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Jind News: जागरूक करते-करते खुद बनीं प्रकृति प्रेमी, घर को बनाया बगीचा
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 23 Mar 2026 02:50 AM IST
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22जेएनडी04: वंदना गुप्ता अपने घर में लगाए पौधों की देखभाल करते हुए। संवाद
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जींद। शिक्षा विभाग में ज्वाइंट डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त वंदना गुप्ता आज प्रकृति प्रेम की मिसाल बन चुकी हैं। स्कूलों में इको क्लब के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, पौधरोपण और उनकी देखभाल के लिए जागरूक करते-करते उनके भीतर भी प्रकृति के प्रति गहरा लगाव पैदा हो गया।
करीब 25 साल पहले शुरू हुई वंदना गुप्ता की यात्रा के बाद आज उन्होंने अपने घर को हरियाली से भरे एक छोटे से बगीचे में बदल दिया है। सेवा के दौरान समय की कमी के चलते उनके पास लगभग 200 पौधे ही थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने इस शौक को पूरी तरह अपनाया। आज उनके घर में 400 से अधिक विभिन्न प्रकार के फूलदार और औषधीय पौधे गमलों में सजे हुए हैं।
खास बात है कि वे इन पौधों की देखभाल खुद सुबह-शाम करती हैं और किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं करतीं। वंदना गुप्ता किचन वेस्टेज का सदुपयोग करते हुए पौधों के लिए प्राकृतिक खाद तैयार करती हैं। सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती, फल के अवशेष आदि से तैयार खाद न केवल पौधों को पोषण देती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।
उनका मानना है कि हर घर में छोटी-सी हरियाली भी वातावरण को शुद्ध और मन को शांत बना सकती है।
30 से अधिक पौधे बना रहे शोभा
तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, अजवाइन, नीम, अश्वगंधा, ब्रह्मी, शतावरी, लेमनग्रास, गुड़हल, गुलाब, मोगरा, चमेली, गेंदा, डहेलिया, पेटुनिया, जरबेरा, स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, एरिका पाम, पीस लिली, कनेर, हरसिंगार, कचनार, रबर प्लांट और फर्न जैसे करीब 30 प्रमुख पौधे बगीचे में लगे हैं। ये सभी बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं। वंदना गुप्ता कहती हैं कि इको क्लब केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि एक सोच है। यह बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पैदा करती है। आज वह अपने जीवन के इस चरण में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं और लोगों को हरियाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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करीब 25 साल पहले शुरू हुई वंदना गुप्ता की यात्रा के बाद आज उन्होंने अपने घर को हरियाली से भरे एक छोटे से बगीचे में बदल दिया है। सेवा के दौरान समय की कमी के चलते उनके पास लगभग 200 पौधे ही थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपने इस शौक को पूरी तरह अपनाया। आज उनके घर में 400 से अधिक विभिन्न प्रकार के फूलदार और औषधीय पौधे गमलों में सजे हुए हैं।
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खास बात है कि वे इन पौधों की देखभाल खुद सुबह-शाम करती हैं और किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं करतीं। वंदना गुप्ता किचन वेस्टेज का सदुपयोग करते हुए पौधों के लिए प्राकृतिक खाद तैयार करती हैं। सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती, फल के अवशेष आदि से तैयार खाद न केवल पौधों को पोषण देती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।
उनका मानना है कि हर घर में छोटी-सी हरियाली भी वातावरण को शुद्ध और मन को शांत बना सकती है।
30 से अधिक पौधे बना रहे शोभा
तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, अजवाइन, नीम, अश्वगंधा, ब्रह्मी, शतावरी, लेमनग्रास, गुड़हल, गुलाब, मोगरा, चमेली, गेंदा, डहेलिया, पेटुनिया, जरबेरा, स्नेक प्लांट, मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, एरिका पाम, पीस लिली, कनेर, हरसिंगार, कचनार, रबर प्लांट और फर्न जैसे करीब 30 प्रमुख पौधे बगीचे में लगे हैं। ये सभी बगीचे की शोभा बढ़ा रहे हैं। वंदना गुप्ता कहती हैं कि इको क्लब केवल एक गतिविधि नहीं बल्कि एक सोच है। यह बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पैदा करती है। आज वह अपने जीवन के इस चरण में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही हैं और लोगों को हरियाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।