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Jind News: इलेक्ट्रो फायर की जांच के लिए इंदौर से पहुंचा इंजीनियर
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 01 Feb 2026 12:00 AM IST
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31जेएनडी42-भंभेवा स्टेशन पर इंजन की टेस्टिंग करती रेलवे की टीम। संवाद
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जींद। हाइड्रोजन गैस में नमी कम करने के लिए इंदौर से इंजीनियर पहुंच गए हैं। उनकी अगुवाई में इलेक्ट्रो फायर से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं को बारीकी से परखा जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या हादसे की आशंका को समय रहते दूर किया जा सके।
हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन का तीन दिनों से भंभेवा स्टेशन पर टेस्टिंग का काम चल रहा है। इंजन को अलग-अलग परिस्थितियों में चलाकर उसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा रहा है। शनिवार को भी इंजन की तकनीकी क्षमता, ब्रेक, हॉर्न, लाइट सिस्टम, स्पीडो मीटर समेत अन्य उपकरणों की जांच की गई। इलेक्ट्रो फायर की संभावना को ध्यान में रखते हुए यह जांच बेहद अहम मानी जा रही है।
इंदौर से पहुंचे विशेषज्ञ इंजीनियर इंजन में लगे इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग, कंट्रोल पैनल, बैटरी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच कर रहे हैं। इसके अलावा इंजन के संचालन के दौरान कहीं से ओवर हीटिंग या शॉर्ट सर्किट जैसी समस्या तो उत्पन्न नहीं हो रही। टेस्टिंग का यह चरण पूरा होने के बाद ही ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा। ट्रायल से पहले सभी रिपोर्टों का विश्लेषण किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इंजन पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप है। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है, तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा। इंजन की सफल टेस्टिंग और ट्रायल के बाद ही आगे की प्रक्रिया को मंजूरी मिलेगी।
बता दें कि जनवरी में बढ़ी सर्दी के कारण गैस में नमी आ गई थी। इस कारण बाहर से टैंकर में हाइड्रोजन गैस मंगवाई गई थी। उसे ट्रेन के इंजन में भरकर भंभेवा स्टेशन पर ले जाया गया है। जांच पूरी होने के बाद हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन को जींद वापस लाया जाएगा।
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हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन का तीन दिनों से भंभेवा स्टेशन पर टेस्टिंग का काम चल रहा है। इंजन को अलग-अलग परिस्थितियों में चलाकर उसकी कार्यक्षमता और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा रहा है। शनिवार को भी इंजन की तकनीकी क्षमता, ब्रेक, हॉर्न, लाइट सिस्टम, स्पीडो मीटर समेत अन्य उपकरणों की जांच की गई। इलेक्ट्रो फायर की संभावना को ध्यान में रखते हुए यह जांच बेहद अहम मानी जा रही है।
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इंदौर से पहुंचे विशेषज्ञ इंजीनियर इंजन में लगे इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग, कंट्रोल पैनल, बैटरी सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच कर रहे हैं। इसके अलावा इंजन के संचालन के दौरान कहीं से ओवर हीटिंग या शॉर्ट सर्किट जैसी समस्या तो उत्पन्न नहीं हो रही। टेस्टिंग का यह चरण पूरा होने के बाद ही ट्रेन का ट्रायल लिया जाएगा। ट्रायल से पहले सभी रिपोर्टों का विश्लेषण किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इंजन पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप है। यदि किसी प्रकार की कमी सामने आती है, तो उसे तुरंत दूर किया जाएगा। इंजन की सफल टेस्टिंग और ट्रायल के बाद ही आगे की प्रक्रिया को मंजूरी मिलेगी।
बता दें कि जनवरी में बढ़ी सर्दी के कारण गैस में नमी आ गई थी। इस कारण बाहर से टैंकर में हाइड्रोजन गैस मंगवाई गई थी। उसे ट्रेन के इंजन में भरकर भंभेवा स्टेशन पर ले जाया गया है। जांच पूरी होने के बाद हाइड्रोजन ट्रेन के इंजन को जींद वापस लाया जाएगा।
