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Jind News: लंबित मांगों को लेकर 31 मार्च को अनाज मंडी में होगी ललकार रैली
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जींद। संयुक्त किसान मोर्चा (हरियाणा) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 31 मार्च को जींद की नई अनाज मंडी में किसान मजदूर ललकार रैली का आयोजन किया जा रहा है। इसमें प्रदेश भर से हजारों किसानों और मजदूरों के जुटने की उम्मीद है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जोगिंद्र घासी राम नैन के नेतृत्व में इस रैली की रूपरेखा तैयार की गई है। किसानों की सबसे प्रमुख मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर फसलों के भाव तय करना और खरीद की कानूनी गारंटी बनाना है।
इसके अलावा, किसान संगठनों ने मांग की है कि किसान और मजदूरों के तमाम कर्ज बिना शर्त माफ किए जाएं। बिजली बिल 2025 और नए बीज विधेयक बिल को तत्काल निरस्त किया जाए। मनरेगा योजना को निरंतर जारी रखा जाए। भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और हालिया लेबर कानून संशोधनों को रद्द कर पुराना कानून बहाल किया जाए।
रैली का एक मुख्य एजेंडा मंडियों में लागू किए गए नए नियमों का विरोध करना भी है। किसान नेताओं का कहना है कि गेहूं की खरीद में लगाया गया बायोमेट्रिक सत्यापन व्यावहारिक नहीं है। इससे खरीद प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होगी।
इससे मंडियों में जाम की स्थिति बनेगी और किसानों की फसल महीनों तक नहीं बिक पाएगी। नैन ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक सरकार ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया तो संघर्ष का बिगुल बजा दिया जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जोगिंद्र घासी राम नैन के नेतृत्व में इस रैली की रूपरेखा तैयार की गई है। किसानों की सबसे प्रमुख मांग स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर फसलों के भाव तय करना और खरीद की कानूनी गारंटी बनाना है।
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इसके अलावा, किसान संगठनों ने मांग की है कि किसान और मजदूरों के तमाम कर्ज बिना शर्त माफ किए जाएं। बिजली बिल 2025 और नए बीज विधेयक बिल को तत्काल निरस्त किया जाए। मनरेगा योजना को निरंतर जारी रखा जाए। भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते और हालिया लेबर कानून संशोधनों को रद्द कर पुराना कानून बहाल किया जाए।
रैली का एक मुख्य एजेंडा मंडियों में लागू किए गए नए नियमों का विरोध करना भी है। किसान नेताओं का कहना है कि गेहूं की खरीद में लगाया गया बायोमेट्रिक सत्यापन व्यावहारिक नहीं है। इससे खरीद प्रक्रिया में अत्यधिक देरी होगी।
इससे मंडियों में जाम की स्थिति बनेगी और किसानों की फसल महीनों तक नहीं बिक पाएगी। नैन ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक सरकार ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया तो संघर्ष का बिगुल बजा दिया जाएगा।