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Jind News: भीम अवॉर्ड विजेता रिंपी गढ़ रहीं नई खेल प्रतिभाएं
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08जेएनडी33: रिंपी।
- फोटो : एक साथ जन्मे तीन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करतीं चिकित्सक।
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जींद। नरवाना क्षेत्र के गांव धरौदी की अंतरराष्ट्रीय हैंडबाल खिलाड़ी रिंपी आज खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। अब भीम अवॉर्ड विजेता रिंपी का पूरा ध्यान नई खेल प्रतिभाओं को तराशने पर है।
कभी भारतीय टीम की कप्तान के रूप में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली रिंपी आज कोच की भूमिका निभाते हुए युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मेहनत कर रही हैं। रिंपी का नाम हरियाणा की सफल महिला खिलाड़ियों में प्रमुखता से लिया जाता है। साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने अपने खेल कौशल के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
वर्ष 2014 और 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा रहीं रिंपी ने कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। साउथ एशियन गेम्स और साउथ एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें सात बार भारत की सर्वश्रेष्ठ हैंडबाल खिलाड़ी का सम्मान मिल चुका है।
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खेल उपलब्धियों के आधार पर उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से भीम अवॉर्ड और बेस्ट वुमेन अचीवर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि रिंपी मानती हैं कि खिलाड़ियों को तैयार करना किसी पदक जीतने से कम उपलब्धि नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने अपने अनुभव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया है।
अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती के गुर सिखा रहीं रिंपी
वर्तमान में रिंपी नरवाना स्टेडियम में कोच के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। वे खिलाड़ियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देतीं बल्कि अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती के गुर भी सिखाती हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है।
रिंपी की नई भूमिका खेल जगत में चर्चा का विषय
रिंपी की यह नई भूमिका खेल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक सफल खिलाड़ी से सफल कोच बनने का उनका सफर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। खेल प्रेमियों का मानना है कि जिस तरह रिंपी ने मैदान में देश का गौरव बढ़ाया, उसी तरह उनके शिष्य भी आने वाले समय में प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।
कभी भारतीय टीम की कप्तान के रूप में देश का प्रतिनिधित्व करने वाली रिंपी आज कोच की भूमिका निभाते हुए युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए मेहनत कर रही हैं। रिंपी का नाम हरियाणा की सफल महिला खिलाड़ियों में प्रमुखता से लिया जाता है। साधारण किसान परिवार से निकलकर उन्होंने अपने खेल कौशल के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
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वर्ष 2014 और 2018 के एशियाई खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा रहीं रिंपी ने कई महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व किया। साउथ एशियन गेम्स और साउथ एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। शानदार प्रदर्शन के कारण उन्हें सात बार भारत की सर्वश्रेष्ठ हैंडबाल खिलाड़ी का सम्मान मिल चुका है।
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अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती के गुर सिखा रहीं रिंपी
वर्तमान में रिंपी नरवाना स्टेडियम में कोच के रूप में सेवाएं दे रही हैं। उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। वे खिलाड़ियों को केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं देतीं बल्कि अनुशासन, फिटनेस और मानसिक मजबूती के गुर भी सिखाती हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है।
रिंपी की नई भूमिका खेल जगत में चर्चा का विषय
रिंपी की यह नई भूमिका खेल जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक सफल खिलाड़ी से सफल कोच बनने का उनका सफर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी है। खेल प्रेमियों का मानना है कि जिस तरह रिंपी ने मैदान में देश का गौरव बढ़ाया, उसी तरह उनके शिष्य भी आने वाले समय में प्रदेश और देश का नाम रोशन करेंगे।