से द्वितीय स्थान के साथ उत्तीर्ण की। आगे की पढ़ाई के लिए मानसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से बीएससी नॉन मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है।