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Jhajjar-Bahadurgarh News: राखी मेले में 35 स्टॉल पर सजी महिलाओं की हस्तशिल्प कला
Fri, 14 Aug 2026 06:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 14 Aug 2026 06:04 PM IST
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फोटो-58: बहादुरगढ़ में आयोजित मेले में सामान खरीदती महिलाएं। संवाद
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बहादुरगढ़। महिलाओं के हुनर और हस्तनिर्मित उत्पादों को मंच देने के उद्देश्य से एचएल सिटी में राखी मेले का आयोजन किया जा रहा है। 16 अगस्त तक चलने वाले राखी मेले के बाद यहां 23 अगस्त तक आजादी उत्सव भी मनाया जाएगा। मेले में बहादुरगढ़, दिल्ली, बिहार, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों से महिलाएं अपने हाथों से तैयार की गई वस्तुएं लेकर पहुंची हैं।
मेले में करीब 35 स्टॉल लगाए गए। जहां महिलाओं की शिल्प कला और रचनात्मकता देखने को मिल रही है। स्टॉलों पर हाथ से तैयार की गई राखियां, घर की सजावट का सामान, साड़ियां, सूट, चटाइयां, बैंगल्स, ईयररिंग्स, जूती और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। तीज पर्व को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के श्रृंगार और सजावट से जुड़ी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।
मेले में बनारसी साड़ी और हाथ से तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के वस्त्रों के साथ महिलाओं के लिए मेहंदी और श्रृंगार की सामग्री भी प्रदर्शित की जा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर और स्थानीय कला को इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है।
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आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपने हुनर को बाजार उपलब्ध कराने के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है। मेले में खरीदारी के साथ लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को करीब से देखने का मौका भी मिल रहा है।
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मेले में करीब 35 स्टॉल लगाए गए। जहां महिलाओं की शिल्प कला और रचनात्मकता देखने को मिल रही है। स्टॉलों पर हाथ से तैयार की गई राखियां, घर की सजावट का सामान, साड़ियां, सूट, चटाइयां, बैंगल्स, ईयररिंग्स, जूती और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। तीज पर्व को ध्यान में रखते हुए महिलाओं के श्रृंगार और सजावट से जुड़ी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है।
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मेले में बनारसी साड़ी और हाथ से तैयार किए गए विभिन्न प्रकार के वस्त्रों के साथ महिलाओं के लिए मेहंदी और श्रृंगार की सामग्री भी प्रदर्शित की जा रही है। अलग-अलग क्षेत्रों से आई महिलाओं ने अपने पारंपरिक हुनर और स्थानीय कला को इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया है।
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आयोजकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से महिलाओं को अपने हुनर को बाजार उपलब्ध कराने के साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलता है। मेले में खरीदारी के साथ लोगों को देश के विभिन्न हिस्सों की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को करीब से देखने का मौका भी मिल रहा है।